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UP: बिजनौर के 400 साल पुराने साहनपुर किले में दशहरे का शाही अंदाज, आज होगा शस्त्र पूजन

Thu, 02 Oct 2025 04:27 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनाैर

सार

नजीबाबाद के साहनपुर किले में 400 साल पुरानी परंपरा के साथ दशहरा पर्व मनाया जाएगा। गुरुवार को पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह और रणंजय सिंह शस्त्र पूजन करेंगे। किले का इतिहास, शिकारी परंपरा और शाही ठाठ-बाट आज भी जीवित हैं।

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बिजनौर में रामलीला मंचन - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर जनपद के नजीबाबाद स्थित साहनपुर किले में शाही अंदाज से दशहरा पर्व मनाया जाता है। आज किले में पारंपरिक शस्त्र पूजन के साथ दशहरा मनाया जाएगा। साहनपुर के आलीशान किले को 1600 ईस्वी में राय पदारथ सिंह ने बनवाया था। 1952 तक रियासत रहे साहनपुर किले में आज भी शाही ठाठ-बाट हैं। शिकारी परंपरा से दुनिया में नाम रोशन करने वाले साहनपुर किले में आज भी शेर, हिरण, दुर्लभ जानवरों की खाल और चेहरों से सुसज्जित म्यूजियम राजशाही ठाठ की कहानी बयां करता है।
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साहनपुर किले में दशहरा मनाने और शस्त्र पूजन की परंपरा आज भी कायम है। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह अपने बेटे रणंजय सिंह के साथ शस्त्र पूजन करेंगे। शस्त्र पूजन के साथ भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का जश्न मनाया जाएगा। बृहस्पतिवार को शस्त्र पूजन और संगोष्ठी में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल होंगे।
 
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दशकों पुरानी है शस्त्र पूजन परंपरा
नजीबाबाद। साहनपुर किले में वर्ष 1940 तक भारतेंद्र सिंह के परदादा राजा भरत सिंह, वर्ष 1983 तक दादा चरत सिंह, वर्ष 2012 तक पिता कुंवर देवेंद्र सिंह और वर्ष 2013 से भारतेंद्र सिंह शस्त्र पूजन की परंपरा को निभा रहे हैं।
 

किले में घोड़ा पूजन की भी परंपरा थी
राजशाही घरानों में हाथी, ऊंट, घोड़े रखने की परंपरा थी। भारतेंद्र सिंह बताते हैं कि वर्ष 1978 तक घोड़े पूजन की भी परंपरा रही है। घोड़े आदि रखने की परंपरा अभी समय के अनुसार शिथिल हुई। रियासत के तीन हाथी भी कॉर्बेट नेशनल पार्क को दान दिए गए।
 
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किले में चलती थी शिकारी कंपनी
बेस्ट शूट ऑफ द वर्ल्ड का खिताब साहनपुर किले की शिकारी कंपनी को मिला है। वर्ष 1955 से 1972 तक शिकारी कंपनी का दुनिया में नाम था। विदेश से शिकारी शिकार करने आया करते थे। वर्ष 1970 में कालाडूंगी में सबसे बड़े शेर का शिकार करने पर बेस्ट शूट ऑफ द वर्ल्ड कीर्तिमान वाशिंगटन के स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन में दर्ज है। राजा चरत सिंह ने एक तीर से शेर को ढेर कर दिया था।
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