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यूपी: बाढ़ का कहर, गंगा और रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से कई गांव जलमग्न; हजारों बीघा फसल पानी में डूबी

Fri, 11 Sep 2026 06:58 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

गंगा का जलस्तर बढ़ने से पचौरी नगला से लसी नगला तक सड़क की दक्षिण दिशा में हजारों बीघा फसल पानी में डूब गई है। गन्ने को छोड़ बाजरा, शकरकंद, धान और तिल की फसलें पानी में रहने से खराब होने की आशंका है। गानइयाई, पांडे नगला, लसी नगला, गढ़िया गंगवार, तेलिया नगला गांवों की फसलों में भी पानी भर गया है।
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बाढ़ से फसलें तबाह, घरों में घुसा पानी - फोटो : अमर उजाला
यूपी के बदायूं जिला स्थित कादरचौक क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के गांव पचौरी नगला में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। गांव के करीब 20 घरों में पानी भर गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ग्रामीण पशुओं सहित पानी में रहने को मजबूर हैं। कई परिवारों ने घर खाली कर पुरानी सड़क के उस पार बने मकानों में शरण ली है। लोगों के आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था की गई है।
 
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बाढ़ से फसलें बर्बाद - फोटो : अमर उजाला
हजारों बीघा फसल डूबी
गंगा का जलस्तर बढ़ने से पचौरी नगला से लसी नगला तक सड़क की दक्षिण दिशा में हजारों बीघा फसल पानी में डूब गई है। गन्ने को छोड़ बाजरा, शकरकंद, धान और तिल की फसलें पानी में रहने से खराब होने की आशंका है। गानइयाई, पांडे नगला, लसी नगला, गढ़िया गंगवार, तेलिया नगला गांवों की फसलों में भी पानी भर गया है। उझानी ब्लॉक के सरौता और ननाखेड़ा से कछला-भदरौल रोड पर गंगा का पानी ओवरफ्लो होकर ननाखेड़ा, मुस्करा, भूढ़ा, भदरौल तक भर गया है। सूखी पड़ी भैंसोर नदी में भी पानी का प्रवाह शुरू हो गया है, जिससे नदी पुनर्जीवित जैसी लग रही है। हालांकि शुक्रवार सुबह से जलस्तर में कमी आई है। खंड विकास अधिकारी सर्वज्ञ अग्रवाल ने गांवों का दौरा कर सहायता का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि पचौरी नगला के आगे सोत में एक नाव डालकर लोगों को खेतों तक जाने की व्यवस्था की गई है।
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घरों में घुसा बाढ़ का पानी - फोटो : अमर उजाला
रामगंगा का जलस्तर स्थिर, बाढ़ से घिरे गांवों के हालात खराब
रामगंगा नदी में जलस्तर स्थिर होने से बाढ़ से घिरे गांवों के हालात जस के तस बने हुए हैं। गढ़िया रंगीन जाने वाले हजरतपुर और नगरिया खनू के मार्गों पर वाहनों का आवागमन शुक्रवार को भी बंद रहा है। नाव और मोटर बोट के सहारे ही लोगों का आना जाना हो रहा है। रास्तों की पुलिया के डूबने से आने जाने वालों का खतरा और बढ़ गया है। बाढ़ से प्रभावित गांवों क्षेत्र में सैकड़ों बीघा फसल डूब गई हैं। गुरुवार की सायं से रामगंगा के जलस्तर में ठहराव बना हुआ है, लेकिन घटना शुरू नहीं हुआ है। देवरनिया, सकतपुर, कटकौरा, देवचरी, जरतौली, मौसमपुर सिमरिया आदि एक दर्जन से अधिक गांव पानी से घिरे हुए हैं। सकतपुर गांव के अंदर घरों तक पानी पहुंच गया है। 

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जलमग्न घर - फोटो : अमर उजाला
बांटी गईं राहत सामग्री 
कुंडरा मजरा के प्रशासक तपन सिंह ने बताया कि बाढ़ का पानी गांव के करीब आ चुका है, इस ग्राम पंचायत में छह मजरे हैं, बिहारीपुर से आनंदापुर गांव के बीच में बनी पुलिया डूबी हुई चल रही है, जबकि कुंडरा मजरा से कटकोरा मार्ग की पुलिया और शेरपुर गांव के निकट बनी पुलिया का संपर्क मार्ग और करीब डेढ़ मीटर पक्की सड़क बाढ़ से बह चुकी हैं। इन रास्तों से गुजरना काफी खतरनाक है। ग्रामीणों का कहना है कि पांच दिनों से पानी भरा रहने से बाजरा की फसल बिल्कुल चौपट हो चुकी है, अगर पानी जल्द ही नहीं निकलता है तो धान की फसल भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। वहीं, सिमरिया गांव की तरफ भी रामगंगा बढ़ रही हैं। कई मकानों के किनारे तक पानी पहुंच गया है। इधर, एसडीएम दातागंज विनोद कुमार ने बताया कि रामगंगा का जलस्तर स्थिर है। गांवों में दिक्कतें कम हो रही हैं। जिन मार्गों पर पानी है, वहां पर नाव व बोट तैनात हैं। कुछ गांवों में राहत सामग्री भी बांटी जा रही है।
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गांव में घुसा पानी - फोटो : अमर उजाला
कछला के चौसिंगा गांव में घुसी गंगा
कछला क्षेत्र के चौसिंगा गांव में गंगा का पानी घुस आया। इससे घरों तक पानी पहुंच गया है। बाढ़ के पानी से घिरने की वजह से ग्रामीणों के सामने दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। वर्ष 2013 में भी इसी गांव में बाढ़ आई थी, उससे काफी नुकसान हुआ था। तब कछला चौराहे तक गंगा का जलस्तर चारों तरफ आ गया था, वैसी ही स्थिति लोगों को फिर से याद आने लगी है। कछला क्षेत्र के गांव सरौता की धान की फसल गंगा में डूब गई। जिससे किसानों को भी चिंता सताने लगी है। चौसिंगा गांव में कछला से नानाखेड़ा जाने वाले मार्ग से सड़क से लगभग दो फीट पानी बह रहा है। चौसिंगा गांव के ग्रामीणों ने खेतों में ऊंची ऊंची मिट्टी लगाकर बांध दिया है, जिससे पानी खेतों में न पहुंचे। 
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खाली पड़े घर - फोटो : अमर उजाला
गांव में नहीं आ पा रहा दूध
सरौता के दिनेश चौहान की पांच बीघा धान की फसल डूब गई। सरौता गांव के कैलाश नन्नू ने बताया कि प्रतिवर्ष गंगा जलस्तर बढ़ने पर गांव तक पानी पहुंच जाता है, लेकिन किसी के मकान या दुकानों में नहीं पहुंचा है। कछला गांव में घर-घर दूधिया दूध पहुंचाते हैं लेकिन शुक्रवार को वे सभी दूधिया नानाखेड़ा मार्ग से नहीं आ सके। चौसिंगा और सरौता मार्ग पर अधिक पानी होने से मोटरसाइकिल निकालने में काफी परेशानी हुई। शुक्रवार सुबह कछला में लोगों ने दूध की थैली लेकर काम चलाया।
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