अयोध्या के सरयू में खंडित मूर्तियों को विसर्जित कर लौट रहे ललितपुर के महरौनी के 10 श्रद्धालु हादसे का शिकार हो गए। श्रद्धालुओं की कार डंपर से टकरा गई। हादसे में आठ की मौत हो गई। वहीं, श्रद्धालुओं ने लौटने से पहले अयोध्या में सरयू नदी के घाट पर सेल्फी ली थी।
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सरयू नदी में स्नान के बाद सेल्फी लेते कार सवार लोग
- फोटो : परिजन
अयोध्या की धार्मिक यात्रा से लौट रहे महरौनी के आठ श्रद्धालुओं की सोमवार सुबह जालौन जिले के कालपी इलाके में जोल्हूपुर मोड़ पर सड़क हादसे में मौत हो गई। सरयू नदी के घाट पर ली गई उनकी मुस्कुराती तस्वीर अब परिजनों के लिए आखिरी याद बन गई है, जिसने पूरे कस्बे को गहरे शोक में डुबो दिया।
महरौनी के टीकमगढ़ रोड स्थित खचवाचपुरा मोहल्ले के रहने वाले सभी लोग 30 अप्रैल को अयोध्या गए थे। वहां उन्होंने सरयू नदी में खंडित मूर्तियों का विसर्जन किया और हनुमानगढ़ी व रामलला के दर्शन किए। इसी दौरान उन्होंने सरयू घाट पर मुस्कुराते हुए सेल्फी ली। शायद इस उम्मीद में कि यह पल जीवनभर की याद बनेगा, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी तस्वीर बन जाएगी।
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Orai Road Accident
- फोटो : amar ujala
रविवार रात करीब आठ बजे सभी लोग टवेरा कार से महरौनी के लिए चले। सोमवार सुबह करीब छह बजे कालपी क्षेत्र के जोल्हूपुर मोड़ के पास उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। इस दर्दनाक हादसे में शशिकांत तिवारी (30), कृष्णकांत नायक (38), स्वामी प्रसाद तिवारी (58), मनोज भोड़ेले (36), देशराज नामदेव (36), उमेश तिवारी (25), दीपक तिवारी (30) और बृजभूषण तिवारी (45) की मौत हो गई।
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- फोटो : amar ujala
मोहल्ले में पसरा सन्नाटा, हर घर में मातम
एक ही मोहल्ले के आठ लोगों की मौत की खबर ने पूरे महरौनी को झकझोर दिया। सोमवार सुबह जैसे ही सूचना पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया। कई परिवारों के चिराग एक साथ बुझ गए। मोहल्ले की गलियों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और घरों से सिर्फ चीख-पुकार और रोने की आवाजें सुनाई देती रहीं। परिजन बदहवास हालत में मौके की ओर रवाना हो गए। पूरे कस्बे में यह घटना चर्चा का विषय बनी रही और हर आंख नम नजर आई।
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Orai Road Accident
- फोटो : amar ujala
इनके परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
- शशिकांत तिवारी : बेकरी का संचालन करते थे, एक पुत्र है।
- कृष्णकांत नायक : शिक्षा विभाग में शिक्षक थे और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। परिवार सहित ससुराल पक्ष की जिम्मेदारी भी उन पर थी और उसकी दो पुत्रियां हैं।
- स्वामी प्रसाद तिवारी : निजी विद्यालय में शिक्षक थे और उनके दो पुत्र हैं।
- मनोज भोड़ेले : माता-पिता की इकलौती संतान और भागवत आचार्य के साथ शास्त्री थे। उनकी दो पुत्री व एक पुत्र है।
- देशराज नामदेव : इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और इलेक्ट्रिकल्स की दुकान का संचालित करते थे। उनकी दो पुत्रियां हैं।
- उमेश तिवारी : परिवार में सबसे छोटा था और अविवाहित था।
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- फोटो : amar ujala
धार्मिक यात्रा बनी अंतिम सफर
महरौनी के राम जानकी मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पुरानी खंडित मूर्तियों को सरयू नदी में विसर्जित करने के लिए सभी श्रद्धालु अयोध्या गए थे। पूजा-अर्चना और दर्शन के बाद लौटते समय यह यात्रा उनके जीवन का अंतिम सफर बन गई।
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- फोटो : amar ujala
साढ़े 14 फीट की टवेरा कार 10 फीट में सिमटी
हादसे की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। करीब साढ़े 14 फीट लंबी टवेरा कार सिमटकर महज 10 फीट रह गई। टक्कर के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कई लोग कार के अंदर ही बुरी तरह फंस गए। घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर क्रेन और गैस कटर से रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया।
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- फोटो : amar ujala
310 किमी सफर के बाद बुंदेलखंड में हादसा
कार सवार अयोध्या से लगभग 310 किलोमीटर की दूरी तय कर बुंदेलखंड क्षेत्र में पहुंचे थे और लगातार अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन जैसे ही कार ने बुंदेलखंड की सीमा में प्रवेश किया, कालपी क्षेत्र के चौरासी गुंबद के पास कार हादसे का शिकार हो गई। बताया जा रहा है कि उन्हें आगे ललितपुर जिले के महरौनी तक लगभग 225 किलोमीटर का सफर और तय करना था, लेकिन मंजिल से पहले ही यह दर्दनाक हादसा हो गया।
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जालौन में भीषण सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
सफेद कार हो गई थी खून से लाल
सोमवार की सुबह 5:45 मिनट पर कालपी के चौरासी गुंबद के पास टवेरा कार का हादसा हुआ। तो जहां एक ओर नींद से जाग रहे थे। वहीं हाईवे पर कार कार सवार घायलों की चीखने की आवाजें आ रही थी। आंखें मलते हुए लोग जब कार के पास पहुंचे तो, कार में लहूलुहान लोग अपनी जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे थे। क्षतिग्रस्त कार की हालत देख लोग मदद भी नहीं कर पा रहे थे। सफेद रंग की कार खून से लाल हो गई थी।
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घायलों को मेडिकल कॉलेज लाया गया
- फोटो : अमर उजाला
उरई में श्रद्धालुओं की कार डंपर में घुसी, आठ की मौत... दो गंभीर
अयोध्या से प्रतिमा विसर्जित कर ललितपुर जा रहे श्रद्धालुओं की तेज रफ्तार कार सोमवार सुबह कालपी में आगे जा रहे डंपर में जा घुसी। हादसे में कार सवार आठ लोगों की मौत हो गई। दो गंभीर घायलों को कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया है। हादसे की वजह 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार और कार चालक को झपकी आना बताया जा रहा है।
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कथा वाचक की गुहार भाई साहब बचा लो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर के महरौनी थाने के खरवाचो का पुरा टीकमगढ़ रोड निवासी दस श्रद्धालु टवेरा कार से शनिवार की रात खंडित रामजानकी की प्रतिमा विसर्जित करने अयोध्या गए थे। प्रतिमा विसर्जित करने के बाद सोमवार की भोर सभी लोग कार से लौट रहे थे।
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मौके पर जमा लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुबह करीब 5:45 बजे उनकी कार कालपी कोतवाली क्षेत्र के चौरासी गुंबद के पास पहुंची थी तभी चालक शशिकांत तिवारी को झपकी आ गई। तेज रफ्तार कार असंतुलित होकर आगे जा रहे डंपर में जा घुसी।
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मौके पर टूटा पड़ा डंपर का टूटा बंपर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने क्रेन से कार को सीधी करवाया और कटर से कार को काटकर हताहत लोगों को बाहर निकाला। हादसे में स्वामी प्रसाद तिवारी (68), शशिकांत तिवारी (49), कृष्णकांत नायक (40), कथा वाचक मनोज भोडले (39), देशराज नामदेव (38), उमेश तिवारी (24) की मौत हो गई। डीएम राजेश कुमार पांडेय व एसपी विनय कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे।
मृतक कथा वाचक मनोज भोडले की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्राथमिक उपचार के बाद चार घायलों को कानपुर रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान दीपक तिवारी (26) व बृजभूषण तिवारी (47) की भी मौत हो गई। हरिहर मोहन तिवारी (53) व अंशुल तिवारी (22) का इलाज चल रहा है। डंपर चालक को पुलिस हिरासत में है।