शाहजहांपुर जिले के गढ़ियारंगीन थाना क्षेत्र के गांव खमरिया निवासी गोविंद सिंह की मौत के मामले में कहानी काफी हद तक बदली दिखाई दे रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पत्नी शिल्पी से पूछताछ के बाद पुलिस ने भी आत्महत्या की बात मान ली है। शिल्पी पर धारा 302 का मुकदमा दर्ज है जबकि पुलिस उसे धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 201 (साक्ष्य छिपाने) का आरोपी मान रही है। शनिवार को शिल्पी को जेल भेज दिया गया। किसान गोविंद रविवार शाम से लापता था। सोमवार को उसके चचेरे भाई संजीव कुमार ने गोविंद के बारे में भाभी शिल्पी से पूछताछ की तो उसने मुंबई जाने की बात कहकर टाल दिया। शक गहराने पर गोविंद के भाई गुरविंदर तक बात पहुंची। वह बृहस्पतिवार को गांव पहुंचा। उसने चार दिन के बाद ताले लगे दो कमरों से दुर्गंध आने पर खोला। एक कमरे में उसे खून मिला।
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मौके पर जांच करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे कमरे में 50 किलो के दरवाजे के नीचे खोदाई की गई तो गोविंद का शव बरामद हुआ। गुरविंदर ने शिल्पी पर हत्या कर शव दफनाने का आरोप लगाया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की जांच हत्या की तरफ चल रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग (लटकना) के बाद पुलिस ने मान लिया कि गोविंद ने आत्महत्या ही की है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
एसपी देहात संजीव कुमार वाजपेयी ने बताया कि शिल्पी ने जेल जाने से पहले बताया कि गोविंद शराब पीता था। वह उसे भी जबरन शराब पिलाता था। उसके बाद मारपीट करता था।
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मृतक का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सात अगस्त को गोविंद ने शराब पीकर उसे पीटा तो उसने भी जवाब दे दिया। इससे नाराज होकर छत से उतरकर कमरे में लगे कुंडे में साड़ी से फंदे से लटककर जान दे दी। सुबह चार बजे जब वह छत से उतरी तो गोविंद का शव लटका मिला। शिल्पी ने बताया कि यह देखकर वह काफी डर गई थी।
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crime
- फोटो : amar ujala
उसने वहां रखी कुर्सी गोविंद के पैरों के नीचे से हटाई और थोड़ा पैर ऊपर उठाकर गले का फंदा खोल दिया। इसके बाद गोविंद का शव जमीन पर आ गिरा। तब उसने फंदे को खोल दिया। इसके बाद पड़ोसी के घर से फावड़ा लाकर गड्ढा खोदकर शव दफन कर दिया।
भाई ने उठाया सवाल, सिर पर खून कहां से आया
मृतक गोविंद के भाई गुरविंदर ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लेकर पुलिस की पड़ताल पर सवाल उठाया है। उन्होंने बताया कि गोविंद ने फंदे से लटककर जान दी है तो उसके सिर पर खून कहां से आ गया। उसके शरीर पर चोटों के निशान भी थे। गुरविंदर का कहना था कि अगर गोविंद आत्महत्या करता तो शिल्पी लोगों को इसके बारे में बता सकती थी। शव उतारकर गड्ढा खोदने और उसमें शव दबाकर लोगों से बात छिपाने की क्या जरूरत थी। गुरविंदर ने कहा कि यह सीधे तौर पर हत्या का मामला है। वह सच्चाई सामने लाकर रहेंगे।