खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने चांदपुर में जगह जगह छापामारी करते हुए नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। वहीं, आटा चक्की और दो दुकानों को सील कर दिया गया। इसके विरोध में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया।
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बिजनौर जिला अस्पताल में भर्ती मरीज।
- फोटो : अमर उजाला
गाजियाबाद से कुट्टू का दाना खरीदकर लाया गया, चांदपुर में पीसकर आटा बनाया और लोगों को बेच दिया। चांदपुर तहसील मुख्यालय समेत कई गांवों में कुट्टू के आटे से बने पकवान खाने पर करीब 350 लोगों की हालत बिगड़ी गई। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की नींद टूटी। चांदपुर में जगह जगह छापामारी करते हुए नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। वहीं, आटा चक्की और दो दुकानों को सील कर दिया गया।
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जिला अस्पताल में एक बेड पर मां और दो बच्चे मिलकर कुल तीन मरीज।
- फोटो : अमर उजाला
सीएफएसओ संजीव कुमार ने बताया कि चांदपुर की शिव ट्रेडिंग कंपनी ने मुकेश जिंदल के जरिए ढ़ाई क्विंटल कुट्टू के बीज गाजियाबाद से खरीदे। इसके बाद चांदपुर में चक्की पर पीसकर किराना की दुकानों पर बेच दिया गया। अब इसे खाने के बाद करीब 350 लोग अस्पताल तक पहुंच गए। बड़ी संख्या में लोगों के अस्पताल में भर्ती हो जाने पर प्रशासन में हड़कंप मचा। आनन फानन में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन सक्रिय हुआ। टीम ने चांदपुर पहुंचकर जांच की। चांदपुर में धर्मपाल किराना स्टोर, किशनलाल भाटिया और अरोड़ा किराना स्टोर से नमूने लिए। दो अन्य दुकानें बंद मिलीं। टीम ने कुट्टे के आटे के साथ साथ घी, सरसों के तेल के नमूने भी लिए। उधर, चक्की सहित तीन दुकानों को सील कर दिया गया है।
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जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी।
- फोटो : अमर उजाला
कुट्टू दाने को सुरक्षित रखने के लिए लगाया होगा केमिकल
कुट्टू का दाना केवल छह महीने तक ही सही रहता है। इसके बाद खराब होने लगता है। ऐसे में आशंका है कि कुट्टा दाना सुरक्षित रखने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल किया गया होगा। अब हो सकता है कि बिना धुलाई किए ही उसे पीस दिया हो। उधर, कुट्टू का आटा केवल तीन महीने तक ही खाने योग्य रहता है। इसके बाद फंगस लग जाती है, तो बेकार हो जाता है।
ऐसे करें ताजा या बासी आटे की पहचान
बाजार में मिलने वाले कुट्टू का आटा बासी है या ताजा है, इसकी पहचान उसके रंग से की जाती है। ताजा कुट्टू के आटे का रंग गहरा भूरा होता है। अगर कुट्टू के आटे में किसी तरह की मिलावट की गई या वह खराब हो जाता है तो उसका रंग बदल जाता है। मिलावट या खराब कुट्टू के आटे का रंग ग्रे या हल्का हरा नजर आने लगता है। साथ ही बासी कुट्टू का आटा गूंथने हुए बिखरने भी लगता है।
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हल्दौर में कुट्टू का आटा खाने से बीमार महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
मरीजों का हाल जानने पहुंचे नगीना सांसद
कुट्टू के आटे से बने पकवान खाने से बीमार हुए मरीजों का हाल जानने के लिए नगीना सांसद चंद्रशेखर मेडिकल अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने भर्ती मरीजों से पूरी जानकारी की। वहीं एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज होते देख उन्होंने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए। अस्पताल को लेकर उन्होंने डीएम से भी मामले की शिकायत की है। कहा कि इतने बड़े पैमाने पर कुट्टू का आटा खाने से लोगों की हालत बिगड़ी है। अगर त्योहार से पहले सही से जांच हो जाती तो लोगों की हालत नहीं बिगड़ती। प्रशासन की घोर लापरवाही है।
सवई के चावल, सिंघाड़े की कचरी हो सकते हैं कुट्टू का विकल्प
महाभारत कालीन देवी मंदिर के पुजारी ललित मोहन पॉथरी ने कहा कि श्रद्धालु उपवास में सवई के चावलों की खीर, सिंघाड़े का आटा, सिंघाड़े की कचरी, आलू आदि का खाने में प्रयोग कर सकते हैं। यदि लोग कुट्टू के आटे के बने पकवान खाकर बीमार पड़ रहे हैं तो इसके विकल्प मौजूद हैं।
छापामारी होने पर बाजार बंद कर विरोध जताते व्यापारी।
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कुट्टू का आटा बेचने वाले पांच दुकानदार-व्यापारी हिरासत में लिए
चांदपुर क्षेत्र में प्रशासन ने तीन दुकान और एक आटा चक्की पर छापामारी कर पांच दुकानदारों को हिरासत में लिया है। व्यापारियों ने बाजार बंद कर थाने पहुंचकर दुकानदारों को छोड़ने की मांग की। उपजिलाधिकारी विजय शंकर के अनुसार सीएचसी स्याऊ सहित अनेक अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों की संख्या 350 के पार हो गई है।
ये बोले डीएम
रात में ही टीमों का गठन कर दिया गया था। कुट्टू के आटे का नमूना भी भरवाया गया है। जांच कराई जा रह है कि उसमें क्या गड़बड़ी थी। जो लोग बीमार पड़े हैं, उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था कराई गई है। - अंकित कुमार अग्रवाल, डीएम