मैंने पापा को बहुत समझाया था... वो मुकदमे और बदनामी से इस कदर टूट चुके थे कि उनका दिल शिकोहाबाद में नहीं लग रहा था। मैंने उनसे यहां तक कह दिया था कि पापा, आप परेशान मत हो, हम शिकोहाबाद की ये कोठी और अपनी सभी संपत्तियां बेच देंगे और ये देश छोड़कर नेपाल जाकर हमेशा के लिए बस जाएंगे। वहां हमें कोई नहीं जानेगा, कोई ताना नहीं मारेगा... मगर पापा ने मेरी एक न सुनी और हमेशा के लिए हमें छोड़कर चले गए।