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ये कैसी पाठशाला: टपकती छत... दीवारों की दरार से झांकता है खतरा, तस्वीरों में देखिए सरकारी स्कूलों की दशा

Thu, 31 Jul 2025 08:28 AM IST
मुकेश कुमार अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

जर्जर भवन, झड़ता प्लास्टर, दीवारों में दरारें और बेंच के अभाव में टाट-पट्टी पर बैठे नौनिहाल... यही है बरेली जिले के सरकारी स्कूलों की तस्वीर। विद्यार्थी छत गिरने के डर से सहमे रहते हैं। इन्हीं चिंताओं के समाधान के लिए आज से शुरू हो रहा है हमारा विशेष अभियान ये कैसी पाठशाला। पढ़िए पहली रिपोर्ट...।
 
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सरकारी स्कूलों का हाल - फोटो : अमर उजाला
बरेली जिले में अमर उजाला की टीम ने बुधवार को सरकारी स्कूलों की पड़ताल की तो कई स्कूल भवन जर्जर मिले। कहीं छत से पानी टपक रहा था तो कहीं दीवारों की दरार से खतरा झांक रहा था। कहीं शिक्षकों की तादाद कम मिली।विशेष संचारी रोग नियंत्रण मुहिम भी स्कूलों तक नहीं पहुंची। कुछ स्कूलों के परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां हैं, जहां बारिश में विषधर (सांप) और मच्छरों के लार्वा पनपने की आशंका है। विभागीय अधिकारी कोरम पूरा कर रहे हैं। उनके पास निरीक्षण के लिए भी वक्त नहीं है। इन तमाम खतरों के बीच बच्चे पढ़ाई करते मिले। हालांकि वह भी छत गिरने की आशंका से सहम जाते हैं।
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प्राथमिक विद्यालय चीनी मिल नेकपुर में टिनशेड के नीचे पढ़ रहे बच्चे - फोटो : अमर उजाला
टिन शेड में पढ़ रहे नौनिहाल
नेकपुर चीनी मिल स्थित प्राथमिक विद्यालय के भवन का निर्माण वर्ष 1982 में हुआ था। तब इसमें चीनी मिल कर्मचारियों के बच्चे पढ़ते थे। वर्ष 1990 में चीनी मिल का संचालन ठप होने के बाद प्रबंधन ने स्कूल शासन को सौंप दिया। 
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प्राथमिक विद्यालय चीनी मिल नेकपुर - फोटो : अमर उजाला
जमीन और भवन चीनी मिल का होने से कायाकल्प योजना के तहत कार्य नहीं हुए। नगर निगम ने भी ध्यान नहीं दिया। वर्तमान में स्कूल में 70 बच्चे टिन शेड के नीचे पढ़ रहे हैं। स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को कीचड़ और जलभराव से गुजरना पड़ता है। इससे उनके बीमार होने की आशंका है।
 

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प्राथमिक विद्यालय चीनी मिल नेकपुर के विद्यार्थी - फोटो : अमर उजाला
स्कूल की प्रधानाध्यापिका निधि के मुताबिक, स्कूल में कोई सफाईकर्मी नहीं है। कंपोजिट ग्रांट से छिटपुट काम ही हो पाते हैं। अधिकारी निरीक्षण कर खामियां दर्ज कर रहे हैं। जल्द सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।
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प्राथमिक विद्यालय हरुनगला प्रथम की छत का गिरा प्लास्टर - फोटो : अमर उजाला
प्राथमिक विद्यालय हरूनगला प्रथम में 100 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्वीकृत तीन पदों के सापेक्ष दो शिक्षकों की ही तैनाती है। वर्ष 1980 में बना भवन जर्जर हो गया है। छत का प्लास्टर झड़ रहा है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत यहां तीन नए कक्ष बनाए गए हैं। इसी में कक्षा पांचवीं तक के बच्चे पढ़े रहे हैं। 
 
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प्राथमिक विद्यालय हरुनगला प्रथम का हाल - फोटो : अमर उजाला
स्कूल परिसर में झाड़ियां उग आई हैं। मच्छरों के डंक से बच्चों पर मलेरिया डेंगू का खतरा है। तीन शौचालयों में एक की छत से टिका यूकेलिप्टस का पेड़ भी बच्चों के लिए खतरा है। फर्नीचर न होने से बच्चे टाट पर बैठकर पढ़ते मिले। 
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जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
प्रधानाध्यापिका निर्मला देवी के मुताबिक, झाड़ियों को काटने के लिए नगर निगम को और जर्जर भवन की मरम्मत के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सफाई कर्मचारी तैनात नहीं है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कार्यालय - फोटो : अमर उजाला
बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय सिंह ने कहा कि जर्जर स्कूलों को चिह्नित कर बंद किया जा रहा है। कुछ स्कूलों में फर्नीचर नहीं है। है। जल्द उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे। 


 
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