क्राइम सीन 360 क्यों? मकसद, आम जन को अपराध और अपराधियों से खबरदार करना। उम्मीद है कि यह कोशिश, अपराध नियंत्रण में सुरक्षा एजेंसियों और आम आदमियों के बीच मजबूत पुल साबित होगी। पूरी कोशिश है कि इस कॉलम में दी जाने वाली सामग्री आमजन के लिए उपयोगी हो। इस प्रयास में आप भी भागीदार बन सकते हैं। अपने बहुमूल्य सुझाव हमें जरूर दें।
आइए, जानते हैं कौन है, इस घर में रहने वाले आठ लोग ?
20 नवंबर साल 2001 की मनहूस रात। उस रात भी शिवाजी नगर कालोनी के राकेश राय के घर में आठ लोग थे। सात लोग मौत के घाट उतार दिए गए थे, बस एक बचा था। आपको यकीन नहीं होगा, आज भी इस घर में आठ लोगों की मौजूदगी है। आखिर वो कौन हैं... ?
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- फोटो : अमर उजाला
उस रात को घटी दिल दहला देने वाली घटना ने पलक झपकते, लोगों के दिलो-दिमाग में खौफ भर दिया था। कई साल तक राकेश के घर का ख्याल आते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते। कान खुद-ब-खुद गर्म हो जाते। उस दिन लाशों से रिस-रिस कर बहे खून से वह घर खून का तालाब बन गया था । उस घर पर नजर पड़ते ही सांस धौंकनी-सी चलने लगती। पैर बेकाबू हो जाते, मन कहता भागो, इस घर में भूत है। एक नहीं सात-सात। एक मुंह से दूसरे मुंह होते हुए जुबानी मोहल्ले दर मोहल्ले लोगों के दिमाग पर तारी होती जा रही थी।
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- फोटो : अमर उजाला
कहानियां बनने लगी, उस घर से रात में घंटी की आवाज आती है। किसी को पायल तो किसी को नाक से बोलने की आवाजें सुनाई पड़ने की कहानी फिजाओं में तैरने लगी। हालात ऐसे बन गए कि इस घर में रहने को छोड़िए, कोई एक पल ठहरने की भी नहीं सोच सकता था। क्या इस घर में फिर कभी कोई नहीं आया ? क्या वह अब भी वीरान पड़ा है, उसमें मकड़ी के जालों का राज है ? क्या इस घर में आज भी कोई विचरता हैं ? हां, इस घर में अब भी आठ लोग हैं, जिंदा इंसान। ये है, बड़हलगंज के सरया मोहलिया के रहने वाले कवलभान यादव का परिवार।
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- फोटो : अमर उजाला
कवलभान यादव मां दुर्गा के भक्त हैं, उन्हें भूतों पर यकीन नहीं। पांच साल पहले उन्होंने यह घर खरीद लिया । ऐसा नहीं था कि कवलभान उस दिल दहला देने वाली घटना से बेखबर थे। वे कहते हैं, सब बकवास है। भूतप्रेत कुछ नहीं होता है। हो सकता है कि किसी के लिए होता हो, मगर मुझे देखिए ठाठ से रहता हूं।
कवलभान बताते हैं, घर में पत्नी, दो बहू और उनके बच्चे कुल आठ लोग रहते हैं। मुझे तो कभी घंटे बजने जैसी आवाज नहीं सुनाई दी। ये सब कुछ लोगों की कारस्तानी थी, जो चाहते थे कि उनकी बातों का भूत उस घर और मोहल्ले वालों के दिमाग में घूमता रहे।
नतीजा, कवलभान के इस साहस ने न सिर्फ मोहल्ले के लोगों को बड़ी ताकत दी है, बल्कि पूरा परिदृश्य ही बदल दिया है। जो पड़ोसी घर की तरफ देखते नहीं थे। वे आज घर में जाकर भोजन पानी भी करते हैं। उनके जेहन से डर शब्द गायब हो गया है।
कोट
भूत-प्रेत मनोस्थिति का रूप है। विश्वास का बड़ा प्रभाव मनोस्थिति पर पड़ता है। इसे मनोविज्ञान में विभ्रम कहते हैं। मसलन कोई वस्तु नहीं दिख रहा है लेकिन फिर भी लगता है कि कुछ है। जो लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं वे इस मनोरोग के ज्यादा शिकार होते हैं। वहीं जो मानसिक रूप से मजबूत हैं वे भूत-प्रेत नहीं मानते हैं। उनके साथ विभ्रम जैसी स्थिति नहीं होती है। डॉ धनंजय कुमार, आचार्य गोविवि मनोविज्ञान विभाग