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सोच-समझकर रखें 'लड़कों के नाम', यहां दूल्हन ने दूल्हे का नाम सुनकर 'खड़ा कर दिया बखेड़ा'  

Tue, 17 Jul 2018 08:19 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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रिश्तेदारों की फब्तियों पर भड़की दुल्हन, कागज देखने के बाद हुई विदाई
'लड़कों का नाम सोच समझकर रखना चाहिए। क्या पता मां-बाप द्वारा रखा गया नाम उस लड़के की होने वाली दुल्हन को बिल्कुल भी न पसंद हो।' ऐसा हम नहीं कह रहे यह कहना है उन बारातियों और जनातियों का जो फर्रुखाबाद में एक शादी समारोह के दौरान वर-वधु को आशीर्वाद देने आए थे। 
दरअसल हुआ यूं कि दूल्हे का नाम 'गुलफान' सुनते ही दुल्हन नाराज हो गई और शादी से इनकार कर दिया। इस पर दूल्हे समेत बारातियों ने कायमगंज कोतवाली में शिकायत की। बाद में पुलिस के समझाने के बाद विदाई हुई। 

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- रिश्तेदार फब्तियां कसने लगे- ये कैसा नाम है 'गुलफान'...
 
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दुल्हन की मांग भरता दूल्हा।
फर्रुखाबाद कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव न्यामतपुर ढिलावली निवासी जयसिंह की बेटी ज्योति की बारात बरेली जनपद के शाहपुर बनियान गांव से आई थी। बारात में घुड़चड़ी द्वारचार व जयमाल की रस्म हो गई थी। देर रात फेरों के समय दूल्हे ने अपना नाम 'गुलफान' बताया। इस पर रिश्तेदार आदि फब्तियां कसने लगे। 'ये कैसा नाम है'। यह दूसरे समुदाय का है। इसी से दुल्हन ज्योति भड़क गई और शादी करने से इनकार कर दिया।
 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- मझिया (संबंध कराने वाला) बताया कि दूल्हे का नाम गुलफान पुत्र रतीराम है...
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दुल्हा जिसका नाम गुलफान है
इसके बाद मझिया (संबंध कराने वाला) को बुला कर नाम की पड़ताल की गई। उसने बताया कि दूल्हे का नाम गुलफान पुत्र रतीराम है। इसके बाद भी वधू पक्ष के लोग नहीं माने। मामला बढ़ता गया। रातभर समझाने बुझाने का सिलसिला चलता रहा। आखिरकार सुबह दूल्हा सहित बाराती कोतवाली जा पहुंचे। 
 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- जब कोतवाल से लगाई शादी कराने का गुहार...
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दुल्हन की मांग भरता दूल्हा।
कोतवाल जसवंत सिंह से शादी करवाने की गुहार लगाई गई। इस पर कस्बा चौकी प्रभारी सुरेश कुमार फोर्स सहित मौके पर पहुंचे। संभ्रांत लोग भी जुटे। वाट्सएप पर खसरा खतौनी मंगाई गई। इस पर नाम व पिता का नाम सही होने पर सहमति बनी। इसके बाद बारातियों व जनातियों ने पुलिस के साथ फोटो भी खिंचवाए। फिर अन्य रस्में पूरी की गईं। 
कोतवाल ने बताया कि नाम को लेकर भ्रम की स्थिति थी। नाम पर जांच की गई जो दूसरे समुदाय का नहीं था। वधू पक्ष को समझाकर दुल्हन को विदा किया गया है।
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