यूपी के कानपुर देहात (घाटमपुर) में जिला निर्वाचन दफ्तर से उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग को जुलाई में भेजी गई रिपोर्ट में जिले में सबसे वयोवृद्ध पच्ची सिंह की उम्र 107 साल बताई है। हकीकत में इतनी उम्र का कोई भी वोटर इस विधानसभा क्षेत्र में नहीं है। पड़ताल में आयोग को भेजी गई इस रिपोर्ट पर कई सवाल उठ रहे हैं। आशंका है कि बीएलओ ने घर बैठे उम्र दराज वोटर की रिपोर्ट बनाकर भेजी है। दावों से उलट जो हकीकत है वो आपको हैरान कर देगी। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...
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सरजू प्रसाद
- फोटो : अमर उजाला
जिला निर्वाचन दफ्तर ने घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र में छह वोटर सौ साल से ऊपर की उम्र के बताए थे। ‘अमर उजाला’ ने इसकी पड़ताल की तो खुलासा हुआ कि हिरनी गांव में 107 वर्ष के किसी भी व्यक्ति का नाम पच्ची नहीं है। गांव में पच्चू सोनकर नाम के वृद्ध जरूर हैं। उनकी उम्र 85 वर्ष है। श्यामबाबू सोनकर, सरवन सिंह, जंग बहादुर सिंह, प्रमोद दीक्षित और पूर्व प्रधान संजय गुप्ता ने बताया कि गांव में अधिकतम 80-85 वर्ष की उम्र तक के ही वोटर हैं। 107 वर्ष की उम्र का पच्ची नाम का कोई वोटर नहीं है।
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पच्चू सोनकर
- फोटो : अमर उजाला
बरीमहतैन गांव में कोई कंचनियां नहीं
जिला निर्वाचन दफ्तर की रिपोर्ट में बरीमहतैन गांव में कंचनियां नाम की वोटर की उम्र 102 वर्ष बताई गई है। इस गांव में कंचनियां नाम की कोई महिला नहीं मिली। यहां पर सबसे उम्र दराज वोटर और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. विश्वनाथ अवस्थी की पत्नी राजेश्वरी हैं। उनकी उम्र करीब 88 वर्ष बताई गई।
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सरजू प्रसाद, डेमो पिक
तो निधन के बाद भी नाम दर्ज
दावा किया गया था कि मदुरी गांव निवासी सुंदरलाल की उम्र 102 वर्ष है। ग्राम प्रधान जनार्दन सिंह भदौरिया ने बताया कि उनके गांव में सुंदरलाल नाम के दो व्यक्ति थे। इनमें एक की मौत करीब 18 वर्ष पहले और दूसरे का निधन सात वर्ष पूर्व हो चुकी है। आशंका जताई गई कि निधन के बाद भी सुंदरलाल का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज तो नहीं है। बम्हौरी गांव में भी गंगा (101 वर्ष) नाम का कोई वोटर नहीं मिला।
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डेमो पिक
102 वर्ष का दावा, हकीकत में 78 के
चतुरीपुरवा गांव के सरजू प्रसाद सचान की उम्र 102 वर्ष होने का दावा किया गया था। गांव में जाने पर सरजू प्रसाद घर पर मिले। उन्होंने अपनी उम्र 78 वर्ष बताई। बताया कि तीन पुत्र राजेश, धर्मेंद्र और बृजेश सचान हैं। सरजू प्रसाद गांव में ही रहकर खेती-किसानी करवाते हैं।
बीएलओ की जांच पर जिले को भेजी रिपोर्ट
तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो (आरके) सूर्य प्रकाश का कहना है कि सौ साल की उम्र पार कर चुके वोटरों की सूची सत्यापन के बाद संबंधित बीएलओ ने नौ जुलाई को तहसील में जमा की थी। इसके आधार पर जिला निर्वाचन दफ्तर को उम्र दराज वोटर की सूची भेजी गई थी। इसमें कोई गड़बड़ी है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित बीएलओ की है। बीएलओ की रिपोर्ट के दस्तावेज उनके कार्यालय में मौजूद हैं। बीएलओ के सत्यापन के दौरान वोटरों ने जो उम्र बताई थी, वही लिखी है। मरने वालों के भी नाम मतदाता सूची में दर्ज होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि कोई ऐसी शिकायत मिलती है तो संबंधित बीएलओ की जिम्मेदारी तय की जाएगी।