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यशस्वी जायसवाल: बचपन में छोड़ा घर, गोलगप्पे भी बेचे, अब IPL में शतक, कांटों भरा रहा है भदोही के लाल का सफर

Mon, 01 May 2023 03:13 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
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bhadohi - फोटो : अमर उजाला
‘वक्त से लड़कर जो नसीब बदल दे, इंसान वहीं है जो अपनी तकदीर बदल दे’, ये पंक्तियां यूपी के भदोही जिले के लाल और युवा क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल पर बिलकुल सटीक बैठती हैं। उनके जीवन में जहां संघर्षों की दास्तान है, तो वहीं इसकी बदौलत हासिल की गईं उपलब्धियां आसमान की बुलंदियों को छूने की प्रेरणा भी देती हैं। अपनी हस्तनिर्मित खूबसूरत कालीन के लिए दुनियाभर में मशहूर भदोही की लोकप्रियता में उसके अपनी मेहनत और शानदार क्रिकेट से यशस्वी जायसवाल लगातार इजाफा कर रहे हैं, तभी तो रविवार को आईपीएल में मुंबई इंडियंस खिलाफ मात्र 62 गेंदों पर 124 रन बना कर क्रिकेट प्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। यह उनका आईपीएल में पहला शतक है।

इसके साथ ही राजस्थान रॉयल्स की और से खेलने वाले यशस्वी ने आईपीएल 2023 में अबतक सबसे ज्यादा रन बनाकर ऑरेंज कैप पर कब्जा किया है। उनके इस सीजन में 428 रन हो गए हैं। वह आईपीएल में शतक लगाने वाले चौथे सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए हैं। इसके साथ ही 124 रन किसी भी राजस्थान के बल्लेबाज की लीग में सबसे बड़ी पारी है। आज सोशल मीडिया सेंसेशन बने यशस्वी जायसवाल ने संघर्ष के एक लंबे दौर का सामना किया। गोलगप्पे तक बेचे, लेकिन टूटे नहीं। बस आगे बढ़ते गए और आज बन चुके हैं रिकॉर्डधारी।
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यशस्वी जायसवाल - फोटो : अमर उजाला
यशस्वी की कहानी शुरू होती है एक सपने से, जो उन्होंने बचपन में देखा था। क्रिकेटर बनने का। भदोही के सुरियांवा में भूपेंद्र जायसवाल और मां कंचन के परिवार में जन्मे यशस्वी बचपन से क्रिकेटर बनना चाहते थे। क्रिकेट का जुनून इस कदर हावी था कि वह सचिन जैसा क्रिकेटर बनना चाहता थे। शुरू में सीमेंट के पिच पर पिता ने क्रिकेट की एबीसीडी सिखाई। 
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कभी खुद गोलगप्पा बेचते थे यशस्वी जायसवाल - फोटो : अमर उजाला
बाद में  मुंबई रहने वाले चाचा ने 11 साल की उम्र में यशस्वी को अपने पास बुलाया।  यहीं से शुरू हुआ यशस्वी के संघर्ष का सफर। वहां पर उन्होंने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए कैंटीन और डेयरी की दुकान पर काम करने के साथ गोलगप्पे भी बेचे लेकिन कदम पीछे नहीं खींचे।

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यशस्वी जायसवाल
मुंबई में अपने संघर्ष को यशस्वी ने परिवार से कभी साझा नहीं किया। उनके पिता खर्चे के लिए कुछ पैसे भेज देते, लेकिन वह कम पड़ ही जाते। यशस्वी ने पैसे कमाने के लिए कई काम किए। मुंबई के आजाद मैदान में राम लीला के दौरान गोलगप्पे और फल बेचते थे। उन्हें कई बार खाली पेट सोना पड़ता था। 
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यशस्वी जायसवाल
यशस्वी ने डेयरी में भी काम किया। वहां एक दिन उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। इस दौरान क्लब ने यशस्वी को मदद की पेशकश की, लेकिन उनके सामने यह शर्त रखी गई कि अच्छा खेलोगे तभी टेंट में रहने के लिए जगह दी जाएगी। टेंट में यशस्वी रोटी बनाने का काम करते थे। वहां उन्हें दोपहर और रात में खाना मिल जाता था।
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यशस्वी जायसवाल - फोटो : BCCI Domestic/Twitter
मुंबई में  यशस्वी  संघर्ष जारी था, लेकिन यशस्वी को कोई खास पहचान नहीं मिल पा रही थी। तभी उनके घर वालों ने उन्हें वापस घर बुलाने का फैसला किया। इसी बीच 2013 में आजाद मैदान पर अभ्यास के दौरान एक दिन उन पर कोच ज्वाला सिंह की नजर पड़ी। यहीं से इस युवा खिलाड़ी के दिन बदलने शुरू हो गए। जून 2018 में यशस्वी को श्रीलंका के खिलाफ अंडर-19 टीम में जगह मिली।
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यशस्वी जायसवाल - फोटो : सोशल मीडिया
यशस्वी ने घरेलू क्रिकेट में महज 17 साल की उम्र में यूथ वनडे में दोहरा शतक ठोककर तहलका मचा दिया था। 2020 में अंडर-19 वर्ल्ड कप में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। यशस्वी ने एक शतक और चार अर्धशतक लगाया था। उन्होंने छह मैचों की छह पारियों में 400 रन बनाए थे। उनका औसत 133.33 का रहा था। यशस्वी को अंडर-19 वर्ल्ड कप में मैन ऑफ द टूर्नामेंट का अवॉर्ड मिला था। उनकी चारों तरफ तारीफ हुई। 
 

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यशस्वी जायसवाल - फोटो : IPL/BCCI
यशस्वी को आईपीएल 2020 की नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने 2.4 करोड़ रुपये में खरीद लिया। उन्होंने राजस्थान के लिए 2020 में तीन मैच में 40 रन बनाए थे। इसके बाद 2021 में 10 मैच में 249 रन बनाए। यशस्वी को 2022 की नीलामी से पहले राजस्थान ने चार करोड़ रुपये में रिटेन किया। यह किसी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी बात थी। उन्होंने आईपीएल 2022 में 10 मैच में 258 रन बनाए।
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अपने परिवार के साथ यशस्वी जायसवाल - फोटो : अमर उजाला
भदोही के रहने वाले यशस्वी की इस पारी को देख जिले में खुशी की लहर है। रविवार को उनकी शानदार बैटिंग से उनके गांव में कोच रहे आरिफ हुसैन और मोहम्मद इसराइल सहित अन्य परिजन भी खुश नजर आए। अमर उजाला से बातचीत करते हुए यशस्वी के पिता भूपेंद्र जायसवाल ने कहा कि मेरा बेटा लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। हमारी इच्छा है कि वह इंडियन टीम के लिए खेले।
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