बुलंदशहर के हाईवे कांड में आठ गांवों के लोगों ने चंदा करके निर्दोष रईस की लड़ाई लड़ी थी। रईस करीब चार महीने जेल में बंद रहा था। सदमे में पिता की जान चली गई थी। सूतारी गांव के रईस को पुलिस ने इस मामले में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था।
बुलंदशहर हाईवे कांड पर सामूहिक दुष्कर्म के बाद मां-बेटी और उसके परिवार ने तो दंश झेला ही, एक ऐसे परिवार को भी दर्द से गुजरना पड़ा, जिसका इस घटना से लेना-देना नहीं था। पुलिस ने चोला थाना क्षेत्र के गांव सूतारी निवासी निर्दोष रईस को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था।
इससे परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट आया तो क्षेत्र के आठ से अधिक गांवों के लोग उनके लिए फरिश्ता बनकर खड़े हो गए। उन्होंने चंदा करके परिवार की आर्थिक मदद के साथ न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। मंगलवार को रईस के परिवार और ग्रामीणों ने न्यायालय के निर्णय पर जहां खुशी जताई, वहीं अपने उस दर्द को भी बयां किया।
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हाईवे पर गांवदोस्तपुर के पास तैनात पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रईस की मां जमीला ने आंखों में आंसू और रुंधे गले से दर्द बयां करते हुए बताया कि जिस रात हाईवे पर मां-बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और लूट की घटना हुई, उनका बेटा घर में था। वह लकड़ी काटकर आया था। थककर अपने बच्चों के साथ सो गया था।
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हाईवे कांड के आरोपी सुनील और नरेश को जेल लेकर जाती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घटना के दो दिन बाद पुलिस अचानक प्रधान को लेकर उनके घर पहुंची। उनसे कहा गया कि बेटे को 10 मिनट में छोड़ देंगे। प्रधान साथ था, इसलिए डर नहीं लगा। जब दो घंटे तक बेटा नहीं आया तो पूछने पर बताया कि पुलिस साथ ले गई है।
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कोर्ट परिसर में हाईवे कांड की सुनाई गई सजा के दौरान मौजूद पुलिस बल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अगले दिन थाने पहुंचने पर पता चला कि बेटे को सामूहिक दुष्कर्म की घटना में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया। इससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उस समय रईस का बड़ा बेटा एक वर्ष का था।
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हाईवे कांड के आरोपी धर्मवीर उर्फ राका को जेल लेकर जाती पुलिस
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उस वक्त को याद कर कांप जाती है रूह
रईस की पत्नी शाबरून ने बताया कि उस वक्त को याद करके रूह कांप जाती है। पति को जब आरोपी बनाया गया, तब पता चला कि पुलिस निर्दोष लोगों को कैसे फंसा देती है। उन्होंने कहा कि रईस के जेल जाने के बाद हम ऊपर वाले से बस एक ही दुआ करते थे कि सच्चाई की जीत होनी चाहिए। करीब चार महीने बाद पति जेल से घर आ गए। कहा कि पुलिस को अपना काम निष्पक्ष तरीके से करना चाहिए।
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हाईवे कांड के आरोपी जुबैर और साजिद को जेल लेकर जाती पुलिस
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कोई निर्दोष फंसना नहीं चाहिए
भाई अनीश अहमद ने बताया कि रईस के जेल जाने के बाद घर की स्थिति खराब थी, लेकिन आठ से 10 गांवों के लोग हमारे लिए फरिश्ता बनकर आए। सूतारी के साथ कोराली, पचौता, काहिरा, मरगूबपुर, दरियापुर, चोला और सबदलपुर के ग्रामीणों ने चंदा करके भाई के लिए न्याय की लड़ाई लड़ी। इसमें मुस्लिमों के साथ हिंदू भाइयों ने भी पूरा सहयोग किया। सभी को पता था कि रईस निर्दोष है। उन्होंने भी मांग की है कि किसी निर्दोष का भाई और बच्चा नहीं फंसना चाहिए।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जाति-धर्म भूलकर आगे आए लोग
ग्रामीण मोहसीन एडवोकेट और मतलूब ने कहा कि गांव का हर व्यक्ति जानता था कि रईस ऐसा कृत्य नहीं करेगा। वह अपने काम से काम रखता था। उसके परिवार का लड़ाई झगड़े से कोई लेना-देना नहीं रहा। गांव के लोग सच्चाई के लिए जाति-धर्म भूलकर आगे आए।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी जुबेर व साजिद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सब्जी बेचकर परिवार का पालन कर रहा रईस
जमीला ने बताया कि जेल से आने के बाद रईस ने सब्जी बेचने का काम शुरू कर दिया। वह गांव-गांव जाकर फेरी लगाता है। अन्य ग्रामीणों ने भी कहा कि ऐसे अपराध नहीं होने चाहिएं। पुलिस को भी अपनी जांच बारीकी के साथ करनी चाहिए।
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हाईवे कांड मामले में आरोपियों को कोर्ट लेकर जाती पुलिस
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जेल से आने के चार महीने बाद हो गई पिता की मौत
जमीला ने बताया कि निर्दोष बेटे के दुष्कर्म के मामले में जेल जाने से पति शोहराब को गहरा आघात लगा। वह बीमार रहने लगे। रईस के जेल से बाहर आने के बाद भी वह सदमे से बाहर नहीं आ पाए और चार महीने बाद उनकी मौत हो गई।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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हाईवे कांड : पांचों दोषियों को आजीवन कारावास, अंतिम सांस तक रहेंगे जेल में
बुलंदशहर में नेशनल हाईवे-91 पर नौ साल पहले कार सवार परिवार को बंधक बनाकर मां-बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म व लूटपाट करने के पांच दोषियों को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओपी वर्मा के न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 1.81 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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न्यायालय ने कहा कि सभी दोषी अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे। साथ ही अर्थदंड की आधी राशि पीड़ित मां-बेटी को दी जाएगी। वारदात के नौ वर्ष चार माह और 25 दिन बाद फैसला आया है। वारदात 28 जुलाई 2016 की रात हुई थी। उस वक्त गाजियाबाद में रहने वाले परिवार (अभी बरेली निवासी) के छह सदस्य शाहजहांपुर स्थित पैतृक गांव तेरहवीं में शामिल होने जा रहे थे। बुलंदशहर के देहात कोतवाली क्षेत्र में दोस्तपुर फ्लाईओवर के निकट बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया था।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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उन्होंने कार सवार 14 वर्षीय किशोरी, उसकी मां, पिता, ताई, ताऊ व तहेरे भाई को बंधक बना लिया था। सभी को कार समेत सड़क के दूसरी तरफ खेत में ले गए। वहां तीनों पुरुषों के हाथ-पैर बांध दिए। किशोरी व उसकी मां के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपी लूटपाट कर भाग निकले थे।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच की और छह अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इनमें बावरिया गिरोह के जुबैर उर्फ सुनील उर्फ परवेज, सलीम उर्फ बीना उर्फ दीवानजी और साजिद निवासीगण गांव इटखारी बिनौरा, तिरवा, कन्नौज के खिलाफ सीबीआई ने अप्रैल 2017 में आरोपपत्र दाखिल किया था।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
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बाद में हरियाणा पुलिस ने धर्मवीर उर्फ राका उर्फ जितेंद्र, नरेश उर्फ संदीप उर्फ राहुल निवासी गांव गेशनपुर, मोहम्मदाबाद, फर्रूखाबाद और सुनील उर्फ सागर निवासी गांव बानवोई, आजादनगर, मोहम्मदाबाद को गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ सीबीआई ने 27 जुलाई 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया था।
हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी जुबेर व साजिद
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एक अभियुक्त सलीम की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई। अन्य अभियुक्तों जुबैर, साजिद, धर्मवीर, नरेश व सुनील को गत शनिवार को न्यायालय ने दोषी करार दिया था। सोमवार को इनको सजा सुनाई गई। प्रकरण में लापरवाही करने के चलते एसएसपी समेत 17 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी।