श्री सिद्ध महाकाली मंदिर में चल रहे श्रीशतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन आचार्यों ने देवताओं का आहवाहन कर यज्ञ किया साथ ही भक्तों के हित व मनोकामना पूर्ण करने के लिए आहूतियां डालीं।
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हरदोईः मां की महिमा का बखान करते हुए आचार्य अभिषेक शास्त्री ने कहा कि मां महाकाली आदि शक्ति हैं।
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मां भक्तों के सिर्फ कष्ट ही नहीं हरतीं बल्कि निष्ठावानों पर मां विशेष कृपा करती हैं।
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शास्त्री ने कहा कि निष्छल भाव और निष्ठा से किया गया मां महाकाली का पूजन सबसे अधिक फलदायी होता है।
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उन्होने बताया कि मां पर आस्था रखने वाले भक्त हमेशा निरोगी रहते हैं और उनके अंदर की बुराइयां खत्म होती हैं।
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महाकाली के रूप को देवी के सभी रूपों में से सबसे अधिक प्रभावशाली और शक्तिशाली माना जाता है। काली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के ‘काल’ शब्द से हुई है। हिन्दू शास्त्रों में मां काली को राक्षसों के संहार के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि मां काली काल का संहार कर मोक्ष प्रदान करती हैं।
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काली शब्द काले रंग का प्रतीक है। मां काली की उपासना से तुरंत परिणाम मिलता है। इनकी पूजा अर्चना से बहुत से लाभ होते हैं।
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यदि मां काली भक्त की उपासना से प्रसन्न हो जाएं तो उसका जीवन शुख समृद्धि से भर जाता है। मां काली की पूजा विभिन्न मंत्रों से की जाती है।
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ममतामयी मां काली का एकाक्षरी मंत्र ‘क्रीं है। इस मंत्र के जप से मां के सभी रूपों की आराधना, उपासना और साधना में किया जा सकता है।
मां काली की पूजा उपासना करने के लिए मां की प्रतिमा को स्वच्छ आसान पर स्थापित करें। तिलक लगाएं और पुष्प आदि अर्पित करें। प्रतिदिन मंत्र का 108 बार जप करें। जप करने के बाद मां काली को भोग अर्पण करें। मनोकामना पूर्ण होने तक इस जप को जारी रखें।