ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवाने की घटनाएं जिले में थमने का नाम नहीं ले रही हैं। रविवार को मटुकपुर गांव के पास ट्रेन की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई थी, जबकि वर्ष 2025 से अब तक अलग-अलग स्थानों पर हुए हादसों में करीब 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
यदि आंकड़ों पर गौर करें तो हर महीने दो से ज्यादा लोग ट्रेन से कटकर जान गंवा रहे हैं, इसके बावजूद लोगों की लापरवाही कम नहीं हो रही और इंतजार करने की बजाए लोग बंद क्रॉसिंग को पार करने में गुरेज नहीं कर रहे है।
सोमवार को शहर से लेकर देहात तक कई जगहों पर बंद रेलवे फाटक, लाल सिग्नल और सामने आती ट्रेन की परवाह किए बिना लोग रेलवे ट्रैक पार करते नजर आए। यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे को दावत दे सकती है, लेकिन समय बचाने की जल्दबाजी में लोग अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालते दिखे।
शहर के फूलनपुर रेलवे क्रॉसिंग के साथ ही भूतहियाटांड-बजुर्गा मार्ग स्थित रेलवे फाटक पर बंद होने के बावजूद वाहन चालकों और पैदल राहगीरों ने पटरी पार करते दिखे। भदौरा, जखनियां, दिलदारनगर सहित कई इलाकों में भी यही हाल रहा।