नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले चंद दिशाहीन युवकों ने कौम को परेशानी में डाल दिया। इसके नाम पर इकट्ठा हुए दिशाहीन युवक अराजक भीड़ बन कर रह गए, इसका खामियाजा कौम के शरीफ परिवारों को भुगतना पड़ा। पुलिस डॉक्टर और वकील को भी पकड़ कर ले गई। शुक्रवार को हुए उपद्रव पर मुस्लिम समाज के बुजुर्गों का नजरिया कुछ इस तरह का था।
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निकल पडे़ भीड़ बनकर। न कोई नेतृत्व और न कोई एजेंडा
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला संवाददाता ऐहतेशाम उद्दीन अहमद से इलाके के बुजुर्गों ने शनिवार को अपनी यह तकलीफ साझा की। शाह मारूफ बाजार में बैग का थोक कारोबार करने वाले बुजुर्ग कहते हैं कि इन युवाओं को यह नहीं मालूम था कि विरोध किस तरह किया जाता है। सरकार तक अपनी बात, अपनी समस्या कैसे पहुंचाई जाए यह भी नहीं मालूम था। बस निकल पडे़ भीड़ बनकर। न कोई नेतृत्व और न कोई एजेंडा, ऐसे में अराजकता तो होनी ही थी।
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सीएए के विरोध में देशभर में क्यों प्रदर्शन
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इस तरह की हरकत से पीड़ित होने की बजाय मुस्लिम समाज की छवि दंगाई और उपद्रवी की बन गई। इसी बाजार के दूसरे बुजुर्ग कहते हैं कि किसी युवक के पास कोई मांग पत्र नहीं था, नहीं मालूम था कि कहां जाएंगे ? यदि विरोध करना ही था तो शांतिपूर्ण तरीके से करते, जहां पुलिस ने रोका वहीं रुक जाते और अधिकारियों को शांतिपूर्ण ढंग से अपने विरोध के बारे में बताते।
अच्छी नीयत से शामिल हुए लोगों ने भुगता खामियाजा।
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ऐसा नहीं हो सका, नेतृत्व विहीन भीड़ में कुछ अराजकतत्वों ने पथराव किया और खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ा जो अच्छी नीयत से इसमें शामिल हुए थे। शाह मारूफ में कुछ उपद्रवियों को दौड़ा रही पुलिस ने संभ्रांत परिवार के एक चिकित्सक और वकील को पकड़ लिया और उपद्रवी भाग निकले। बुजुर्गो में शुक्रवार की घटना के प्रति दुख और चिंता नजर आई।