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मौत को दस्तक देती और भी हैं मंडियां, जहां धूप नहीं पहुंचती, वहां कैसे पहुंचेगी फायर ब्रिगेड

Tue, 10 Dec 2019 01:56 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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घनी आबादी वाले बाजार में पतली गलियां - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के रानी झांसी मंडी रोड स्थित न्यू अनाज मंडी में हुए भीषण अग्निकांड ने लोगों को अंदर तक हिला दिया है। संकरे रास्ते की वजह से इस हादसे में फंसकर 43 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। हालात बरेली के भी जुदा नहीं हैं। शहर में घनी आबादी वाले तमाम इलाकों में बड़े गोदाम और बाजार हैं, जहां किसी तरह की अनहोनी होने पर दमकल की गाड़ियों के पहुंचने की तो बात ही छोड़िए... दिन में धूप तक नहीं पहुंच पाती है। अमर उजाला की टीम ने सोमवार को जब इन इलाकों का जायजा लिया तो हालात भगवान भरोसे नजर आए। पूर्व में यहां आग लगने की तमाम घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं।
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पतली गलियों में बसा बाजार - फोटो : अमर उजाला
घनी आबादी वाले कुतुबखाना इलाके में शास्त्री मार्केट है। यह दवाओं की थोक बिक्री का सबसे बड़ा मार्केट है। यहां दवाओं की सैकड़ों दुकानें हैं, जो पतली तंग गलियों के बीच हैं। बमुश्किल छह-सात फुट चौड़ी गलियों के दोनों ओर व्यापारियों और दुकानों के कर्मचारियों की बाइकें, स्कूटी आदि खड़ी रहती हैं। इस वजह से यहां पैदल निकलना भी मुश्किल होता है। हालांकि व्यापारियों ने दुकानों पर अग्निशमन के लिए छोटे सिलिंडर रखे हैं लेकिन कोई बड़ा हादसा हुआ तो उसकी कल्पना ही भयावह है।
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बरेली के बाजार में ढंग से नहीं पहुंचती है धूप - फोटो : अमर उजाला
शास्त्री मार्केट से कुछ दूरी पर स्थित कटरा मानराय कपड़ों का थोक बाजार है। बड़ी-बड़ी दुकानों में करोड़ों रुपये के सामान रखे हुए हैं, लेकिन हालात यहां भी शास्त्री मार्केट जैसे ही हैं। गलियां यहां भी तंग हैं और आग बुझाने के इंतजाम भी नहीं हैं। अन्य बाजारों की तरह ही तंग गलियों में सड़क के दोनों ओर खड़े वाहन रास्ते को और भी ज्यादा संकरा कर देते हैं। ऐसे में कोई हादसा होने पर यहां भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल है।

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इन बाजारों में नहीं है चलने की जगह - फोटो : अमर उजाला
श्यामगंज पुल के दोनों ओर किराना का बड़ा बाजार है लेकिन पुल बनने के बाद यहां फायर ब्रिगेड पहुंचने का रास्ता ही बंद हो गया है। किराना मंडी में कोई हादसा होने की स्थिति में बड़े दमकल वाहन सिर्फ कुतुबखाना बांसमंडी की ओर से घूमकर ही आ सकते हैं। इसके अलावा पुल के नीचे का रास्ता इतना संकरा हो गया है कि यहां सिर्फ 400 लीटर पानी वाली छोटी गाड़ी ही पहुंच सकती है।
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संकरी गलियों वाले बाजार - फोटो : अमर उजाला
अग्निशमन विभाग भी भगवान भरोसे चल रहा है। शहर की तंग गलियों वाले इलाकों को विभाग संवेदनशील क्षेत्र तो मानता है, लेकिन विभाग के पास इनकी कोई सूची उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ट्रांसफर होकर आने वाले नए स्टाफ को इस पर हर बार मशक्कत करनी पड़ती है। तंग गलियों की वजह से यहां तक फायर ब्रिगेड का पहुंचना ही मुश्किल है। घटना होने पर दमकल की गाड़ियां अगर लंबा चक्कर काटकर मौके पर पहुंचती भी हैं, तो तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
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संकरी गलियों वाले बाजार - फोटो : Amar Ujala
बरेली के प्रभारी एफएसओ रवीश चंद्र कहते हैं कि शहर की तंग गलियां और जाम आग बुझाने में हमेशा बाधक बनते हैं। सूचना मिलने के बावजूद कई बार फायर ब्रिगेड को मौके पर पहुंचने में काफी समय लग जाता है। स्टाफ की भी कमी है। हालांकि भर्ती चल रही है, उम्मीद है कि उसके बाद कुछ फोर्स मिल जाए।
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