बरेली के किला थाना क्षेत्र के स्वाले नगर में शनिवार रात रामपुर रोड पर हुए हादसे का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें तेज रफ्तार कार सड़क पर खड़े पेड़ से टकराते दिख रही है। इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई थी।
बरेली के किला थाना क्षेत्र के स्वाले नगर में शनिवार की रात हुए सड़क हादसे में तीन जिंदगियां जहां काल के गाल में समां गई तो चार गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे की वजह सड़क पर विशालकाय पेड़ है। समझ में यह नहीं आ रहा है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ की कटाई क्यों नहीं की गई और इसको हटाए बिना इस मार्ग को चालू कैसे कर दिया गया। इस सवाल पर वन विभाग व पीडल्ब्यूडी अपना तकनीकी पक्ष रखकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं घटना का जिम्मेदार कौन है। यह पूरी तरह से सरकारी तंत्र के रोड इंजीनियरिंग की पोल खोल रहा है। पूछताछ में पता चला कि यह मार्ग 2017 से पहले सपा सरकार में बनवाया गया था। हैरत की बात यह है कि यह फोरलेन सड़क पेड़ काटे बिना कैसे चालू कर दी गई।
हादसे में ससुर-बहू समेत तीन की गई थी जान
शादी समारोह से घर लौट रहे परिवार की कार शनिवार देर रात रामपुर रोड पर पेड़ से टकरा गई थी। हादसे में रामपुर जिला निवासी खेमकरन (60), उनकी गर्भवती बहू मोनी (30) और मुरादाबाद निवासी उनके रिश्तेदार रामगुलाम (85) की मौत हो गई। हादसे में गोविंद, उनका दो वर्षीय बेटा गुड्डू सहित तीन लोग गंभीर घायल हो गए। जिस पेड़ से कार टकराई, उसके आसपास कोई रिफ्लेक्टर भी नहीं लगा था।
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दुर्घटनाग्रस्त कार के पास खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
बोनट और इंजन में घुस गई थी पेड़ की लकड़ी
परिवहन विभाग व पुलिस की जांच में प्रथम दृष्टया मौत का कारण वाहन की तेज गति व झपकी आना बताया जा रहा है। कार जिस तरीके से पेड़ में कार टकराई है, उसके आगे की स्थिति को देखकर साफ पता चल रहा है कि वह 80 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही होगी। वाहन के अंदर मां की सीट पर साथ में बैठे दो साल के बालक का गिरा खिलौना भी लोगों में चर्चा का विषय है। वाहन के बोनट व इंजन में पेड़ की लकड़ी तक घुस गई है। रात करीब एक बजे दर्दनाक हादसा सीसीटीवी में कैद हो गया। जिसमें वाहन की गति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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कार हादसा
- फोटो : वीडियो ग्रैब
जिम्मेदारों ने झाड़ा पल्ला
उस पेड़ के आसपास सड़क भी टूटी हुई है। घटना स्थल से पहले एक पेड़ सड़क की तरफ लटक रहा है तो ऐसे दो पेड़ आगे भी लटक रहे हैं। जिससे कोई भी बस व ट्रक दुर्घटना होने की संभावना बनी हुई है। पीडब्ल्यूडी का दावा है कि सड़क निर्माण के समय निश्चित रूप से पेड़ कटवाने के लिए एनओसी ली गई होगी, अनुमति किन कारणों से नहीं मिली यह जांच का विषय है। वहीं वन विभाग भी यह कह रहा है कि आखिर एक साथ कई पेड़ों के काटने के लिए लाट बनती है, यह कैसे छूट गया। यह भी जांच का विषय है।
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मृतकों के गमजदा परिजन
- फोटो : अमर उजाला
घटना स्थल के सामने सेना रिटायर सूबेदार मेजर रहमत हुसैन ने बताया कि इसी पेड़ से एक माह पहले एक डीसीएम लड़ी थी, जिससे बैठे लोग घायल हुए थे। इसके लिए प्रशासन को संज्ञान में लाया गया। कई बार पेड़ काटने के लिए शिकायत भी की गई लेकिन एनओसी न मिलने के कारण कोई सुनवाई नहीं हुई। सपा सरकार में फोरलेन बनने के बाद सड़क को टूलेन करते हुए चौड़ीकरण तो कर दिया लेकिन सड़क पर व किनारे लटक रहे कुल चार पेड़ों को नहीं कटवाया गया। जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।
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इसी पेड़ से टकराई थी कार
- फोटो : अमर उजाला
तीन मौतों की जांच करेगी क्रैश इंवेस्टीगेशन कमेटी
सड़क हादसे में तीन या उससे अधिक के मरने वालों की जांच क्रैश इंवेस्टीगेशन कमेटी करेगी। इसमें जांच परिवहन विभाग के आरआई टी, पीडब्ल्यूडी के एई, यातायात के टीआई करेंगे। इनकी तरफ से 37 बिंदुओं पर जांच कराई जाएगी। जिसमें गाड़ी का प्रकार, क्रैश होने का कारण, एयर बैग खुला या नहीं, लाइट सही थी या नहीं, पीडब्ल्यूडी रोड़ के इंजीनियरिंग की जांच होगी। इसको 10 दिनों पर विवेचना करने के बाद रिपोर्ट को परिवहन विभाग के मुख्यालय, डीएम, यातायात निदेशालय में दिया जाएगा।
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दुर्घटनाग्रस्त कार
- फोटो : अमर उजाला
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने की जांच
घटनास्थल पर परिवहन विभाग के अधिकारी एआरटीओ प्रवर्तन वैभव श्रोती ने यातायात पुलिस के साथ जांच किया। जिसमें उन्होंने विभिन्न बिंदुओं पर जांच करते हुए तेज गति, टूटी सड़क, झपकी लगने को कारण पाया। साथ ही सड़क पर पेड़ होना भी हादसे का प्रमुख कारण माना। उन्होंने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी हैं। इस बाबत एआरटीओ प्रवर्तन वैभव सोती ने बताया कि घटना का कारण सड़क पर पेड़, तेज गति व झपकी भी मौत का कारण है।
पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता भगत सिंह ने बताया कि सड़क के चौड़ीकरण के लिए पेड़ों के चिन्हीकरण का काम पीडब्ल्यूडी व वन विभाग संयुक्त रूप से करता है। उसके बाद वन विभाग पेड़ों के काटने के लिए एनओसी लेता है, उसके बाद वन निगम पेड़ों की कटाई का काम करता है।
उप प्रभागीय वनाधिकारी विमल भारद्वाज ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण में सभी पेड़ों की लाट एक साथ बनती है। जिसके बाद सभी की कटाई की जाती है। एक पेड़ कैसे छूट गया यह तो जांच का विषय है।