एटा रोड स्थित गांव फुलरई मुगलगढ़ी में मंगलवार की दोपहर को नारायण साकार हरि के सत्संग के बाद हुए मौत का मंजर देखकर हर किसी का दिल दहल गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में दोपहर ढाई बजे से शुरू हुआ शवों के आने का सिलसिला शाम साढ़े चार बजे थमा। पहली बार इतनी संख्या में लाशें देखकर सीएचसी के कर्मचारी भी बदहवास हो गए। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि कौन मृतक है और कौन घायल।
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- फोटो : अमर उजाला
देर शाम तक सीएचसी पर कुल 97 शव पहुंचे। इनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे। कई दिन पूर्व से सत्संग के लिए बाबा के सैकड़ों सेवादार व्यवस्था में जुटे थे। सत्संग में एक लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान था।
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- फोटो : पीटीआई
दोपहर दो बजे के बाद जैसे ही सत्संग समाप्त हुआ और आरती हुई, वैसे ही भीड़ गर्मी और उमस से बचने के लिए तेजी से जीटी रोड की तरफ दौड़ी। भीड़ को जीटी रोड पर बाबा के सेवादारों ने रोक दिया।
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- फोटो : पीटीआई
उनका कहना था कि बाबा की कारों का काफिला निकलने के बाद भीड़ को आगे बढ़ने दिया जाएगा। लगभग 30 मिनट में बाबा का काफिला निकला। तब जाकर भीड़ को आगे बढ़ने का मौका मिला।
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इस 30 मिनट के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं गर्मी के चलते बेहोश होकर गिरने लगीं। काफी भीड़ जीटी रोड पर आ गई, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पैदल चलना तक दूभर हो गया।
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- फोटो : पीटीआई
बाबा के सेवादार निरंतर बेहोश हुई महिलाओं के मुंह पर पानी के छींटे मारकर उन्हें होश में लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के बेहोश होने से सेवादारों के हाथ-पांव फूल गए।
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- फोटो : पीटीआई
मौके पर तैनात दो एंबुलेंस तेजी के साथ घायलों को लेकर सीएचसी सिकंदराराऊ पहुंचीं। वहां मौजूद चिकित्सक जिसकी जांच कर रहे थे, वह मृत ही निकल रहा था।
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अपनों को सुरक्षित किया, फिर साथियों को तलाशते रहे
हादसे के बाद अधिकतर लोग सबसे पहले अपनों को सुरक्षित करते रहे। कोई अपने वाहन में बिठाता रहा तो कोई सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर एक-दूसरे को रोकता रहा। इसके बाद वह अपने जिले-गांव से आए लोगों की तलाश में घटनास्थल से लेकर मौके पर चारों ओर भटकते रहे।
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लखीमपुर खीरी जनपद के प्रतापपुर से तीन बसों में नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के अनुयायी पहुंचे थे। रामकिशोर भी इन्हीं में शामिल थे। उन्होंने बताया कि उनके साथ के लोग दो बसों में आए थे। दोनों बसों के सभी लोग सुरक्षित थे।
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- फोटो : अमर उजाला
हादसे के बाद सबसे पहले उनके यहां के लोग सत्संग स्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर सड़क किनारे खड़ी अपनी-अपनी बसों में जाकर बैठ गए। इसके बाद वह अपने जनपद से आई तीसरी बस में शामिल लोगों की जानकारी करते इधर-उधर घूम रहे थे।
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कानपुर देहात के पतारा से एक वैन में नौ लोग भोले बाबा के सत्संग में पहुंचे थे। इनमें से एक बुजुर्ग हादसे के बाद वह सत्संग स्थल के मुख्य गेट के सामने सड़क किनारे बैठे थे। बताया कि काफी देर से वह अपने साथ आए लोगों को तलाश कर रहे हैं।
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मोबाइल भी नहीं मिल रहा था। काफी देर बाद मोबाइल पर साथियों से बात हुई तो पता चला कि हड़बड़ी में वह वैन में बैठकर काफी दूर जा चुके हैं। बताया कि जा चुके साथी लौटकर नहीं आते तो वह सिकंदराराऊ रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़कर कानपुर चले जाएंगे।
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दिल्ली से आईं करीब 55 वर्षीय मीरा का झोला भगदड़ के दौरान पंडाल में ही छूट गया था। वह साथ की महिलाओं के साथ बचते हुए सत्संग स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर चली गई थीं।
जब सभी घायल और मृतक वहां से चले गए उसके बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे वह अपना झोला खोजते हुए वहां पहुंचीं। वह सेवादारों से अपना झोला दिलवाने की बात कहती रहीं, लेकिन सेवादार पंडाल में जाकर तलाशने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ते रहे।