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Bijnor: पश्चिमी यूपी में किलिंग मशीन का डंका बजाना चाहता था मुनीर, ऐसे खत्म हुआ जरायम का सफर

Tue, 22 Nov 2022 04:36 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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मुनीर अहमद - फोटो : amar ujala
एनआईए डीएसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना हत्याकांड को अंजाम देने वाले पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी मुनीर मेहताब की सोनभद्र जेल में सोमवार को मौत हो गई। मुनीर ने अलीगढ़ में ही अपराध का ककहरा सीखा। फिर पश्चिमी यूपी के साथ-साथ लखनऊ और दिल्ली तक सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देकर पुलिस को चकरघिन्नी बनाया। तंजील दंपती हत्याकांड के बाद वह पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़ सका। पूछताछ में उसने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए। महज 25 साल की उम्र में जरायम दुनिया में नाम कमाने और अपने शौक पूरे करने के लिए अपराध करना स्वीकारा। सोमवार को वाराणसी में उसकी मौत की खबर जिले के जरायम पेशेवरों में खासी चर्चाओं में रही।  

दुर्दांत अपराधी मुनीर का शव मंगलवार की दोपहर 2:55 बजे उसके घर सहसपुर पहुंचा। मुनीर के शव आने के इंतजार में सुबह से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। शव पहुंचने पर मौजूद भीड़ बस आखिरी बार उसकी शक्ल देखना चाहता थी। आज उसका शव सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। आगे जानें कैसे खत्म हुआ जरायम की दुनिया के शातिर अपराधी मुनीर मेहताब की जिंदगी का सफर।
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मुनीर का शव - फोटो : अमर उजाला
'द किलिंग मशीन ए गैंग' का वेस्ट यूपी में डंका बजाना चाहता था मुनीर
'द किलिंग मशीन ए गैंग' का सरगना मुनीर मेहताब पश्चिमी यूपी में जरायम की दुनिया का बड़ा नाम था। बिजनौर के स्योहारा कस्बे के सहसपुर से 12वीं में फेल होने के बाद 2009 में एएमयू में दाखिला लेने के उद्देश्य से यहां आए मुनीर ने पढ़ाई के बजाय जरायम की दुनिया का रास्ता अख्तियार कर लिया। यासिर-फहद की मदद से पिस्टल खरीदकर उसने सोशल मीडिया पर दाऊद की तर्ज पर ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ नाम से गैंग बनाकर अनगिनत हत्याएं और लूट कीं। उसे हथियारों की जरूरत थी और ये उसके शौक में भी शामिल थे। वह अब एके-47 खरीदाना चाहता था।
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मुनीर का शव - फोटो : अमर उजाला
तंजील अहमद की हत्या के बाद पहली बार पकड़ा गया था मुनीर
मुनीर के इस गैंग में फर्रुखाबाद का आशुतोष मिश्रा, अंबेडकर नगर टांडा का सऊद, अलीगढ़ के बरला का जुबैर, मारा गया उसका भाई सद्दाम, बिहार का अतीउल्लाह, आजमगढ़ का सादाब आदि नाम हैं, जो इस गैंग के पंजीकृत सदस्य हैं। अलीगढ़ में इस गैंग ने ताबड़तोड़ वारदात कीं। इसके अलावा, दिल्ली, लखनऊ तक हाथ मारा। एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद दंपती की हत्या के बाद मुनीर व उसका गैंग सुर्खियों में आया। इस हत्याकांड के बाद ही वह पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़ा था।

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तंजील अहमद हत्याकांड - फोटो : amar ujala
तंजील अहमद हत्याकांड से देश भर में फैली थी सनसनी
एएमयू के छात्र गुटों की अदावत में सक्रिय मुनीर और उसके बेहद करीबी दोस्त आशुतोष मिश्रा के नाम अलीगढ़ पुलिस के लिए नए नहीं थे। आशुतोष जेल में था, मगर मुनीर फरार था। इसी फरारी में उसने एएमयू छात्र आलमगीर की हत्या की थी। इसी बीच 2 अप्रैल 2016 को तंजील दंपती की हत्या में 7 अप्रैल को उसका नाम सामने आया। एनआईए डीएसपी तंजील उस समय पाकिस्तानी घुसपैठ से जुड़े किसी घटनाक्रम की जांच कर रहे थे। इस हत्याकांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था।
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आरोपी मुनीर - फोटो : amar ujala
एसटीएफ ने मुनीर को नोएडा से किया था गिरफ्तार
तंजील अहमद की हत्या के बाद एनआईए, आईबी, दिल्ली स्पेशल सेल आदि का अंदेशा हुआ कि कहीं ये हत्या किसी देश विरोधी संगठन का काम तो नहीं। मुनीर भी कहीं ऐसे ही संगठन के लिए काम तो नहीं करता। ऐसे में मुनीर की गिरफ्तारी के लिए उस समय एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने अलीगढ़ में इस गैंग पर काम करते रहे। तेजतर्रार मुखबिर नेटवर्क वाले इंस्पेक्टर अजय कौशल, एसओजी में कार्यरत राकेश यादव, दुर्विजय सिंह व फिरोज खान को एसटीएफ लखनऊ यूनिट से संबद्ध किया। इन चारों ने दो महीने के प्रयास के बाद मुनीर को 26/27 जून को नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर के एक मकान से दबोच लिया था। इसके बाद से वह जेल में ही बंद था। 21 मई को बिजनौर के एडीजे कोर्ट ने मुनीर और उसके साथी रैय्यान को फांसी की सजा सुनाई थी। 
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आरोपी मुनीर, तंजील अहमद हत्याकांड - फोटो : amar ujala
निजी रंजिश और एके-47 के लिए हुई थी हत्या
मुनीर से काफी राज उगलवाने थे, इसलिए उसका जिंदा पकड़ा जाना बेहद जरूरी था। जब उससे सभी एजेंसियों ने अलग-अलग पूछताछ की तो सभी हैरान रह गए। तंजील की हत्या जरूर उसने निजी दुश्मनी में की। यह बात जगजाहिर नहीं हुई। यहां तक कहा कि वह एके-47 खरीदना चाहता था और तंजील अहमद उसके रास्ते में रोड़ा बन रहे थे। बाकी हत्याएं व अन्य अपराध उसने सिर्फ दोस्तों की अदावत में, अपने शौक पूरे करने के लिए या टशन में किए। किसी अपराध के पीछे कोई मकसद न था।
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