बरेली में पैगंबर-ए-इस्लाम की यौमे पैदाइश का जश्न शुक्रवार को पूरे शहर में उत्साह के साथ मनाया गया। कोहाड़ापीर से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। इस दौरान फिजा में ‘सरकार की आमद मरहबा-दिलदार की आमद मरहबा’ की सदाएं गूंजती रहीं। यह जुलूस आला हजरत दरगाह के सरपरस्त मौलाना सुब्हान रजा खां, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) और अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल के सदर सैयद आसिफ मियां की कयादत में निकला।
कायद-ए-जुलूस सुब्हानी मियां ने अपराह्न तीन बजे झंडी दिखाकर जुलूस को रवाना किया। रंग-बिंरगी पोशाक, पगड़ी व जुब्बा पहने अंजुमन के लोग हाथों में इस्लामी संदेश की तख्तियां और बैनर लेकर इसमें शामिल हुए।
जुलूस में शामिल लोग
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जुलूस में शामिल खाने काबा व मस्जिद-ए-नबूवी की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। जुलूस में शामिल सजी बाइकें, खिलौना गाड़ियों में सजे बैठे बच्चे, कारें और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की सजावट भी लोगों को लुभाती रही।
दरगाह के नासिर कुरैशी ने बताया कि जुलूस कोहाड़ापीर से कुतुबखाना, नावल्टी, इस्लामिया कालेज रोड, करोलान, बिहारीपुर ढाल होते हुए दरगाह आला हजरत पहुंचकर मुकम्मल हुआ। इससे पहले मुफ्ती जईम रजा ने तिलावत-ए-कुरान से जुलूस का आगाज किया।
मौलाना सूफी मुनव्वर नूरी ने नात-ओ-मनकबत पेश की। मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने दुनिया को अमन-ओ-शांति की शिक्षा दी। इस दौरान सुब्हानी मियां, अहसन मियां व आसिफ मियां का स्वागत किया गया।
अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल के सचिव शान रजा ने सभी अंजुमनों के सदर की दस्तारबंदी की। कारी कलीम उर रहमान कादरी, राशिद अली खान, मोहसिन हसन खान, परवेज़ नूरी, शाहिद नूरी, हाजी जावेद खान, अजमल नूरी, ताहिर अल्वी, औररंगजेब नूरी आदि ने जुलूस की व्यवस्था संभाली।