सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री रात में अपने सरकारी आवास में ही सोए। सामान लदे ट्रक खड़े रहे। हालांकि पहले यह जानकारी सामने आई थी कि वो अपना सरकारी आवास खाली करके चले गए हैं।
बरेली शहर के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा देने के बाद रातभर पुलिस और प्रशासन के साथ एक अनूठी चूहा-बिल्ली का खेल खेला। इस दौरान ब्राह्मण समाज और विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं का जमावड़ा उनके आवास पर रातभर बना रहा।
अग्निहोत्री कई बार अपने आवास से गाड़ी में बैठकर निकले, लेकिन हर बार वापस लौट आए। मध्य रात्रि लगभग 12:30 बजे वह कार से निकल गए, और उनके साथियों ने बताया कि वह किसी होटल में विश्राम करने चले गए हैं। इससे पहले कि पुलिस किसी होटल का पता लगा पाती, रात दो बजे अलंकार अग्निहोत्री अचानक अपने आवास पर लौट आए।
उनके आवास पर मौजूद नगर क्षेत्र अधिकारी तृतीय पंकज श्रीवास्तव ने उनसे सुरक्षा को लेकर बात की। श्रीवास्तव ने कहा कि बार-बार आवागमन से उनकी सुरक्षा को कोई खतरा होने पर पुलिस प्रशासन जिम्मेदार होगा।
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डीसीएम में अलंकार अग्निहोत्री का सामान लादते लोग
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने अग्निहोत्री से एक बार में अपना निर्णय लेने को कहा कि वे क्या करना चाहते हैं। इसी बीच, बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडे के अनुरोध पर, अलंकार अग्निहोत्री सरकारी आवास में रुकने के लिए सहमत हो गए। उनके निजी आवास कानपुर के केशव नगर भेजे जाने के लिए तैयार किए गए दो ट्रक अभी भी आवास के बाहर ही खड़े हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट आवास के गेट को किया बंद, पुलिस का पहरा
एडीएम कंपाउंड में स्थित सिटी मजिस्ट्रेट के आवास पहुंचने वाले मुख्य गेट को पुलिस में बंद कर दिया है। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों का कहना है कि ऊपर से रोक लगाई गई है इसलिए गेट बंद किया गया है। ऐसे में उनके समर्थकों ने लोगों को दामोदर पार्क में आने का आवाह्न कर दिया है। दामोदर पार्क में लोगों का पहुंचना शुरू हो गया है। हालांकि, सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अभी तक अपने आवास के अंदर ही हैं। सुबह 11 बजे एटीएम सिटी सौरभ दुबे, एसपी देहात मुकेश चंद मिश्रा, एसडीएम सदर प्रमोद कुमार समेत कई अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट की आवास पर पहुंचे।
बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे के पीछे ब्राह्मण विरोधी अभियान का आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। अग्निहोत्री ने हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि एक डिप्टी जेलर द्वारा एक ब्राह्मण को पीटने और एक दिव्यांग ब्राह्मण की पीट-पीटकर हत्या का मामला इसी अभियान का हिस्सा है।
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पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : अमर उजाला
माघ मेला और गजट नियम पर चिंता
अग्निहोत्री ने माघ मेले के दौरान ज्योतिर मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज और उनके शिष्यों के साथ हुए दुर्व्यवहार का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह संदेश दिया जा रहा है कि प्रशासन द्वारा पीटे जाने पर नरसंहार होगा।
इसके अलावा, उन्होंने 13 जनवरी, 2026 को जारी केंद्र सरकार के गजट नियम पर भी चिंता जताई, जिसके तहत विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को घोषित अपराधी माना जा रहा है। उनका मानना है कि इससे उनके बच्चों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं और समता समिति उनका फायदा उठाएगी।
जन प्रतिनिधियों की चुप्पी और सामूहिक इस्तीफे की अपील
अग्निहोत्री ने इस स्थिति के लिए ब्राह्मण समुदाय के सांसदों और विधायकों की चुप्पी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि मूक दर्शक बने हुए हैं और समाज के बेटों, बेटियों और बहुओं के साथ हो रहे अन्याय पर आवाज नहीं उठा रहे हैं।
उन्होंने सभी जन प्रतिनिधियों से तत्काल इस्तीफा देने और समुदाय के साथ खड़े होने की अपील की, अन्यथा समुदाय और सामान्य श्रेणी का नरसंहार निश्चित है। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि कॉर्पोरेट कंपनियों के कर्मचारी बनकर बैठे हैं। अग्निहोत्री ने राज्यपाल को भी पत्र लिखा है और अपना इस्तीफा उत्तर प्रदेश के सीईओ और जिला मजिस्ट्रेट को ईमेल के माध्यम से भेज दिया है।