कानपुर के बिकरू में दो जुलाई की रात आठ पुलिस वालों की हत्या करने के बाद विकास दुबे ने कानपुर देहात के शिवली में दो दिन तक शरण ली थी। पुलिस ने शरण देने वालों पर कार्रवाई तो दूर पूछताछ तक नहीं की है।
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- फोटो : amar ujala
किसके घर रुका था, यह भी खुलासा नहीं किया। अफसरों का दावा है कि अभी जांच चल रही है। बिकरू कांड के कुछ दिन बाद जब फरीदाबाद से प्रभात मिश्रा की गिरफ्तारी हुई थी, तब उसने बताया था कि वह, विकास और अमर दुबे शिवली में एक अग्निहोत्री परिवार के घर रुके थे। रात में ही पहुंच गए थे। तीन व चार जुलाई को रुकने के बाद अग्निहोत्री परिवार ने ही पांच की सुबह कार से तीनों को औरैया छोड़ा। इसके बाद सभी ट्रक से फरीदाबाद के लिए निकले।
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अमर-प्रभात का परिचित है अग्निहोत्री परिवार
अग्निहोत्री परिवार अमर और प्रभात का परिचित था। विकास उन्हें नहीं जानता था। रिश्तेदार हैं या दोस्त यह अभी स्पष्ट नहीं है। कुछ पुलिसकर्मियों का कहना है कि बदमाश जबरन एक घर में घुस गए थे। तमंचे के बल पर वहां रुके थे। हालांकि ऐसा होता तो इनके जाने के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी।
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कानपुर पुलिस ने बिकरू कांड चार्जशीट में चार महिलाओं को भी आरोपी बनाया है। इन महिलाओं पर पुलिस कर्मियों को मारने के लिए उकसाने और उन्हें गोलियां मुहैया करने का आरोप लगाया है। उन पर मुठभेड़ के दौरान पुलिस के लूटे गए असलहों को रखने में मदद का भी आरोप है।
बिकरू कांड में गुरुवार को पुलिस ने 36 आरोपियों के खिलाफ माती कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पुलिस ने संजू उर्फ संजय दुबे की पत्नी क्षमा, दयाशंकर अग्निहोत्री की पत्नी रेखा, अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे और रमेश की पत्नी शांति को भी आरोपी बनाया है।