कश्मीर के पुलवामा में आत्मघाती हमले में शहीद हुए यूपी के कन्नौज जिले के लाल प्रदीप सिंह यादव के घर परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया। बोले, पुलवामा की घटना बड़ी चूक का नतीजा है। सवाल दागा कि सर्जिकल स्ट्राइक पर जश्न मनाने वाले बताएं, इतने सैनिकों की जान कैसे चली गई।
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पुलवामा आतंकी हमले में कन्नौज का लाल शहीद
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर करीब एक बजकर 10 मिनट पर अजान गांव पहुंचे अखिलेश यादव लगभग एक घंटे रुके। पिता अमर सिंह और छोटे भाई कुलदीप से बातचीत की। शहीद की पत्नी नीरज और मां सरोजनी देवी के साथ ही 10 साल की बेटी सुप्रिया और ढाई साल की सोना के भी हालचाल पूछे।
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पुलवामा आतंकी हमले में कन्नौज का लाल शहीद
सीओ सदर श्रीकांत प्रजापति से पार्थिव शरीर आने के बारे में जानकारी ली। पुलवामा में हुई घटना पर दुख जताया। बोले, जिन पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, दुर्भाग्य से उनकी ही जान इस घटना में चली गई। कहीं न कहीं यह बड़ी चूक है। जहां सड़क पर इतना बड़ा मूवमेंट चल रहा हो, वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम तक नहीं थे। अभी तक इतनी बड़ी घटना नहीं हुई। हमने धरती मां के सच्चे सपूतों को खोया है।
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देश के मामले में राजनीति के सवाल पर बोले, मंत्री और मुख्यमंत्री उरी फिल्म देखकर यदि सर्जिकल स्ट्राइक का जश्न मनाते हैं तो यह भी बताना होगा कि जवानों की जान कैसे चली गई। इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई। आपको बताना होगा कि आखिर चूक कहां से और कैसे हुई। सवाल किया, क्या जवान की ऐसे ही जान जाएगी।
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किसान खेत पर मेहनत कर रहा है और उसका बेटा सीमा पर सुरक्षा कर रहा है। अगर किसान दुखी हो जाए और जवान को सुरक्षा का भरोसा न हो, तो हम कैसा भारत बनाना चाहते हैं। हमारा भारत ताकतवर बने, मजबूत बने। शहीद के परिवार को मदद के सवाल पर बोले कि सरकार को और मदद करनी चाहिए। एक नौकरी पर्याप्त नहीं है।
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बोले, मुझे याद है कि यह निर्णय रक्षा मंत्री रहते हुए नेताजी (मुलायम सिंह यादव) का ही था कि यदि कोई सैनिक शहीद होता है तो पूरे सम्मान के साथ उसके पार्थिव शरीर को गांव लाया जाएगा। मदद का भी फैसला उसी समय लागू हुआ था। 10 लाख पत्नी को देने का फैसला लिया था। पांच लाख रुपये मां-बाप को दिए गए थे। सरकार ने नौकरी देने की बात कही है, यदि सरकार और मदद करे तो अच्छी बात होगी। चुनाव करीब हैं लेकिन यह समय राजनीति का नहीं है। जो घटना हुई है, दुर्भाग्यपूर्ण है। इसका जिम्मेदार कौन है, सरकार को बताना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि आखिर कौन सा फैसला था कि सड़क पर चलने वाले वाहनों की जांच को रोक दिया गया। यदि जांच होती तो ऐसे विस्फोटक लेकर चलने वाले वाहन पकड़ में आ जाते और घटना न होती। यह गलती किसकी है, क्या इंटेलीजेंस की गलती है। इंटेलीजेंस ने जानकारी दी थी लेकिन अधिकारियों ने कह दिया था कि ऐसी सूचना आती रहती हैं। अगर सूचना आती थीं तो कार्रवाई क्या होती थी, यह सवाल सरकार से है।
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अखिलेश ने कहा कि 56 इंच के सीने की बात है तो इनका कोई मतलब नहीं। अब शहीद के परिवार के सामने कई सवाल खड़े हैं। परिवार में जिम्मेदारी कौन निभाएगा, बेटी अच्छे स्कूल में पढ़ रही है, उसका खर्च कौन उठाएगा। पूरा परिवार दुखी है, हम सभी दुखी हैं। ऐसी घटनाएं न हों, वीर जवानों की जान न जाए, सरकार को कुछ ऐसे ठोस कदम उठाने चाहिए। भरोसा दिलाते हैं जो मदद हो सकेगी वह करेंगे।