अंधाधुंध एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से केवल इंसानों को बीमार करने वाले बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता ही नहीं बढ़ी है, पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया भी पहले से ज्यादा ताकतवर हुए हैं। इनमें भी एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई है। भारतीय दलहन अनुसंधान, कानपुर के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।
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संस्थान के फसल सुरक्षा विभाग द्वारा किए गए ताजा शोध में पाया गया है कि बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि पौधों को आसानी से बीमार कर रही है। बीते दिनों संस्था की ओर से अनुसंधान पर आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस में चर्चा के दौरान बताया गया कि बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का असर केवल पौधों की वृद्धि रोकने तक सीमित नहीं है। फसलों को कीटों से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाओं और कीटनाशकों से मिट्टी के सूक्ष्म जीव भी घट रहे हैं।
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इस प्रभाव वाले क्षेत्रों की मिट्टी में केंचुओं की संख्या कम पाई गई है। बता दें कि मिट्टी को उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में केंचुओं की अहम भूमिका होती है। केंचुए पौधों की जड़ों को फैलने में मददगार होते हैं।
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‘बैक्टीरिया की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ने से फसलें खराब हो जाती हैं जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। बैक्टीरिया पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस कारण प्रकाश संश्लेषण (फोटो सिंथेसिस) की प्रक्रिया भी बिगड़ जाती है।’ - डॉ. कृष्ण कुमार
(अध्यक्ष, फसल सुरक्षा विभाग, भारतीय दलहन अनुसंधान)
फसलों को कीटों से बचाने के लिए आमतौर पर एग्रामाइसिन, बैक्टीरिया इरुविनिया जैसी एंटीबायोटिक दवाएं और कीटनाशक इस्तेमाल किए जा रहे हैं। धीरे-धीरे बैक्टीरिया ने इनके प्रति प्रतिरोधी क्षमता बढ़ा ली है। मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.75 होनी चाहिए, लेकिन यह 0.2 से 0.5 प्रतिशत तक ही पाई गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि फसल उत्पादन के लिहाज से यह काफी खतरनाक संकेत है।