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जू के बेजुबानों को पागल बना रहा सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट

Sat, 11 Feb 2017 04:59 PM IST
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर प्राणि उद्यान
‘विकास’ चिड़ियाघर के बेजुबानों को पागल बनाता जा रहा है। केडीए की आवासीय योजना सिग्नेचर सिटी कानपुर चिड़ियाघर के जानवरों के लिए जानलेवा बन गई है।  यहां चल रहे निर्माण कार्यों ने टाइगर, लैपर्ड कैट, बंदरों में बेचैनी बढ़ा दी है तो किसी भी पक्षी ने तीन महीने से ब्रीडिंग नहीं की है। दिन रात काम की तेज आवाजें जानवरों को पागल बनाने के मुहाने पर पहुंचा चुकी हैं।
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जानवरों ने खाना छोड़ा 

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कानपुर प्राणि उद्यान
कानपुर जू के कई जानवरों ने तो खाना छोड़ दिया है।  डस्ट पार्टिकल (धूल) पक्षियों का श्वसन तंत्र ध्वस्त कर रहा है। खट-पट की आवाज से परेशान बाघ ने अपने कान जख्मी कर लिए हैं। रात में तेज उजाला होने से जानवर सो नहीं पा रहे हैं। जू की दीवार से सटे इस प्रोजेक्ट की वजह से जानवरों को हो रही परेशानियों को रोकने के लिए जू निदेशक ने कमिश्नर और केडीए उपाध्यक्ष से शिकायत की है।
 
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दीवार से सटा है बाघ का बाड़ा

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कानपुर प्राणि उद्यान
जू निदेशक दीपक कुमार के अनुसार निर्माणाधीन फ्लैटों में हो रहे शोरगुल, तेज आवाज से बाघ बेचान हैं। सिग्नेचर सिटी की दीवार से सटे बाड़े में बाघ अभय दिन भर घूमता रहता है। आवाज से परेशान होकर वह जालियों में अपना कान और सिर रगड़ता रहता है। इस कारण उसके कान में घाव हो गया है। 

लेपर्ड कैट, लंगूर और बंदर भी परेशान

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कानपुर प्राणि उद्यान
दूसरे बाड़ों के लेपर्ड कैट, लंगूर और बंदर भी परेशान हैं। रात में यहां लगी हैवी लाइटों से बाड़ों में रोशनी आती है, जिससे जानवर सो नहीं पा रहे हैं। जो इनके बायोलॉजिकल सिस्टम बिगाड़ रही है। जू में इन्हीं वजहों से रोड लाइट नहीं लगाई गई हैं।
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इन पक्षियों की ब्रीडिंग रुकी

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कानपुर प्राणि उद्यान
निर्माण सामग्री के कारण उड़ रही धूल (डस्ट पार्टिकल) पक्षियों का श्वसन तंत्र बिगाड़ रही है। जू में रेड जंगल फाउल, जंगल कैट, गोल्डन फ्रीजेंट, चील की ब्रीडिंग रुक गई है। तीन महीने से कोई चूजा नहीं पैदा हुआ है। कई पक्षियों की मौत भी हो चुकी है। इस कारण जू प्रशासन भी परेशान है।
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ध्वनि प्रदूषण से मौत हो जाती है 

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कानपुर प्राणि उद्यान
वाइल्ड लाइफ स्पेशलिस्ट और पशु चिकित्सक  डॉ. संदीप कुमार पॉल ने बताया कि तेज आवाज जानवरों और पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक है। तेज आवाज से जानवरों का बायोलॉजिकल सिस्टम बदलता है। शरीर के सेंसर डिस्टर्ब होने से हार्मोन्स नहीं बनते हैं। प्रजनन तंत्र रुकता है। 90 डेसीबल से अधिक आवाज से पशु पक्षियों का श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। यहां तक पक्षियों की मौत हो जाती है।
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अंधेरा पसंद करते हैं जंगली जानवर

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कानपुर प्राणि उद्यान
जंगल के जानवरों को रात में अंधेरा ही पसंद है। रात में रोशनी आने से वह सो नहीं पाते हैं और उनके दिमाग पर असर पड़ता है। बेचैनी बढ़ने के साथ पागलपन का खतरा बढ़ जाता है।
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जानवरों का इलाज नहीं हो पा रहा

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कानपुर प्राणि उद्यान
कानपुर प्राणि उद्यान निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि केडीए के सिग्नेचर सिटी बनने से जानवरों में बेचैनी बढ़ गई है। पक्षियों की ब्रीडिंग पर असर पड़ा है। जू के अस्पताल की दीवार से पास हो रहे निर्माण की वजह से जानवरों का इलाज नहीं हो पा रहा है। रात भर इतनी तेज रोशनी से यहां दिन जैसा माहौल होता है। 
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