कानपुर में सीएए के विरोध में हुई हिंसा के मामले में जेल भेजे गए उपद्रवी घटना से पहले हुईं भड़काऊ सभाओं में शामिल हुए थे। इसके बाद अन्य लोगों को भड़काने और भीड़ जुटाने में मदद की। पुलिस अब आरोपियों का पीएफआई से कनेक्शन तलाश रही है।
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कानपुर में पकड़े गए पांच पीएफआई के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
सर्विलांस की मदद से पकड़ में आए अफजल, जावेद और आमिर ने पुलिस की पूछताछ में एक बड़े शख्स का नाम लिया। उन्होंने सीएए के बारे में बताकर विरोध करने के लिए कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि जितने लोग सभा में हैं।
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कानपुर में हिंसा की तस्वीरें
- फोटो : अमर उजाला
वे कम से 50-50 लोगों कोे इसके बारे में बताएं और प्रदर्शन के लिए तैयार रहें। ये सभाएं दस दिसंबर से लेकर 18 दिसंबर के बीच हुईं थीं। इनमें ये तीनों शामिल हुए थे। पुलिस सभाओं में भड़काऊ भाषण देने वाले शख्स की भी तलाश कर रही है।
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कानपुर में हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
खंगाली जा रही कॉल डिटेल
पुलिस के मुताबिक अफजल यतीमखाना हिंसा के दोनों दिन शामिल रहा। वह भीड़ के साथ नवीन मार्केट तक गया था। आईटीएमएस के कैमरों में उसकी तस्वीरें कैद हैं। सूत्रों के मुताबिक पुलिस पता कर रही है कि बाबूपुरवा हिंसा में जेल भेजे गए पीएफआई के सदस्यों से तीनों का संपर्क था या नहीं।
भड़काऊ नाम से बने व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े
पुलिस ने तीनों उपद्रवियों के मोबाइल भी खंगाले। आरोपी करीब 12 से 15 ऐसे व्हाट्सएप ग्रुपों से जुड़े हैं जो भड़काऊ नाम से बने हैं। इसमें उसी तरह के हजारों मैसेज भी मिले हैं। पुलिस इन सभी जानकारियों की छानबीन कर रही है।