फिरोजाबाद जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने आरव हत्याकांड को रिश्तों को कलंकित करने वाली दुर्लभ से दुर्लभतम वारदात मानी। फैसले में लिखा कि इस बर्बरता ने समाज के पारिवारिक ताने-बाने को हिलाकर रख दिया है। अगर ऐसे नरपिशाच के प्रति नरम रुख अपनाया गया, तो समाज का करीबियों और रिश्तेदारों पर से भरोसा ही उठ जाएगा। साथ ही कोर्ट ने माना कि यदि दोषी को फांसी से कम सजा दी गई, तो जेल से बाहर आने के बाद मृतका की मां रति और उसके परिवार की जान को हमेशा के लिए खतरा बना रहेगा।
अदालत ने अपने आदेश में विशेष रूप से रेखांकित किया कि दोषी जितेंद्र पाठक रिश्ते में पीड़ित बच्चे का चाचा लगता था, जिसका पहला कर्तव्य अपने भतीजे की रक्षा करना था। लेकिन उसने रति को हासिल करने की हवस में उस डेढ़ साल के निर्दोष बच्चे को शादी का रोड़ा समझ लिया, जो खुद ठीक से चल भी नहीं सकता था और अपनी मां की गोद में खिलखिला रहा था।