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Women's Day 2025: बिना कोचिंग IPS बनीं अंशिका, प्रतिभा ने चुनी चुनौती; पढ़िए नारी शक्ति की सफलता की कहानियां

Sat, 08 Mar 2025 10:46 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

Women's Day 2025 News: महिलाएं आज नित नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं। सरकारी सेवाओं से लेकर खेल, कारोबार, शिक्षा व तकनीकी के क्षेत्र में अपनी धाक जमा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आइए जानते हैं उन महिलाओं की सफलता की कहानी जिन्होंने अपने जोश, जज्बे और कुछ कर गुजरने की चाह के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल की है।
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आईपीएस अंशिका वर्मा, डॉग हैंडलर प्रतिभा - फोटो : अमर उजाला
तेरे माथे पे ये आंचल बहुत ही खूब है, लेकिन तू इस आंचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था...मशहूर शायर मजाज लखनवी का ये शेर महिलाओं को हौसला और ताकत देता है। हौसला, ये केवल शब्द नहीं, आधी आबादी को बराबरी का दर्जा और उनका हक दिलाने की कुंजी है। इस शब्द को अपनी जिंदगी में कई महिलाओं ने जीया है। इसीलिए वह आज शिखर पर शोहरत की दास्तां लिख रही हैं। हर क्षेत्र में उन्होंने कामयाबी हासिल की है। वे नित नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं। किसी ने सरकारी सेवाओं में चयनित होकर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है तो कोई फिल्मी दुनिया में कॅरिअर संवार रहा है। पुरुषों के एकाधिकार को तोड़कर आधुनिक ढंग से किसानी भी महिलाएं कर रही हैं। खेल, कारोबार, शिक्षा व तकनीकी के क्षेत्र में भी उनकी बुलंदी दूसरों के लिए अनुकरणीय है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आइए जानते हैं उन महिलाओं की सफलता की कहानी जिन्होंने अपने जोश, जज्बे और कुछ कर गुजरने की चाह के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल की है।
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आईपीएस अंशिका वर्मा - फोटो : Anshika Verma
मजबूत इरादों संग बिना कोचिंग बनीं आईपीएस
इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। बिना किसी कोचिंग के खुद तैयारी कर यूपीएससी की परीक्षा पास की। आईपीएस बनीं। यह चुनौती अपनी अडिग इच्छाशक्ति और बुलंद इरादों से वर्तमान में बरेली की एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने पूरी की। आईपीएस अधिकारी के रूप में अंशिका न केवल कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही हैं, साथ ही वह समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। 

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आईपीएस अंशिका वर्मा - फोटो : अमर उजाला
अंशिका का जन्म तीन जनवरी 1996 को प्रयागराज में हुआ। अंशिका ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया। यूपीएससी में 2021 में 136वीं रैंक हासिल की। उनका कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए हमेशा से बेहतर करने की कोशिश है। ऐसे अभियान भी शुरू किए, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाया जा सके। अंशिका का मानना है कि अगर महिलाओं को बराबरी का दर्जा देना है, तो उन्हें शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा से सशक्त बनाना होगा। अपने बेहतर कामों के लिए उन्हें हाल ही में वीमेन आइकन अवार्ड से दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सम्मानित किया।

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डॉग हैंडलर प्रतिभा - फोटो : अमर उजाला
प्रतिभा ने चुनी चुनौती
विस्फोटक को तलाशने में अहम भूमिका डॉग और उसके हैंडलर की रहती है। बरेली की बेटी प्रतिभा लाल फाटक क्षेत्र निवासी इस भूमिका को रोमांच और गर्व के साथ निभा रहीं हैं। तीन साल पहले आईटीबीपी में भर्ती हुईं प्रतिभा ने बताया कि उनके पास बेल्जियम शैफर्ड मैलिनोइस डॉग है। इसे उन्होंने ही ट्रेनिंग दी है। एएक्सएल नाम का यह डॉग विस्फोटक के साथ मादक पदार्थ आदि को उसकी गंध से तलाशने की महारत रखता है। इस तरह की विशेषता वाले डॉग की मांग नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में होती है। इन इलाकों में पूर्ण रूप से ट्रेनिंग लिए हुए डॉग व उसके हैंडलर को ही भेजा जाता है।
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डॉग हैंडलर प्रतिभा सिंह - फोटो : अमर उजाला
वह अभी चंडीगढ़, बेलगाम, देहरादून और भुवनेश्वर में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि महिला होने की वजह से कई बार खतरे वाली जगहों पर उन्हें भेजने में वरिष्ठ हिचकते हैं। उन्हें उम्मीद हैं कि यह इजाजत भी सरकार की ओर जल्द मिलेगी और वह भी देश सेवा के लिए चुनौतीपूर्ण इलाकों में ड्यूटी के लिए जाएंगी।
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शिक्षिका डॉ. निशा शर्मा - फोटो : अमर उजाला
शिक्षण तक नहीं रखा खुद को सीमित, बनीं लेखिका
शिक्षिका डॉ. निशा शर्मा ने खुद को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ कई किताबें भी लिखी हैं। उनकी अब तक आठ किताबें प्रकाशित हो चुकीं हैं जो इतिहास और हिंदी विषय पर हैं। उन्हें बेस्ट राइटर ऑफ द ईयर-2024 ‘जी टाउन अवार्ड’ से नवाजा भी जा चुका है। यह अवार्ड उन्हें दिल्ली में इंडियन इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने दिया। उनकी लिखी किताब ‘आर्याव्रत गॉड ग्लोरी एंड गोल्ड’ के लिए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सम्मानित किया। इस तरह अब तक उनको शिक्षा के क्षेत्र में 35 अवार्ड मिल चुके हैं। पद्मश्री के लिए वह 2024 में नॉमिनी भी रही हैं।
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रिषिका सक्सेना - फोटो : अमर उजाला
खेल और समाजसेवा में बनीं मिसाल
फतेहगंज पश्चिमी की रहने वाली रिषिका सक्सेना पेशेवर खिलाड़ी होने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में भी अग्रणी हैं। ग्रेपलिंग, कुश्ती, जूडो जैसे खेलों में खुद को साबित करने के बाद, वह समाज के उत्थान के लिए भी योगदान दे रही हैं। वे भारत सरकार की ओर से संचालित महिला मंगल दल की कोषाध्यक्ष हैं। इसके अंतर्गत वे सामाजिक परियोजनाओं के माध्यम से गांव में पौधे लगाने, बेटियों को मुफ्त में सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने जैसे सामाजिक कार्य करती हैं। वे बेटियों को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए आत्मरक्षा की ट्रेनिंग के लिए कैंप भी आयोजित करती हैं। इसके माध्यम से वह अभी तक 500 बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखा चुकी हैं।
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