यूपी के कानपुर में सीओडी क्रासिंग रेलवे ओवरब्रिज के शुभारंभ मौके पर कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने पूर्व केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कहा कि इस पुल की रूपरेखा ही तय नहीं की गई। आरओबी एक लेन या दो लेन या फिर फोर लेन बनेगा यही तय नहीं हो सका। इससे काम में कठिनाई बनी रही।
विज्ञापन
रात तक चला काम
2 of 4
सतीश महाना
आरओबी पर रात तक काम चलता रहा। अफसरों ने मंदिर के पीछे की सर्विस लेन, रैंप किनारे सुरक्षा के लिए बोरियां लगवाईं। उद्घाटन होने तक रामादेवी की ओर रैंप की आधी सड़क का काम नौबस्ता पुलिस के कारण नहीं हो सका। दरअसल आरओबी के लिए राजपुर (कानपुर देहात) स्थित हाटमिक्स प्लांट से सड़क बनाने का तैयार मैटेरियल आता है। इसे लेने जा रही दो गाड़ियों को नौबस्ता पुलिस ने रोक लिया। मामले में भाजपाइयों ने फोनकर गाड़ियों को छुड़वाया।
विज्ञापन
तीन कंपनियां छोड़ गईं काम
3 of 4
सतीश महाना
सीओडी आरओबी निर्माण की शुरुआत से लेकर अब तक तीन कंपनियां काम छोड़ चुकी हैं। इसके निर्माण के दौरान दो केंद्र सरकारें बदल गईं। 2007 में आरओबी का प्रस्ताव बना। 2008 में पुल निर्माण को मिली मंजूरी। स्वीकृति के समय लागत 35.74 करोड़ रुपये (पीडब्लूडी का हिस्सा 25.74 करोड़ और रेलवे का हिस्सा 10 करोड़ रुपये) थी। वर्तमान लागत करीब 54 करोड़ रुपये पहुंची। अब तक कंपनी को करीब 30 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
कछुआ चाल से बन रहे आरओबी की एक लेन (दो रोड) शुरुआत के लिए सबसे पहले फरवरी 2017 की तारीख तय की गई। तब से लेकर 15 बार आरओबी शुरुआत की तारीख तय हुईं, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हो सका।