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चंपा देवी पार्क में श्रीमद्भागवत कथा का समापन, बांके बिहारी की कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

Sat, 14 Dec 2019 09:10 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से चंपा देवी पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें और अंतिम दिन कथा वाचिका आस्था भारती ने कहा कि इस कलियुग में दान करना ही जीवन के लिए मंगलकारी है। कलियुग में धर्म का एक ही चरण शेष रहेगा और वह है दान।

श्रीरामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि कलियुग में धर्म के चार पदों में से दान ही प्रधान रह जाएगा और वही मानव जीवन का कल्याण करेगा। अत: अपने ध्यान को धर्म यज्ञ में आहुति के रूप में लगाए और जीवन में लाभ की प्राप्ति करें।

भागवत की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को श्राप मिला था कि सात दिनों के बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी। लेकिन परीक्षित ने इस लघु अवधि का इतना अपूर्व रूप से सदुपयोग किया कि उनके लिए मोक्ष के द्वार खुल गए।
यहां ध्यान देने की बात यह है कि परीक्षित की मुक्ति केवल हरि चर्चा या कृष्ण लीलाओं को श्रवण करने मात्र से नहीं हुई थी बल्कि पूर्ण गुरु सुखदेव महाराज के द्वारा प्रभु के तत्व रूप को अपने अंदर जान लेने पर हुई थी।
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
अच्छा हो एक दीप जलाएं
कथा व्यास ने कहा अंधकार को क्यों धिक्कारें, अच्छा हो एक दीप जलाएं। अंधकार कितना ही पुराना क्यों ना हो लेकिन एक छोटा सा दीपक जलाते ही वह पल भर में खत्म हो जाता है। इसी प्रकार कोई कितना भी पापी क्यों ना हो? ज्ञान का दीपक जलाते ही जन्म-जन्मांतरों के कर्मों का कष्ट छंट जाता है। उन्होंने कहा कि श्री गुरुदेव का कहना है कि पाप से घृणा करो पापी से नहीं।

भारत की जेलों में कार्यरत बंदी सुधार एवं पुनर्वास कार्यक्रम अंतर क्रांति प्रकल्प इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। गुरु महाराज की आध्यात्मिक शिक्षा और ब्रह्मज्ञान की दीक्षा को आधार बनाकर तिहाड़ जेल के कैदियों ने अपने जीवन में धर्म व निष्ठा, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को प्रतिष्ठित किया है।

ब्रह्मज्ञान के प्रकाश ने उनके भीतर के अज्ञानता रूपी तमस को दूर कर दिया है। आज वह स्वयं प्रज्वलित दीपक है और अपने प्रकाश से दूसरों के जीवन को रोशन करने निकल पड़े हैं।
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
स्वधामगन प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
साध्वी आस्था ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के स्वधामगमन (घर वापसी) के प्रसंग को सुनकर  पंडाल में बैठे भक्त भाव विभोर हो उठे। साध्वी ने भावपूर्ण ढंग से कथा प्रस्तुत की। आखिर में भागवत महापुराण की महाआरती हुई।

इस अवसर मुख्य यजमान व्यापारी कल्याण बोर्ड के प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पदंत जैन, तुलस्यान फार्मा के निदेशक राजेश कुमार तुलस्यान, राम नक्षत्र सिंह ट्रेडर्स के महेंद्र सिंह, विजय अग्रवाल, अरुण कुमार मिश्र, स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी सुमेधानंद, स्वामी अर्जुनानंद, अशोक अग्रवाल, नंदू मिश्रा, विकास जालान, जगरनाथ बैठा, मिथिलेश शर्मा, दिनेश चौरसिया, अच्छेलाल गुप्ता, मुन्ना यादव, प्रभा पांडेय आदि मौजूद रहे।

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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
श्रीमद्भागवत की कथा की पूर्णाहुति आज
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन शनिवार को चंपा देवी पार्क में हो गया। कथा की पूर्णाहुति पर यज्ञ का आयोजन रविवार को चंपा देवी पार्क में सुबह 11 बजे से होगा।

::::: क्या बोले श्रद्धालु
- बांके बिहारी के स्वधामगमन प्रसंग को सुनकर आंखें भर आई हैं। लगा जैसे वाकई प्रभु विदा हो रहे हैं। ऐसी अनुभूति पहले नहीं हुई।  
काजल सिंह, नंदानगर
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती का पूजन करते शहरवासी। - फोटो : अमर उजाला
- सात दिनों से लगातार कथा सुनने के लिए आ रही हूं। हर दिन भक्ति के अलग-अलग आयाम देखने को मिले हैं। भगवान कृष्ण की लीलाएं अनंत है।
प्रीति, तारामंडल

- भागवत भक्ति में मन हमेशा रमा रहता है। अक्सर कथाएं सुनने जाता हूं। साध्वी की कथा बांके बिहारी की ही तरह सादगी से जीवन को जीने की प्रेरणा देती है। सीख को अमल में लाऊंगा।
भागवत सिंह, संतकबीरनगर

- साध्वी ने धर्म की स्पष्ट व्याख्या करते हुए उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला है। धर्म को अंधविश्वास बोलने वालों का मुख अपने तर्कों से बंद कर दिया है।
मनीष जैन, अलीनगर
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