आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर प्रकरण में माखी पुलिस, जेल प्रशासन व डाक्टरों ने नंबर बढ़ाने के फेर में अपनी ही फजीहत करा ली। सीबीआई जांच में तेजी आते ही लापरवाही की परतें खुलकर सामने आने लगी हैं। हालांकि सभी एक, दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं। फिलहाल सीबीआई पुलिसकर्मियों व डॉक्टरों को रडार पर लेकर उनके व विधायक के बीच कनेक्शन की जांच कर रही है।
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आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
विधायक पर आरोप लगाने वाली किशोरी के पिता को मारपीट व आर्म्स एक्ट के मामले में माखी पुलिस ने जेल भेजा था। किशोरी के पिता को जेल भेजने वाली पुलिस को उसके शरीर पर पिटाई के डेढ़ दर्जन चोटों के निशान नहीं दिखाई दिए थे। सीबीआई ने जांच शुरू करते ही सबसे पहले इसी पर सवाल किया। हालांकि उसे सटीक जवाब नहीं मिला।
उधर, जांच के घेरे में आए अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि पुलिस के दबाव में बंदी को उपचार नहीं मिल सका था। डाक्टरों ने अपना जवाब भी लिखकर दे दिया है। अधिकारियों को जवाब लिखकर भेजने वाले डाक्टरों का कहना है कि जेल प्रशासन को बंदी का उपचार कराने को कहा गया था लेकिन उसे समय से अस्पताल नहीं ले जाया गया।
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आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
क्या कहता है जेल प्रशासन--
बंदी की मौत के मामले में जेल प्रशासन का कहना है कि बंदी की हालत बिगड़ने पर उन्होंने दो बार चिट्ठी लिखी थी लेकिन जिला अस्पताल से डाक्टर भेजने में देरी की गई। अधिकारियों के अनुसार पहली चिट्ठी 5 अप्रैल को लिखी गई थी। चिट्ठी लिखने के दूसरे दिन बंदी की जांच हो सकी। उधर 7 अप्रैल को बंदी को जिला अस्पताल भेजा गया।
जहां उपचार के बाद उसे भर्ती न कर दोबारा जेल भेज दिया गया। 8 अप्रैल की रात हालत बिगड़ने पर बंदी को फिर अस्पताल लाया गया था। जहां 9 की सुबह सकी मौत हो गई। जेल प्रशासन के अनुसार अस्पताल के डाक्टरों ने लापरवाही की।
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आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
क्या कहते हैं अस्पताल के डाक्टर
जिला अस्पताल के डाक्टरों का कहना है कि पुलिस ने 3 अप्रैल को मेडिकल कराने के साथ ही उपचार में दबाव बनाया। 7 अप्रैल को जब बंदी को अस्पताल लाया गया था। तब उसे भर्ती करने को कहा गया था। हालांकि जेल से आए पुलिसकर्मी उसे जबरन लिवा ले गए थे। डाक्टरों के अनुसार उन्होंने अपनी बात जांच कर रहे अधिकारियों को बता दी है।
सीबीआई तलाश रही जवाब --
क्या जिला अस्पताल के डाक्टरों ने दबाव में काम किया? अगर उन पर दबाव था तो उन्होंने अधिकारियों को मामले की सूचना क्यों नहीं दी।
सीबीआई आरोपों में घिरे विधायक से डाक्टरों के कनेक्शन भी तलाश रही है।
मेडिकल के लिए लाने वाले पुलिसकर्मियों ने चोटों पर क्यों नहीं ध्यान दिया। सीबीआई ने मेडिकल के दौरान बनाए गए वीडियो को जांच में शामिल किया है।
जेल प्रशासन से चिट्ठी लिखने के बाद भी उपचार में देरी क्यों बरती गई। जेल प्रशासन व अस्पताल प्रशासन को जांच के घेरे में रखा गया है।
बंदी की मौत के मामले में जिम्मेदार कौन है? माखी पुलिस, जेल प्रशासन और अस्पताल प्रशासन पर सीबीआई की नजरें टिकी हैं।