होली के त्योहार पर बदायूं के ठेकेदार विनोद ठाकुर के परिवार पर ऐसी आफत आई कि पूरा परिवार ही तिनके की तरह बिखर गया। परिवार के लोग इतना टूट गए हैं कि वह अब तक संभल नहीं पा रहे। सबसे ज्यादा मां संगीता और होमगार्ड दादी मुन्नी देवी का हाल बुरा है। पिछले तीन दिन से वह ढंग से खाना भी नहीं खा रहीं।
बाबा कॉलोनी निवासी विनोद कुमार लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदी में ठेके पर टंकी का निर्माण करा रहे थे। दोनों बच्चों की हत्या वाले दिन भी वह वहीं थे। हत्याकांड के तीन चार दिन पहले उनकी पत्नी संगीता तीनों बच्चों को बाजार ले गईं थीं और उन्हें नए कपड़े और जूते दिलाए थे।
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आयुष को लाइट वाले जूते ज्यादा पसंद थे, उसने वही लिए थे। तीनों भाइयों ने जींस की पैंट-शर्ट खरीदी थी। कपड़े लाने के बाद उन्होंने अपनी दादी को भी दिखाए थे। इस पर दादी ने कहा था कि संभालकर रख तो, अब होली वाले दिन इन्हें पहनना। इसके बाद तीनों भाइयों ने अपने कपड़े और जूते अलमारी में रख दिए थे।
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अब वही कपड़े और जूते देख-देखकर मां संगीता और दादी रो पड़ती हैं। संगीता कहती हैं कि अब यह जूते-कपड़े कौन पहनेगा। पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ है। नाते-निश्तेदार और मोहल्ले वाले उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं।
याद रहे कि बदायूं के सिविल लाइंस थाना इलाके की बाबा कॉलोनी में 19 मार्च की शाम ठेकेदार विनोद ठाकुर के बेटे आयुष (13) और अहान उर्फ हनी (06) की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। घटना को जिले के ही अलापुर थाना क्षेत्र के कस्बा सखानूं निवासी साजिद और उसके भाई जावेद ने अंजाम दिया था। दोनों विनोद के घर के सामने ही हेयर सैलून चलाते थे।
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साजिद चाकू लेकर विनोद के घर में घुस गया था और उनके दोनों बच्चों को गला रेतकर मार डाला था। मझले बेटे पीयूष पर भी हमला किया था, लेकिन वह बच निकला था। मुख्य आरोपी साजिद उसी दिन रात में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था, लेकिन जावेद भाग गया था। जावेद ने गुरुवार सुबह बरेली में नाटकीय ढंग से पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था।
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कई वजह हैं पुलिस की कहानी पर लोगों के संदेह की
गिरफ्त में आए जावेद से पूछताछ के बाद पुलिस जो कहानी बता रही है, वह लोगों के गले नहीं उतर रही। हर कोई यह मान रहा है कि कहीं न कहीं कुछ ऐसा है, जिसे पुलिस सामने लाने से कतरा रही है। विनोद का परिवार भी कुछ छिपा रहा है। यह तमाम संदेह बेवजह भी नहीं हैं। इनके पीछे कई वजह हैं।
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मसलन, पहले दिन से लेकर जावेद के समर्पण करने तक जावेद और साजिद के माता-पिता, साजिद की पत्नी और विनोद व उनके परिजनों के बयानों में तमाम विरोधाभास सामने आए हैं। साजिद के मानसिक रूप से बीमार होने और उसके बच्चों से नफरत करने की बात भी तब सामने आई जब जावेद पुलिस के हाथ लगा।
उससे पहले जावेद व साजिद के माता-पिता ने ऐसी कोई बात पुलिस या मीडिया को नहीं बताई। साजिद के पिता बाबू और मां नाजरीन ने वारदात के कुछ घंटे बाद ही मीडिया को बताया था कि साजिद बेहद सीधे-सरल स्वभाव का था। उसका कभी किसी से झगड़ा तक नहीं हुआ। इसकी तस्दीक बाबा कॉलोनी के लोग भी करते हैं। ऐसे में यह कैसे मान लिया जाए कि साजिद मानसिक रूप से बीमार था और बच्चों से नफरत करता था।
जावेद के पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद विनोद की पत्नी संगीता ने मांग की थी कि जावेद से उनके और उनके परिवार के सामने पूछताछ की जाए। हालांकि सुरक्षा के लिहाज से पुलिस को यह मुमकिन नहीं लगा होगा, लेकिन इतना तो हो ही सकता था कि जावेद को जेल भेजे जाने से पहले उसका बच्चों की मां संगीता से आमना-सामना कराया जाता। ऐसा दोनों के बयानों की हकीकत की परख के लिए जरूरी भी था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया।
पुलिस को अब इस वारदात में एक नए एंगल तंत्र-मंत्र का भी शक है। इसे भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। हालांकि पुलिस कई और बिंदुओं पर भी जांच कर रही है। वारदात स्थल के लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रहे हैं। तमाम लोगों से जानकारी लेने की कोशिश भी की जा रही है। पुलिस ने साजिद और जावेद के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल भी निकलवा ली है, लेकिन उससे वारदात की वजह तलाशने में कोई खास मदद नहीं मिली है।
बड़ी जियारत में नहीं मिली पर्ची, मौलवी के बयान दर्ज
बृहस्पतिवार को जावेद ने पूछताछ में बताया था कि साजिद बड़ी जियारत पर जाता था। वहां एक पेड़ पर अपनी बात लिखकर टांग देता था। इसकी छानबीन करने शनिवार को सिविल लाइंस इंस्पेक्टर बड़ी जियारत पहुंचे। उन्होंने पेड़ पर टंगी पर्चियों को देखा, लेकिन साजिद की लिखी कोई पर्ची नहीं मिली और न ही उसका नाम किसी रजिस्टर में दर्ज था। इस दौरान पुलिस ने जियारत के मौलवी का भी बयान दर्ज किया।