गोरखपुर के नखास चौक पर शुक्रवार को जो हुआ वह अचानक हुई प्रतिक्रिया का हिस्सा नहीं था। इसे लेकर बाकायदा योजना बनाई गई थी। मकसद था देश की राजधानी दिल्ली और फिर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाद मुख्यमंत्री के शहर से एक अलग तरह का संदेश देने का।
संदेश इस बात का कि नागरिक संशोधन कानून को लेकर कितना आक्रोश है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक खुद पुलिस और प्रशासन भी इसे कबूल कर रहा है। इसीलिए इस दिशा में भी जांच की जा रही है कि शुक्रवार को जो हिंसा हुई, वह सुनियोजित तो नहीं थी।
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गोरखपुर में आज हुए हिंसक प्रदर्शन को रोका जा सकता था
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के मुताबिक खुद शासन स्तर पर गोरखपुर से ऐसा फीडबैक पहुंचा है। शायद यही वजह है कि शुक्रवार की देर शाम तक सख्त कार्रवाई करने की बात कहने वाले प्रशासनिक और पुलिस अफसरों के सुर रात 10.30 बजे के बाद बदल गए।
लखनऊ की ही तरह गोरखपुर में भी सरकारी संपत्ति की क्षति पहुंचाने वाले उपद्रवियों की संपत्ति से इसकी भरपाई करने की बात अफसर कहने लगे हैं। शासन के सख्त होने के बाद प्रशासन ने भी कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से नुकसान की भरपाई इसी के तहत होगी।
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गोरखपुर में भी हिंसक प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट है कि अंदरखाने अभी भी कुछ लोग जुलूस के बहाने उपद्रव मचाने की साजिश अभी रच रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए एडीजी ने पुलिस को कई निर्देश दिए हैं। एडीजी ने कहा कि गश्त में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
पुलिस की मौजूदगी हर जगह दिखनी चाहिए। चौराहों पर तेज तर्रार पुलिस वालों की ड्यूटी लगाई जाए। आम लोगों के बीच यह संदेश जाना चाहिए कि पुलिस उनकी सुरक्षा में है और हालात पूरी तरह से काबू में हैं। इसका असर भी दिखा। पुलिस लगातार गश्त करती नजर आई।
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गोरखपुर में भी हिंसक प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर में हिंसा और उपद्रव करने वाले तीन मोहल्लों नखास, रेती रोड और बक्शीपुर के सभी उपद्रवियों की कुंडली खंगालने में पुलिस व प्रशासन जुट गया है। डीएम और एसएसपी का कहना है कि जिन उपद्रवियों का आपराधिक रिकार्ड मिलेगा, उन पर रासुका-गैंगेस्टर जैसी कई कड़ी कार्रवाई होंगी।
जांच में साजिशन शहर का माहौल बिगाड़ने की बात सामने आई तो उसे अंजाम देने वालों की मुश्किलें बहुत बढ़ सकती हैं। जानकारी के मुताबिक कोतवाली पुलिस ने शुक्रवार को शहर में हुए उपद्रव में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।
सीएए के विरोध में देशभर में क्यों प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
पहला मामला कोतवाली प्रभारी जयदीप वर्मा ने 22 नामजद और 800 अज्ञात पर मारपीट, हत्या की कोशिश, लोक सेवक पर आपराधिक बल का प्रयोग, उपद्रव करना, नफरत फैलाने, आर्थिक हानि पहुंचाने, 7 सीएलए का केस कराया है।
दूसरा मामला चौकी इंचार्ज नखास अवधेश प्रसाद की तहरीर पर दर्ज हुआ। इसमें 150 लोगों से ज्यादा पर धारा 144 के उल्लंघन का जिक्र है। एडीजी रेंज जय नारायण सिंह खुद ही हालात पर नजर बनाए हुए हैं। सीसीटीवी फ़ुटेज, ड्रोन कैमरे के जरिये की गई फोटोग्राफी और वीडियो की मदद से पत्थरबाजों की पहचान की गई है।