शाहजहांपुर के पुवायां में अधिवक्ता के मुंशी की गुस्ताखी से छिड़े विवाद ने आईएएस रिंकू सिंह को इस्तीफे तक पहुंचा दिया। रिंकू सिंह ने पहले मुंशी से उठक-बैठक लगवाई। इसके बाद खुद उठक-बैठक लगाई। 36 घंटे बाद ही उनका तबादला हो गया था।
एक अधिवक्ता के मुंशी की कथित गुस्ताखी से छिड़े विवाद ने 2023 के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह को इस्तीफे की नौबत तक पहुंचा दिया। प्रशासनिक व्यवस्था से असंतुष्ट बताकर इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह को जुलाई 2025 में इस विवाद के बाद यहां से राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया था।
विवाद में पहले मुंशी से उन्होंने उठक-बैठक कराई थी और फिर उसकी गलती न मानते हुए बदले में अपने को उठक-बैठक के रूप में सजा दी थी। रिंकू सिंह राही ने पिछले वर्ष 28 जुलाई की रात 11 बजे पुवायां में एसडीएम का पदभार ग्रहण किया था।
अगले दिन वह ड्यूटी पर आए तो वकील आज्ञाराम शर्मा के मुंशी को दीवार के पास लघुशंका करते देख उठक-बैठक लगवाई थी। इसके बाद तहसील के दफ्तरों का निरीक्षण करने के बाद वह तहसील परिसर में कई दिन से धरना दे रहे वकीलों के पास पहुंचे तो वकीलों ने बताया था कि तहसील परिसर में बने शौचालय बेहद गंदे हैं।
ऐसे में वकील और मुंशी मजबूरन खुले में लघुशंका करते हैं। इस पर एसडीएम ने कहा था कि तहसील के बड़े अधिकारी होने के नाते वह सफाई ठीक से न होने की जिम्मेदारी लेते हैं। इसके बाद एसडीएम ने वकीलों के सामने कान पकड़कर पांच बार उठक-बैठक लगाई थी।
एसडीएम की उठक-बैठक का वीडियो वायरल होने के बाद मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया था। शासन स्तर से भी मामले का संज्ञान लेकर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट मिलने के बाद रिंकू सिंह राही को तैनाती के 36 घंटे बाद ही एसडीएम पद से हटाकर राजस्व परिषद, लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया था।
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रिंकू सिंह राही की फाइल फोटो
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पुवायां तहसील में पकड़ी थीं कई गड़बड़ियां
रिंकू सिंह राही ने 29 सितंबर 2025 को राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव को लिखे पत्र में पुवायां की घटना का पूरा ब्योरा लिखा था। उन्होंने पत्र में जिक्र किया है कि पुवायां का एसडीएम बनने के पहले ही दिन दो गड़बड़ियां पकड़ ली थीं।
पहले ही दिन मत्स्य पालन के लिए तालाबों की नीलामी और राजकीय गोसदन सिमरा वीरान की भूमि नीलामी की फाइलें उनके पास आईं थीं। गांव में बिना मुनादी कराए नीलामी की जानी थी। उन्होंने फाइल निरस्त कर दी थी। इसी तरह लेखपालों को सरकारी जमीन पर कब्जेदारों को नोटिस नहीं देने पर रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही थी।
जनसेवा का मौका नहीं मिलने के कारण दिया इस्तीफा: रिंकू सिंह
रिंकू सिंह राही ने मोबाइल पर हुई बातचीत में प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें काम करने का अवसर नहीं दिया गया और संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम चल रहा है।
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आईएस रिंकू सिंह का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसडीएम रहते हुए की गई कार्रवाई के बाद उन्हें साइडलाइन कर दिया गया। उन्हें वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनसेवा का मौका नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने अपने इस्तीफे को नैतिक निर्णय बताया है।
आईएएस रिंकू सिंह का इस्तीफा
यूपी काडर के वर्ष 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने इस सेवा से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें करीब आठ महीने पहले राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया था, जहां रिंकू सिंह राही के त्यागपत्र के अनुसार उनके पास कोई विशेष काम नहीं है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति के साथ-साथ केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) और उत्तर प्रदेश के नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को भी भेजा है। साथ ही उन्हें अपनी पूर्ववर्ती समाज कल्याण विभाग की सेवा में वापस भेजे जाने का भी अनुरोध किया है।
रिंकू सिंह राही को आईएएस की परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद 24 जुलाई 2025 को शाहजहांपुर में एसडीएम के पद पर तैनाती दी गई थी। वहां अधिवक्ताओं के आंदोलन के दौरान शौचालयों की खराब स्थिति के लिए उन्होंने स्वयं का न सिर्फ उत्तरदायित्व स्वीकार किया, बल्कि मौके पर ही उठा-बैठक भी लगाई। यह वीडियो वायरल होने पर उन्हें 30 जुलाई 2025 को राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया।
राही ने त्यागपत्र में लिखा है कि उन्होंने शाहजहांपुर में तैनाती के दौरान आमजन को बिना सूचना दिए तालाबों की नीलामी पर रोक लगाने और कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के प्रयास किए। लेकिन, प्रभावी दायित्वों से वंचित कर संबद्ध स्थिति में रखा जाना यह संकेत देता है कि ऐसी कार्यशैली व्यवहारिक स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। संबद्धता के बजाय समुचित रूप से दंडित किया जाना उचित होता।
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डोरी नगर स्थित आईएस रिंकू सिंह के आवास पर मौजूद पिता व परिवार के लोग।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इतना ही नहीं राही ने राजस्व परिषद में बिना कार्य के वेतन ग्रहण न करने का अनुरोध पत्र भी उच्चाधिकारियों को भेजा था। इसके बाद आवंटित सीमित कार्य के लिए भी उन्हें प्रोग्रामर उपलब्ध नहीं कराया गया। आय प्रमाणपत्र से संबंधित शासनादेशों में विरोधाभास और ओबीसी नॉन क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र में सेवा वर्ग के स्पष्ट उल्लेख के अभाव जैसे आवश्यक सुधारों के संबंध में भी पत्रावलियां प्रारंभ नहीं की गईं।
भविष्य को लेकर जताई आशंका
रिंकू सिंह राही ने 7 पेज के अपने त्यागपत्र में यह भी लिखा है कि उन्होंने उच्चाधिकारियों से समुचित कार्य दायित्व सौंपे जाने का अनुरोध किया, जो अब तक लंबित है। इतनी लंबी अवधि तक बिना किसी स्पष्ट कार्यदायित्व के केवल संबद्ध रखा जाना अत्यंत असामान्य प्रतीत होता है। साथ ही भविष्य में पेशेगत एवं प्रशासनिक प्रभावों को लेकर ठोस आशंकाएं पैदा करता है। संभवत: अन्य किसी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को इस प्रकार का अनुभव प्राप्त नहीं हुआ होगा।
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IAS Rinku Singh Rahi
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
समाज कल्याण अधिकारी रहते हमले में हुए दिव्यांग
आईएएस की सेवा में आने से पहले रिंकू सिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात थे। वर्ष 2009 में मुजफ्फरनगर में कार्यभार ग्रहण करने के चौथे महीने मार्च में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उन पर प्राणघातक हमला किया गया। इस हमले के कारण वे स्थायी दिव्यांगता की श्रेणी में आए और इसी श्रेणी में उन्होंने आईएएस की परीक्षा पास की। रिंकू सिंह अपने त्यागपत्र में लिखते हैं कि दिव्यांग श्रेणी का लाभ स्वीकार करना उनके लिए कोई व्यक्तिगत सुविधा नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रसेवा का अवसर प्राप्त करने का एक माध्यम मात्र था।
वेतन की तुलना में योगदान अत्यंत सीमित, भीतर गंभीर नैतिक द्वंद्व
रिंकू सिंह राही का कहना है कि प्राप्त वेतन, सुविधाओं एवं सम्मान के अनुपात में उनका वास्तविक योगदान अत्यंत सीमित रह जाना एक गंभीर नैतिक द्वंद्व पैदा करता है। जहां भी कार्य करने के अवसर उपलब्ध होते हैं, वहां स्थापित कुप्रथाओं का सुदृढ़ तंत्र है। यह तंत्र शासनादेशों को उनकी वास्तविक मंशा के अनुरूप लागू करने के प्रयासों में बाधाओं को जन्म देता है। निष्पक्ष सुनवाई के अभाव में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।
सांविधानिक मूल्यों से समझौता बिना काम करना असंभव
राही ने लिखा है कि व्यवहारिक स्तर पर ऐसी अनेक कुव्यवस्थाएं प्रचलित हैं, जो औपचारिक रूप से स्वीकार्य न होते हुए भी कार्यप्रणाली का अंग बन चुकी हैं। वरिष्ठ स्तर से यह भी संकेत दिए गए कि सांविधानिक मूल्यों से समझौता किए बिना वर्तमान व्यवस्था में उत्तरजीविता (सर्वाइवल) लगभग असंभव है।
आईएएस एसोसिएशन पर साथ न देने का आरोप
रिंकू सिंह राही ने आईएएस एसोसिशन पर साथ न देने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने आईएएस अधिकारियों के वाट्सएप ग्रुप पर मंगलवार को दिन में 1:58 बजे लिखा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा संघ से अपने निष्कासन की प्रक्रिया क्या है, जबकि इस बीच उनकी यह प्रार्थना लंबित है कि उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से मुक्त होकर सामाजिक कल्याण विभाग में अपने पूर्व कनिष्ठ पद पर पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जाए। यह निवेदन संघ द्वारा मेरे जैसे कनिष्ठ अधिकारियों के नैतिक तथा कर्तव्यनिष्ठ चिंताओं के प्रति निरंतर प्रदर्शित उदासीनता के परिप्रेक्ष्य में किया जा रहा है। यह संस्थागत अंतरात्मा के क्रमिक क्षरण को दर्शाती है तथा उस संवैधानिक नैतिकता को कमजोर करती है, जिसे यह सेवा अपने आचरण और कार्य में धारण करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका निकट भविष्य में सेवा में प्रवेश करने वाले सदस्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव रहेगा।