गुलदार के हमले में महिला की मौत
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बिजनौर के गुलदार का बदलता व्यवहार
-अब तीन से पांच साल के गुलदार भी हमलावर हो रहे हैं
-पिंजरे में बकरी की जगह मुर्गे बांधने पर सबसे ज्यादा गुलदार पकड़े गए
-आबादी के पास गुलदार घूमने लगे हैं, जबकि पहले दूर रहते थे
-अब पूरे साल गन्ने के खेतों में गुलदार के शावक मिल रहे हैं
-अकेले रहने वाले गुलदार अब दो से तीन तक की संख्या में एक साथ दिख जाते हैं
-गांवों के अंदर घुसकर इंसानों को उठाकर ले जाने लगे हैं
खेतों में पानी होने के कारण बढ़े हमले
वन्य जीव विशेषज्ञ जोएल लायल कहते हैं कि गुलदार पानी से बचता है। यह उस जगह रहना पसंद नहीं करता, जहां पानी भरा हो। इसलिए रात में आबादी क्षेत्रों में यह नलकूप की छतों पर, पेड़ों पर या गांवों के बाहर सड़क, पुलिया और बंद मकानों की छतों पर रहता है। इसका यही व्यवहार इसे गांवों के अंदर से ला रहा है। बरसात का मौसम चल रहा है, ऐसे में लोगों को सतर्कता के साथ रहना होगा। क्योंकि खेतों में पानी होते ही यह सूखा स्थान तलाशने लगेगा।