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UP: 'नरपिशाच पर नरमी बरती तो...' कोर्ट ने सुनाई सजा-ए-मौत, मासूम आरव का कातिल जड़ने लगा खुद के चेहरे पर थप्पड़

Sat, 11 Jul 2026 09:41 AM IST
Dhirendra Singh राहुल दक्ष, संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने आरव हत्याकांड को दुर्लभतम अपराध बताते हुए कहा कि दोषी ने पूरी योजना के साथ मासूम की निर्मम हत्या की थी। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे नरपिशाच के प्रति नरमी बरतने से समाज का रिश्तों और करीबियों पर से भरोसा उठ जाएगा।
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आरव हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने आरव हत्याकांड को रिश्तों को कलंकित करने वाली दुर्लभ से दुर्लभतम वारदात मानी। फैसले में लिखा कि इस बर्बरता ने समाज के पारिवारिक ताने-बाने को हिलाकर रख दिया है। अगर ऐसे नरपिशाच के प्रति नरम रुख अपनाया गया, तो समाज का करीबियों और रिश्तेदारों पर से भरोसा ही उठ जाएगा। साथ ही कोर्ट ने माना कि यदि दोषी को फांसी से कम सजा दी गई, तो जेल से बाहर आने के बाद मृतका की मां रति और उसके परिवार की जान को हमेशा के लिए खतरा बना रहेगा।

अदालत ने अपने आदेश में विशेष रूप से रेखांकित किया कि दोषी जितेंद्र पाठक रिश्ते में पीड़ित बच्चे का चाचा लगता था, जिसका पहला कर्तव्य अपने भतीजे की रक्षा करना था। लेकिन उसने रति को हासिल करने की हवस में उस डेढ़ साल के निर्दोष बच्चे को शादी का रोड़ा समझ लिया, जो खुद ठीक से चल भी नहीं सकता था और अपनी मां की गोद में खिलखिला रहा था।

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मासूम की हत्या का सीसीटीवी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अदालत ने सीसीटीवी फुटेज के सूक्ष्म विश्लेषण के आधार पर अपने आदेश में लिखा कि जितेंद्र की क्रूरता सामान्य इंसानी व्यवहार से परे थी। उसने मासूम आरव को लगातार 6 बार जमीन पर पटका। इसके बाद भी जब उसका दिल नहीं पसीजा, तो उसने बच्चे को उठाकर यह जांचा कि वह मर गया या जिंदा है। जब उसे लगा कि मासूम की सांसें अभी बाकी हैं, तो उसने दो बार और पूरी ताकत से उसे कंक्रीट पर दे मारा, जिससे बच्चे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह कोई आवेश में आकर किया गया अपराध नहीं था, बल्कि सोच-समझकर, योजना बनाकर किया गया जघन्य, निर्मम और क्रूर हत्याकांड था। 

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इंस्पेक्टर अनुज कुमार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वैज्ञानिक और चश्मदीद साक्ष्यों ने पुख्ता की वारदात
पुलिस जांच अधिकारी अनुज कुमार ने इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी साक्ष्यों का ऐसा अकाट्य जाल बुना कि बचाव पक्ष के पास कोई रास्ता नहीं बचा। घटना स्थल के सामने रहने वाली शकुंतला देवी और राजेश कुमार के घरों में लगे सीसीटीवी कैमरों में यह पूरी वारदात कैद हुई थी। इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के प्रामाणिक सर्टिफिकेट कोर्ट में साबित किए। इसके अलावा चश्मदीद गवाह दीपांश और शकुंतला देवी ने कोर्ट में गवाही दी कि उन्होंने आरोपी को बच्चे को पटकते और फिर कंधे पर उठाकर ले जाते देखा था।

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फांसी की सजा दिलाने के बाद खुशी जताते जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव उपाध्याय व साथ में अन्य - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बचाव पक्ष के तर्क खारिज, कोर्ट में खुद को पीटने लगा दोषी
ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि जितेंद्र मानसिक रूप से बीमार है और 2018 में छत से गिरने के कारण उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं रहता। वह घटना के समय नशे में था। हालांकि, कोर्ट में जब बदायूं से आए उसके सगे भाई मुनीष पाठक से जिरह हुई, तो वह कोई भी मानसिक बीमारी या पागलपन का सर्टिफिकेट पेश नहीं कर सका। वहीं, जब अदालत कक्ष में लगी स्क्रीन पर राजेश कुमार के घर की सीसीटीवी फुटेज चलाई गई, जिसमें विराज मासूम को पटकता दिख रहा था, तो खुद का पाप देखकर दोषी जितेंद्र पाठक कोर्ट रूम में ही अपने चेहरे पर थप्पड़ मारने लगा और रोने लगा था।

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एसएसपी आदित्य लांग्हे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसएसपी आदित्य लांग्हे का कहना है कि वारदात के बाद से ही पुलिस का लक्ष्य आरोपी विराज को कोर्ट से दोषी करार कराते हुए फांसी की सजा दिलाने का था। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में पुलिस ने कड़ी मेहनत की। विराज को फांसी की सजा होना, नजीर है। डीएम संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि आरव की मौत अत्यंत दुखद थी। उस बच्चे को तो वापस नहीं लाया जा सकता। मगर, पुलिस-प्रशासन ने अपना काम पूरी मेहनत के साथ पूरा किया। दोषी को फांसी की सजा हुई। इस सजा से समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति गहरा विश्वास पैदा हुआ है।

 
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विराज का घर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वारदात से फांसी की सजा तक की टाइमलाइन
30 मई (दोपहर 2:30 बजे) आरोपी जितेंद्र पाठक उर्फ विराज ने आरव की निर्मम हत्या की।
30 मई (रात) शिकोहाबाद थाना पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया।
31 मईः पोस्टमार्टम और शव का अंतिम संस्कार

 
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इसी घर के पास हुई थी वारदात - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
4 जूनः चार्जशीट दाखिल
15 से 21 जून के बीच सभी 13 गवाही हुईं
3 जुलाई को साक्ष्य पूरे

 
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कोर्ट में तैनात पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
6 जुलाई को अंतिम जिरह
9 जुलाई को आरोपी विराज को दोषी करार दिया गया
10 जुलाई को फांसी की सजा दोषी को सुनाई गई
 
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