यूपी के कानपुर में एक सरकारी विभाग के कंप्यूटर एक्सपर्ट ने बताया कि सरकारी भुगतान के लिए केंद्र सरकार के कई एप हैं, इसकी मदद से संबंधित के फिंगर प्रिंट से खाते से ट्रांजेक्शन होता है। पर सभी सरकारी एप सुरक्षित हैं।
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उन्होने बताया कि अब कई फेक एप भी आ गए हैं, इससे फिंगरप्रिंट का डाटा सेव करने के बाद रकम निकाली गई होगी।
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खास बात है कि इससे रुपये निकले जाने या ऑनलाइन शॉपिंग करने पर खाते से कम हुई रकम भी दिखाई देती है।
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बैंक उसी बात का आधार बनाकर आधारकार्ड से रुपये निकालने का रिकार्ड दिखाते हैं। हैकर्स बैंक का सर्वर हैक कर रुपये पार करते हैं।
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यूनियन बैंक ऑफ इंडिया कृष्णा नगर शाखा के प्रबंधक एमबी गौतम कहते हैं, हमारे रिकार्ड में (आधार कार्ड से डिजिटल बैंकिंग) से रुपये की निकासी ई- कामर्स से दिख रही है।
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उन्होने बताया कि संभव है कि बॉयोमेट्रिक (उंगलियों के निशान) से रुपये की निकासी हो जाए, लेकिन बार-बार रुपये निकलना समझ से परे है। हो सकता है कि शातिरों ने कोई नई तकनीक अपडेट की हो।
अपने मुख्य कार्यालय के अफसर , टेक्निकल टीम से राय ले रहा हूं। इसके लिए मेल कर दी है। शिकार हुए लोगों का खाता बंद कराने के लिए हेल्पलाइन टोलफ्री (1800222244) नंबर दिया था, लेकिन किसी कारणवश उनका बैंक खाता नहीं बंद हो सका।