चित्रकूट जेल में हुआ गैंगवार किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। अंशू दीक्षित उर्फ सुमित दीक्षित ने मुकीम काला की बैरक में घुसते ही समुदाय विशेष के बदमाश के जिंदा न रहने की बात कहते हुए उसे गोलियों से भून दिया। इससे पहले अंशू ने परेड के दौरान मेराज को यह कहते हुए गोलियों से भून डाला कि मुख्तार का खास कोई भी जिंदा नहीं रहेगा। कुछ देर बाद अंशू एनकाउंटर में पुलिस की गोली से मारा जाता है। अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए अंशू ने ईद का ही दिन चुना। दरअसल सुबह करीब दस बजे अंशू बैरक से निकला। वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों से उसने कहा कि वह पीसीओ जा रहा है, किसी को फोन करना है। तब किसी को अंदाजा नहीं था कि वह क्या करने वाला था। इस वक्त उसके पास पिस्टल थी। एक बड़े पुलिस अफसर ने बताया कि मेराज को देखते ही अंशू ने उस पर पिस्टल तान दी।
विज्ञापन
2 of 5
घटना के बाद छावनी बनी चित्रकूट जेल
- फोटो : amar ujala
उसने कहा कि तुम लोगों ने बहुत आतंक मचा लिया। अब मुख्तार अंसारी का खेल खत्म हो चुका है, उसका कोई गुर्गा जिंदा नहीं रहेगा। जब तक मेराज कुछ समझ पाता अंशु ने उस पर गोलियां दाग दीं। गोलियों की तड़तड़ाहट से वहां भगदड़ मच गई।
विज्ञापन
3 of 5
जेल के शस्त्रागार के बाहर तैनात फोर्स
- फोटो : amar ujala
कुछ ही सेकेंड बाद वह अस्थायी बैरक में पहुंचा यहां पर मुकीम काला को पकड़ लिया। उससे कहा कि तुम्हारा इंतजार था। मुख्तार का कोई बदमाश जिंदा नहीं रहेगा। खेल खत्म। तुरंत मुकीम को भी गोलियों से भून डाला।
4 of 5
गेट पर तैनात फोर्स
- फोटो : amar ujala
अस्थायी जेल में था मुकीम काला
मुकीम काला सात मई को ही चित्रकूट जेल में शिफ्ट किया गया था। कोरोना के प्रोटोकॉल के मुताबिक वह अस्थायी जेल में क्वारंटीन था। क्वारंटीन का समय पूरा होने के बाद उसको भी हाई सिक्योरिटी बैरक में शिफ्ट किया जाना था। मगर उसके पहले ही गैंगवार हो गया। जब अंशू ने मुकीम को मौत के घाट उतार दिया तो उसने खुद को बचाने के लिए पांच बंदियों को बंधक बना लिया। पुलिस ने जब घेराबंदी की तो उसने पुलिस पर गोलियां चलाईं। जवाबी कार्रवाई में वह ढेर हुआ।
चप्पे चप्पे पर तैनात रही फोर्स
- फोटो : amar ujala
हत्या करने के बाद बेफिक्र था
सूत्रों के मुताबिक मेराज को मारने के बाद वह टहलते हुए मुकीम की बैरक में गया। उसको मारा और वहां से दूसरी बैरक में गया। न उसके भीतर कोई डर दिख रहा था और न ही कोई फिक्र। ऐसा लगता है कि उसको यकीन था कि वारदात को अंजाम देने के बाद वह जिंदा रहेगा। सूत्रों के मुताबिक गैंगवार साजिश के तहत हुआ है, जिसमें अंशू को जिंदा बचाने की गारंटी मिली थी। हालांकि इस बारे में कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं है। जांच के बाद मामला स्पष्ट होगा।