बदायूं में शनिवार सुबह सरकारी आवास में सिविल जज जूनियर डिवीजन ज्योत्सना राय (29) का शव फंदे से लटका मिला। मौके से सुसाइड नोट भी मिला। मामले में परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। जिसके आधार पर पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज की। वहीं, सामने ये भी आया है कि महिला जज अयोध्या और लखनऊ में जमीन खरीदने वाली थीं। उन्होंने लखनऊ में ही एक जगह जमीन देख भी ली थी। अयोध्या में भी जमीन लेकर आशियाना बनाना चाहती थीं। इसका जिक्र उन्होंने अपने एक सहकर्मी से किया था।
विज्ञापन
2 of 10
Judge Jyotsna Rai
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, 22 जनवरी को श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा का भव्य समारोह देख दिवंगत महिला जज के मन में अयोध्या में ही आशियाना बनाने की इच्छा हुई थी। यहां की तैनाती के दौरान के एक सहकर्मी से उन्होंने इसका जिक्र करते हुए आवासीय प्लाट लेने की बात भी उसी दिन कही थी। यह मंशा अधूरी होती देखकर ही शायद उन्होंने सुसाइड नोट में सरयू तट पर अंतिम संस्कार किए जाने की बात लिखी।
विज्ञापन
3 of 10
Jyotsana Rai Case
- फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से मऊ के तहसील घोसी के गांव तराईडीह निवासी ज्योत्सना राय के पिता अशोक कुमार राय सहायक अभियोजन अधिकारी के रूप में अयोध्या में दो दशक पूर्व तैनात थे। उस समय ज्योत्सना राय पांच वर्ष की थीं और पिता के साथ यहीं रहती थीं। वर्ष 2018 में जब उनका उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में चयन हुआ, तब भी उनके पिता यहीं पर संयुक्त निदेशक अभियोजन के पद पर तैनात थे। 15 नवंबर 2019 को उनकी पहली कर्मभूमि भी अयोध्या रही तो यहां से उनका लगाव और गहरा हुआ।
4 of 10
Jyotsana Rai Case
- फोटो : अमर उजाला
12 अप्रैल वर्ष 2021 तक वह अतिरिक्त सिविल जज जूनियर डिवीजन, 13 अप्रैल से चार जुलाई 2022 तक न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम व पांच जुलाई 2022 से 28 अप्रैल 2023 तक अतिरिक्त सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर उन्होंने दायित्व का निर्वहन किया। अपने सरल व्यवहार व सौम्य व्यक्तित्व से वरिष्ठ अधिकारियों और वादकारियों के बीच भी उनकी अच्छी साख रही। इस बीच उनका तबादला बदायूं हुआ तब भी उनका लगाव अयोध्या से कम नहीं हुआ। अपने सहकर्मियों से वह फोन के माध्यम से बराबर संपर्क में रहीं।
विज्ञापन
5 of 10
Jyotsana Rai Case
- फोटो : अमर उजाला
22 जनवरी को श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिव्य व भव्य समारोह को देखकर उन्होंने उसी दिन अयोध्या में निवास करने का संकल्प भी किया। अपने एक सहकर्मी से उन्होंने फोन पर इसका जिक्र किया था लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। शनिवार को उन्होंने बदायूं में ही अंतिम सांस ली और उनका यहां निवास करने का सपना अधूरा रह गया। अंतिम संस्कार में शामिल सहकर्मियों में भी यह चर्चा रही कि अयोध्या से जुड़े इसी लगाव के कारण ही शायद उन्होंने सरयू तट पर अपने अंतिम संस्कार की इच्छा जताई होगी।
विज्ञापन
6 of 10
Jyotsana Rai Case
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में खरीदना चाह रहीं थीं आवास को जमीन
भाई हिमांशु शेखर राय ने बताया कि ज्योत्सना लखनऊ में जमीन खरीदना चाहती थीं। उन्होंने लखनऊ में ही एक जगह जमीन देखी थी। रविवार को ज्योत्सना, उनकी मां और वह जमीन देखने के लिए जाने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही यह घटना हो गई। अभी 15 दिन पहले ही वह लखनऊ से बदायूं आई थीं। तब उन्होंने एक सोफा और पिता को कार खरीदवाई थी। यह देखकर उन्हें जरा भी आभास नहीं हो रहा है कि वह कभी आत्महत्या कर सकती थीं, लेकिन इस घटना से सभी हैरत में हैं।
विज्ञापन
7 of 10
Judge Jyotsana Rai
- फोटो : अमर उजाला
बचपन से मेधावी थीं महिला जज, प्रदेश में थी छठवीं रैंक
महिला जज ज्योत्सना राय बचपन से ही मेधावी थीं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से उन्होंने दूरस्थ शिक्षा में एलएलएम की डिग्री ली थी। एलएलबी उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से किया था। लघु शोध प्रबंध उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के विधि संकाय अध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार राय के पर्यवेक्षण में किया।
8 of 10
Judge Jyotsna Rai
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा का परिणाम घोषित हुआ तो उन्हें प्रदेश में छठवीं रैंक मिली थी। उनके पिता के साथ कलेक्ट्रेट में तैनात रहे एक वरिष्ठ लिपिक ने बताया कि बचपन से ही वह विलक्षण प्रतिभा की धनी थीं। पढ़ लिखकर जीवन में सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने का उनमें जज्बा था।
9 of 10
Judge Jyotsana Rai
- फोटो : अमर उजाला
सिविल जज जूनियर डिवीजन ज्योत्सना राय (29) का शव शनिवार सुबह सरकारी आवास में फंदे से लटका मिला था। पुलिस के मुताबिक जज के कमरे से एक नोट भी बरामद हुआ। जिसमें लिखा था कि मेरी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं है। तुम्हें विवेचना करनी है तो कर लेना। तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा। वहीं, उनके पिता ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
ज्योत्सना राय के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लटकने (हैंगिंग) से मौत पुष्टि हुई है। शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल से कराया गया। इसके लिए उझानी सीएचसी से डॉ. हरीश कुमार, जिला अस्पताल से डॉ. राजेश कुमार वर्मा और महिला अस्पताल से डॉ. अनामिका सिंह को बुलाया गया। तीनों ने संयुक्त रूप से शव का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई।