अलीगंज मार्ग पर हुए भीषण हादसे में गंभीर रूप से घायल किशोरी वर्षा के पास से मिली डायरी से उसके घर वालों को घटना की जानकारी दी गई। नयागांव थाना क्षेत्र के गांव तमरौरा निवासी सुनील कुमार शुक्रवार शाम गांव के लिए कार से निकले थे।
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हादसे में घायल वर्षा
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार सुबह बागवाला क्षेत्र के गांव हिम्मतपुर के पास उनकी कार ट्रोला में जा घुसी, जिससे कार में आग लग गई। इस बीच सुनील की बेटी वर्षा किसी तरह कार की खिड़की खुलने से बाहर आ गिरी। वर्षा के पास मिले पर्स को पुलिस ने खोला तो उसमें से एक डायरी मिली, जिसमें वर्षा की सहेली के पिता ब्रजेश का फोन नंबर लिखा मिला। पुलिस ने उस नंबर पर फोन कर सुनील के घर वालों को घटना की जानकारी दी।
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पोस्टमार्टम हाउस पर महिला के करुण क्रंदन से हर किसी की आंखें नम
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हंसता-खेलता परिवार एक मिनट में उजड़ गया। जिस मां ने बेटे को नौ मां तक कोख में पाला, बड़े अरमान से ब्याह कर लाई और नाती को गोदी में खिलाया वह तीनों ही इस दुनिया में नहीं रहे। मां पोस्टमार्टम हाउस पर एक ही बात चिल्ला रही थी, कोई मेरे उन बेटों को ले आओ, जिन्हें पेट में पाला और गोद में खिलाया। बार-बार बेहोश हो रही मां को महिला पुलिसकर्मी पानी पिला कर होश में लाने का प्रयास कर रहीं थीं।
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कार हादसे के शिकार हुए लोगों के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम हाउस पर आंखों को नम कर देने वाला माहौल था, जिस व्यक्ति ने मंजर देखा या पांच शवों को एक लाइन में रखे देखा उसकी रूह कांप गई। मां-बहन आपस में लिपटकर रो रहे थे तो बराबर में बैठे दो भाई भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। तमरौरा निवासी सिपाहीराम और सिया देवी की छह संतानों में सुनील कुमार सबसे बड़े थे और 15 साल से दिल्ली में ड्राइवर थे, छोटा भाई महावीर भी दिल्ली में ही पेंटर है। अन्य तीन भाइयों में जयवीर और सुखवीर सेना की तैयारी कर रहे हैं जबकि सबसे छोटा आकाश पढ़ रहा है, वहीं बहन पूनम सुनील के पास रहकर ही दिल्ली में किसी कंपनी में कार्यरत है। पिता पर चार बीघा खेती है, उसी से परिवार की गुजर-बसर होती है।
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वर्षा
- फोटो : अमर उजाला
हादसे में घायल हुई 16 वर्षीय वर्षा पुत्री सुनील कुमार को गंभीर स्थिति में आगरा के एसएन अस्पताल रेफर किया गया था, जहां से देर सायं उसे स्वस्थ्य होने पर छुट्टी दे दी गई। मृतक सुनील के जीजा रामानंद वर्षा को लेकर घर पहुंच गए हैं।
सुनील कुमार परिवार की बेहतर परिवरिश करने के लिए दिल्ली में ड्राइवर की नौकरी करते थे। एक कंपनी में गाड़ी चलाने के साथ ही एक खुद की कार खरीद ली थी, जिसे उबर कैब कंपनी में लगाकर आय के स्रोत बढ़ा लिए थे। पत्नी साथ में ही रहती थी। हादसे में पूरा परिवार खत्म हो गया।