पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज के जंगल और शारदा डैम के किनारे स्थित चूका बीच का नजारा सैलानियों को गोवा जैसा एहसास कराता है। छह महीने तक चलने वाले पर्यटन सीजन के दौरान हजारों सैलानी यहां आकर प्रकृति की सुंदरता को करीब से निहारते हैं। इस बार पीटीआर का पर्यटन सत्र छह नवंबर से शुरू हो रहा है। जानिए यहां कैसे पहुंचे...
हरे-भरे जंगल और शारदा डैम के किनारे स्थित चूका बीच व बाघों के कारण पहचान बनाने वाला पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) सजने-संवरने लगा है। इस बार पर्यटन सत्र तय समय से नौ दिन पहले छह नवंबर से शुरू हो रहा है। ऐसे में तैयारियां तेज कर दी गईं हैं। इस बार भी बाघ का दीदार सैलानियों की पहली पसंद रहेगा।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में स्थित चूका बीच सैलानियों को गोवा जैसा एहसास कराता है। जंगल में बाघों की बेहतर संख्या और दीदार होने से पर्यटन ने इसको नई पहचान दिलाई है। छह माह तक चलने वाले पर्यटन सत्र के दौरान हजारों सैलानी यहां आकर प्राकृतिक सुंदरता को करीब से निहारते हैं।
विज्ञापन
2 of 9
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ
- फोटो : अमर उजाला
पिछले सत्र में 53 हजार सैलानी आए थे
जंगल सफारी के दौरान कभी पेड़ की टहनियों से खेलते तो कभी तैरकर नहर को पार करते बाघों के दीदार ने सैलानियों को यहां बार-बार आने पर मजबूर किया है। इसके परिणाम भी सामने आए हैं। पिछले सत्र में ही सैलानियों की संख्या दोगुना होकर 53 हजार के पार पहुंच गई थी।
विज्ञापन
3 of 9
चूका बीच में बनी हट ।
सजने-संवरने लगा चूका बीच
इस बार पर्यटन सत्र की शुरुआत छह नवंबर से हो रही है। इसको लेकर चूका बीच में मरम्मत व रंगाई-पुताई कर हटों को नया रूप दिया जा रहा है। जंगल सफारी के मार्गों को भी दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सत्र के दौरान सैलानी यूपी पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर बुकिंग कराने के बाद चूका बीच की हटों में ठहरते हैं। इस बार मुस्तफाबाद में बनाई गई कैंटीन भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
4 of 9
चूका बीच
- फोटो : अमर उजाला
चूका बीच पर ऐसे पहुंचे
पीलीभीत पहुंचने के बाद सैलानियों को गौहनिया चौराहे पर पहुंचना पड़ेगा। इसके बाद माधोटांडा मार्ग पर 30 किलोमीटर की दूरी तय कर कलीनगर के हरदोई ब्रांच नहर के पुल से सटे नहर मार्ग पर एक किलोमीटर चलकर खटीमा मार्ग पर जाना पड़ेगा। यहां से सात किलोमीटर की दूरी तय कर सैलानी मुस्तफाबाद पहुंचेंगे। जंगल सफारी वाहन को बुक करने के बाद वे पर्यटन स्थल का भ्रमण कर सकेंगे।
विज्ञापन
5 of 9
जंगल सफारी करते सैलानी
- फोटो : पीटीआर
जंगल सफारी का आनंद लेते हैं सैलानी
पर्यटन सत्र के दौरान वैसे तो पीटीआर के कई स्थान देखने लायक है, लेकिन सैलानियों की पहली पसंद बाघ के दीदार रहते हैं। जिसके चलते सैलानी कई दिनों तक यहां रुककर बार-बार सफारी का आनंद लेते हैं। उन्हें बाघ के दीदार भी होते हैं। सत्र के दौरान जंगल में विचरण करने वाले कुछ बाघ खास बने रहते हैं। जिनका सैलानियों ने नामकरण भी किया है। इसमें सुल्तान बाघ का परिवार और त्रिशूल बाघ शामिल हैं।
विज्ञापन
6 of 9
पीलीभीत टाइगर रिजर्व
- फोटो : संवाद
जंगल घुमाने के लिए वाहन बढ़ने की उम्मीद
पर्यटन सत्र के दौरान निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहता है। जिप्सी वाहनों से सैलानियों को जंगल घुमाया जाता है। सैलानियों को जानकारी देने के लिए जंगल से सटे इलाकों के युवाओं को गाइडों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। वहीं जिले के कई लोगों ने जिप्सी वाहनों को खरीदकर पर्यटन में लगाया है। जिससे वे रोजगार से जुड़ गए हैं। बीते सत्र में जहां 50 जिप्सी वाहन थे, इस सत्र में संख्या इनके 80 तक पहुंचने की उम्मीद है।
विज्ञापन
7 of 9
पिछले साल ग्रीस से आए थे सैलानी
- फोटो : पीटीआर
विदेशी सैलानियों की संख्या भी बढ़ी
पीटीआर देश ही नहीं विदेशों के सैलानियों को भी आकर्षित करने लगा है। जिसके चलते हर साल पर्यटन सत्र में विदेशी सैलानियों की संख्या बढ़ने लगी है। पिछले सत्र में यहां 189 विदेशी सैलानी पहुंचे थे। जो उससे पहले के सत्र से तीन गुना अधिक थे। इसमें जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका के सैलानी शामिल थे।
8 of 9
पीलीभीत टाइगर रिजर्व
- फोटो : अमर उजाला
यह है जंगल सफारी का खर्च
पीटीआर घूमने आने वाले सैलानियों के लिए शहर के नेहरू पार्क और मुस्तफाबाद गेस्टहाउस से जंगल सफारी वाहनों की व्यवस्था रहती है। इसके लिए शहर के नेहरू पार्क से सफारी वाहन बुक करने के लिए पांच हजार रुपये अदा करने पड़ते हैं। वहीं प्रति व्यक्ति यह शुल्क 1000 रुपये है। जबकि पीटीआर के मुस्तफाबाद गेस्टहाउस से सफारी वाहन बुकिंग करने पर चार हजार रुपये अदा करने पड़ते हैं। प्रति व्यक्ति 800 रुपये शुल्क है। सफारी बुकिंग के दौरान 100 रुपये का सेवा शुल्क भी सैलानियों को देना पड़ता है। जंगल की सैर करने के लिए दिन में दो समय निर्धारित किए गए हैं। जिसमें सुबह छह से नौ बजे और शाम को तीन से छह बजे निर्धारित हैं।
चूका बीच का निरीक्षण करते फील्ड डायरेक्टर विजय सिंह।
- फोटो : संवाद
डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि पर्यटन सत्र को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। व्यवस्थाओं को सुधारने का कार्य तेज है। चूका बीच में भी मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। सैलानियों की सुविधा का ध्यान रखते हुए कार्य कराए जा रहे हैं।