Ghazipur News: ट्रेन में हत्या के बाद मंगरू चौधरी का शव गाजीपुर स्थित उनके आवास पर पहुंचा तो पूरा मोहल्ला रो पड़ा। देर शाम कांपते हाथों से बुजुर्ग पिता ने जवान बेटे की चिता को मुखाग्नि दी। यह मंजर देख लोगों का कलेजा दहल उठा।
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मंगरू चौधरी की फाइल फोटो व पत्नी व मासूम बच्चियां
- फोटो : अमर उजाला
गरीबी से लड़ते हुए परिवार की किस्मत बदलने चेन्नई गए मंगरू चौधरी की रविवार की ट्रेन में गोली मारकर हत्या के बाद शव जब सोमवार को घर पहुंचा तो चौधरी मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई। “पापा आइहें त खिलौना ले अइहें...” इस आस में दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठीं पांच वर्ष की अनुशिका और दो वर्ष की अन्नू को क्या पता था कि अब उनके पिता कभी लौटकर नहीं आएंगे। पिता के शव से लिपटकर मां सोनी संग दोनों पुत्रियां बिलख पड़ीं। देर शाम नगर के बलुआ घाट पर जब बूढ़े पिता ने अपने जवान पुत्र की चिता को मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद हर व्यक्ति फफक कर रो पड़ा।
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मंगरू चौधरी की हत्या के बाद अंतिम संस्कार करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
कोतवाली क्षेत्र के चौधरी मोहल्ला निवासी दूधनाथ के छोटे बेटे मंगरू ने अपने परिवार को गरीबी से निकालने और बड़ी हो रही दोनों बच्चियों को पढ़ाने का सपना देखा था। इसी आस में वह 26 अप्रैल को मछली पालन का काम करने चेन्नई गया था, लेकिन वहां काम में मन न लगने के कारण उसने घर लौटने का फैसला किया और आठ मई को ट्रेन से जमानिया के लिए निकल पड़ा।
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मंगरू चौधरी की पत्नी व बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
घर पर पत्नी सोनी और उसकी दोनों पुत्रियां अपने पिता के लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं। बच्चियों को आस थी कि उनके पिता उनके लिए खिलौने और टॉफी लाएंगे, लेकिन घर पिता नहीं, बल्कि उनका शव पहुंचा।
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मंगरू चौधरी का शव पहुंचते ही परिवार में मचा कोहराम
- फोटो : अमर उजाला
बलुआ घाट पर छलक उठीं हर किसी की आंखें
पोस्टमार्टम के बाद सोमवार की शाम जब मंगरू का शव जमानिया स्थित उसके पैतृक आवास चौधरी मोहल्ला लाया गया, तो परिजनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। सोमवार शाम करीब पांच बजे नगर के बलुआ घाट पर भारी नम आंखों के बीच मंगरू का दाह संस्कार किया गया। बुढ़ापे से टूटे पिता दूधनाथ चौधरी के कांपते हाथों ने अपने जवान बेटे की चिता को मुखाग्नि दी। घाट पर मौजूद लोगों की आंखें यह मार्मिक दृश्य देखकर छलक उठीं। बड़े भाई अर्जुन चौधरी भी अपने छोटे भाई के वियोग में रोते नजर आए।
मंगरू चौधरी के अंतिम संस्कार में शामिल लोग
- फोटो : अमर उजाला
सोनी की उजड़ी मांग, मासूमों का भविष्य हुआ अंधकारमय
पति की मौत की खबर के बाद से पत्नी सोनी सुध-बुध खो बैठी है। उसकी दुनिया पल भर में उजड़ गई। रो-रोकर बेहाल सोनी बस यही विलाप कर रही है कि अब वह अपनी इन दो अनाथ मासूम बच्चियों को लेकर कहां जाएगी और उन्हें कैसे पालेगी।