भइया जी का दाल भात परिवार की ओर से बैंक रोड स्थित परिणय स्थली में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को कथा व्यास स्वामी अखंडानंद ने कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत सुनकर ही होता है। विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं।
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परिणय स्थली में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा
- फोटो : अमर उजाला
कथा व्यास ने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत बताता है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो वहीं सच्ची भक्ति है। इस अवसर पर शंकर गिरि, संत राजा भइया, संकठा प्रसाद, जीपी तिवारी, राजन तिवारी, सुरेश चंद्र, अमरेंद्र मिश्र, रवि मौर्य, दीपक शर्मा, एमपी सिंह, धर्मवीर सिंह, यशवंत सिंह, संजय श्रीवास्तव, सोनू निगम, अनुज सोनकर, विशाल गुप्ता, गुड्डू मिश्र, दुर्गा प्रसाद, आशीष रुंगटा दीनबंधु प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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कथा व्यास स्वामी अखंडानंद
- फोटो : अमर उजाला
इन्होंने किया सम्मान
कथा व्यास स्वामी अखंडानंद का बुधवार को भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र सिन्हा, हरे कृष्ण सिंह, ऋषि तिवारी, राजेश गुप्ता, अमित तुलस्यान, विजय खेमका, अभिषेक अग्रवाल एवं शशिकांत सिंह ने माल्यार्पण किया।
बातचीत
श्रीमद्भागवत कथा जीवन के सत्य का ज्ञान कराने के साथ ही धर्म और अधर्म के बीच के फर्क को बताती है। स्वामी जी के श्रीमुख से कथा सुन जीवन का अर्थ समझ में आया।
कांता देवी
श्रीमद्भागवत कथा सुनना मेरे लिए पूजा के समान है। वो हमारे लिए भगवान की तरह है। भागतव कथा जीवन को कैसे जीया जाए इसे बतलाती है।
हरिशचंद्र सोनकर