कानपुर महानगर कांग्रेस पार्टी का शनिवार को हुआ कार्यकर्ता सम्मेलन ‘भड़ास निकालो सम्मेलन’ बनकर रह गया। नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण में मनमानी और चुनाव में असहयोग का आरोप लगाकर कांग्रेसियों ने शहर के बड़े नेताओं पर जमकर आग उगली।
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सम्मेलन में साेते हुए
कार्यकर्ताओं ने मंच पर बैठे स्थानीय नेताओं की तरफ उंगली दिखाकर, नाम लेकर चिल्लाते हुए कहा कि इनकी वजह से कांग्रेस के प्रत्याशी नगर निगम चुनाव में हारे हैं। प्रदेश प्रभारी गुलाब नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर अवाक होकर यह सब देखते-सुनते रहे। कांग्रेस ने अपने बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं का दिल जीतने के लिए नई रणनीति के तहत काम करना शुरू किया है।
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माेबाइल पर गेम खेलता कांग्रेसी
इस बार का कार्यकर्ता सम्मेलन इसी रणनीति का एक हिस्सा था। इसके तहत सम्मेलन में एक भी बड़े नेता को बोलने का मौका नहीं दिया गया। सिर्फ कार्यकर्ताओं को अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए कहा गया। सिविल लाइंस स्थिति रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में सबसे पहले उन लोगों को बोलने का मौका दिया गया, जो पार्टी के टिकट पर पार्षद पद का चुनाव लड़े थे। इसके बाद मंडल अध्यक्षों की बात सुनी गई।
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सम्मेलन में लिया फिल्म देखने का मजा
इससे पहले जीते हुए पार्षद और मेयर की प्रत्याशी रहीं बंदना मिश्रा को भी बोलने का मौका दिया गया। नगर निगम चुनाव में हारे हुए पार्षद प्रत्याशियों ने बड़े नेताओं का नाम लेकर यह कहना शुरू कर दिया कि चुनाव में इन लोगों के असहयोग की वजह से शिकस्त मिली। पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, पूर्व सांसद राजाराम पाल, पूर्व विधायक अजय कपूर, भूधर नारायण, संजीव दरियाबादी, पवन गुप्ता, आलोक मिश्रा सभी का नाम लेकर कार्यकर्ताओं ने अपनी भड़ास निकाली।
पार्षद का चुनाव हारे एक कार्यकर्ता कौशिक रजत वाजपेयी तो अपनी बात कहते-कहते रोने लगे। उन्होंने एक-एक करके सबका नाम ले लिया। आखिर में गुलाब नबी आजाद ने उन्हें अपने पास बुलाकर आश्वासन दिया कि अगली बार उनके चुनाव में वह खुद प्रचार करने आएंगे।