कानपुर में मातृ शक्ति का सम्मान हुआ तो हर मां खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही थी। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में ‘अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ के अंतर्गत आयोजित ‘मातृशक्ति सम्मान-2019’ जवाहर नगर स्थित ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन में हुए समारोह में सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बार्ड के मेधावी छात्रों की मां को प्रतीक चिह्न, शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। सभी माताओं का सम्मान मुख्य अतिथि अखिल भारतीय माथुर वैश्य की राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने किया।
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मेधावियों का हुआ सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
सभी माताओं को शुभकामनाएं देते हुए अर्चना ने कहा कि मां हर कोशिश करती है कि उनके बच्चे का भविष्य अच्छा बने और जब बच्चे उनका नाम रोशन करते हैं तो उनको असीम खुशी मिलती है। वहीं, माताओं से कहा कि वो अपने बच्चों को मोम की तरह नहीं पालें, उनसे सबकुछ करवाएं फिर चाहे वह घर का काम हो या फिर बाहर का। इससे उनमें आत्मविश्वास आएगा और स्वावलंबी होकर वे हर परिस्थिति का डटकर सामना कर पाएंगे।
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मेधावियों का हुआ सम्मान
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सभागार में मौजूद बच्चों से कहा कि नंबर उतने अहमियत नहीं रखते, जितनी काबिलीयत रखती है। इसलिए काबिल बनो और कभी डरो मत। उन्होंने मां-बाप की सेवा करने का भी संदेश दिया। इस मौके पर प्रधानाचार्य राम मिलन सिंह, उपप्रधानाचार्य उमा सक्सेना, प्रवक्ता राजेंद्र बाजपेई, प्रतिभा श्रीवास्तव, अर्पणा त्रिवेदी, प्रतिभा चौहान मौजूद रहे।
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मेधावियों का हुआ सम्मान
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मेरा बच्चा स्पेशल है लेकिन बेस्ट है। ऑटिज्म जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद गौतमवीर में सीखने की क्षमता इतनी ज्यादा है कि उसने आराम से सब चीजों को याद किया और परीक्षाओं में सफल रहा। आज उसकी वजह से यह सम्मान मिला है, जिसकी उम्मीद नहीं थी। बस यहीं कह सकती हूं कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती है। आज उसने मेरे अंदर भी धैर्य और संवेदनशीलता जैसे गुणों को विकसित किया है। - किरनजीत
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मातृशक्ति सम्मान-2019
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1998 में मैंने आईएससी बोर्ड में ऑल इंडिया तीसरी रैंक हासिल की थी। उस वक्त जो खुशी हुई थी, उससे ज्यादा खुशी आज बेटी प्रियल की उपलब्धि पर हो रही है। इससे मैं इस बात का अंदाजा भी लगा पा रही हूं कि मेरे माता-पिता को कितनी खुशी मिली होगी, जब मैंने टॉप किया था। यह अनूभूति अद्भुत है। - अर्चना आडवाणी
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मातृशक्ति सम्मान-2019
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बेटा अंश अवि खन्ना पढ़ाई तो करता था, लेकिन इसके साथ ही वो गेम्स, घूमना आदि गतिविधियों में भी सक्रिय रहता था। उम्मीद थी कि 90 प्रतिशत से ऊपर ला सकता है, लेकिन इतने अच्छे नंबर लाएगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। इससे यह पता चला कि पढ़ाई जितनी भी देर करो, मन लगाकर करो। बच्चे की उपलब्धि पर बेहद खुश हूं। - सोनिया खन्ना
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मातृशक्ति सम्मान-2019
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हमारे जमाने में बस किताबों से ही पढ़ाई होती थी, लेकिन जब बेटी को अपने दोस्त के साथ मोबाइल पर वीडियो कॉल करके पढ़ाई करते देखा तो हैरानी हुई। बेटी हमेशा से मेहनती थी, लेकिन 12वीं में उसका बोर्ड बदलवाया तो इस बात से वह थोड़ी नाराज थी। स्कूल से आकर गुस्सा भी करती थी, लेकिन पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज उसके परिश्रम ने ही मुझको सम्मान दिलवाया। - विनीता रूंगटा