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जो खूब लड़ी, दुर्दशा में पड़ी...

Fri, 20 Nov 2020 10:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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रानी लक्ष्मी बाई की टूटी हुई मूर्ति - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के कानपुर में बिठूर स्थित रानी लक्ष्मीबाई घाट पर रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा देख आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे। ये वही रानी लक्ष्मीबाई हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। 

 
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रानी लक्ष्मी बाई की टूटी हुई मूर्ति - फोटो : amar ujala
कनपुर से देश की आजादी के लिए पहली आवाज उठी थी। 1857 के संग्राम का केंद्र बिठूर था। जिसे 1857 के ऐतिहासिक प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र भी माना जाता है। बिठूर वही स्थान है जहां, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई का बचपन बीता है।

 
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रानी लक्ष्मी बाई की टूटी हुई मूर्ति - फोटो : amar ujala
बिठूर में ही रानी लक्ष्मी बाई ने घुड़सवारी, तीरांदाजी, बारूद बनाना और यु्द्ध करना सीखा था। नानाराव पेश्वा और तात्या टोपे जैसे वीरों की धरती रहे बिठूर में आज भी कई ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं।

 

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रानी लक्ष्मी बाई की टूटी हुई मूर्ति - फोटो : amar ujala
जहां पर पेश्वाई संस्कृति के अंश मिलते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि टोपे परिवार की एक पीढ़ी आज भी बैरकपुर में रहती है। लेकिन कानपुर जिला प्रशासन उसकी इस धरोहर को संजोकर नही रख पा रहा है।

 
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रानी लक्ष्मी बाई की टूटी हुई मूर्ति - फोटो : amar ujala
आज रानी लक्ष्मी बाई की मूर्ति टूटकर बदहाल हो गई है लेकिन उसको सुधारने के लिए ना तो जिला प्रशासन आगे आ रहा है और ना ही उत्तर प्रदेश सरकार कोई ठोस कदम उठा रही है।

 
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रानी लक्ष्मी बाई की टूटी हुई मूर्ति - फोटो : amar ujala
स्थानीय लोगों की मानें तो लगता है नानाराव पेशवा का सारा इतिहास कानपुर की धरती से खत्म हो जाएगा। बिठूर में रानी लक्ष्मी बाई घाट पर वीरांगना श्री रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा क्षतिग्रस्त पड़ी है। वहीं देश वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की जयंती मना रहा है।
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