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खौफनाक मंजर : इलाज के इंतजार में खामोश हो गईं 35 जिंदगियां, हैलट बना हताशा का ठिकाना

Fri, 23 Apr 2021 12:56 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर हैलट की एक तस्वीर ये भी - फोटो : amar ujala
कानपुर हैलट के वार्डों में ही नहीं इमरजेंसी में भी मरीजों का तांता लगा है। सीनियर डॉक्टर नदारद रहते हैं। जूनियर डॉक्टर मरीजों की भीड़ में ठीक से इलाज नहीं कर पा रहे हैं। समय पर इलाज न मिलने से 35 से ज्यादा मरीजों की गुरुवार को हैलट इमरजेंसी में मौत हो गई।
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एंबुलेस से नहीं उतर रहे मरीज - फोटो : amar ujala
डॉक्टर साहब मेरे पापा को बचा लीजिए
डॉक्टर साहब मेरे पापा दो घंटे से स्ट्रेचर पर पड़े हैं, उनका इलाज शुरू नहीं हुआ। जल्दी से देख लीजिए। कुछ करिए, उन्हें बचा लीजिए...। ओम चौराहा, काकादेव निवासी सुनील डेढ़ घंटे तक हैलट इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टरों से गुहार लगाता रहा, पर उसके होमगार्ड पिता नरेंद्र कुमार (54) का इलाज शुरू नहीं हुआ। इसी बीच उनकी सांसें रुक गईं। बाद में आए डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 
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कोरोना से मचा कोहराम - फोटो : amar ujala
भतीजे रवींद्र कुमार ने बताया कि चाचा की पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी थी। लौटने के बाद बुखार के बाद सांस लेने में तकलीफ हुई, तब से ऑक्सीजन सिलिंडर लगाए ई-रिक्शा से अस्पताल - अस्पताल भटक रहे थे, पर कोई भर्ती नहीं कर रहा था। हालत बिगड़ते देख हैलट इमरजेंसी लाए, यहां भी इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई। उनका शव घर तक ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस भी नहीं मिली।

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कोरोना से मचा कोहराम - फोटो : amar ujala
बेटी बोली, डॉक्टरों ने मां को मार डाला
डॉक्टरों ने मां को मार डाला। इलाज करते तो वो बच जातीं। इमरजेंसी में आते समय मां बोल रही थीं, स्ट्रेचर पर पड़े - पड़े मर गईं, पर इलाज नहीं हुआ, यह कहते - कहते गोविंदपुरी निवासी रचना हैलट इमरजेंसी के बाहर बेहोश हो गईं। परिजनों ने बताया कि रचना की मां रानी का बुखार नहीं उतर रहा था। सांस लेने में भी तकलीफ थी। हालत बिगड़ती देख उन्हें हैलट इमरजेंसी लाया गया था। परिजनों ने भी डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।

 
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कोरोना से मचा कोहराम - फोटो : amar ujala
कहां है ऑक्सीजन, मिले तो लाकर लगा लो
चकेरी निवासी पोस्टमास्टर अनिल पासवान को बेटी रुची करीब 11 बजे हैलट इमरजेंसी लेकर पहुंची। डॉक्टरों ने नब्ज देखी, ऑक्सीजन नापा, पर्चा बनवाने के लिए कहा। पर्चा बनता उससे पूर्व पिता की सांसे साथ छोड़ने लगीं तो बेटी ने हाथ जोड़ लिए, सर ऑक्सीजन पहले लगा दीजिए, डॉक्टरों ने सिर्फ एक जवाब दिया कहां ऑक्सीजन है। मिले तो लाकर लगा लो, कुछ ही देर में एक बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया।

 
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कोरोना से मचा कोहराम - फोटो : amar ujala
इन्हें भी नहीं मिला इलाज
फर्रुखाबाद निवासी विद्यावती (58) को सांस लेने में तकलीफ थी। दोपहर ढाई बजे परिजन उन्हें हैलट इमरजेंसी लेकर पहुंचे। एंबुलेंस का सिलिंडर खत्म होने वाला था। बेटी ने गुहार लगाई कि मां को जल्दी भर्ती करो, सिलिंडर खत्म हो रहा है। वार्ड ब्वाय ने इसे अनसुना कर दिया। स्ट्रेचर तलाश कर वे मां को इमरजेंसी के अंदर ले गए लेकिन इलाज नहीं शुरू हो सका।

 
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कोरोना से मचा कोहराम - फोटो : amar ujala
वहीं, सत्यम विहार, आवास विकास-1 निवासी रजनी की कोरोना एंटीजन जांच रिपोर्ट निगेटिव थी, पर सांस लेने में तकलीफ थी। बेटा अनिल दोपहर 1:30 बजे उन्हें हैलट इमरजेंसी ले आया। गुहार लगाने पर भी डॉक्टर रजनी का इलाज नहीं कर रहे थे। हालत बिगड़ते देख परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए। वहीं, फतेहपुर से इलाज के लिए अपने मां कमला रानी 60 को लेकर हैलट आए थे। मेडिसिन वार्ड में मरीजों से भरा देख वह वापस लौट गए। 
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