बरेली में आठवीं वाहिनी पीएसी के सिपाही रवि ने ही पत्नी की हत्या की थी। नर्सिंग असिस्टेंट और डेंटर दोस्त ने उसका साथ दिया था। सिपाही ने दोस्तों को तीन लाख रुपये में सुपारी दी थी। 60 हजार रुपये पेशगी दी थी।
बरेली में आठवीं वाहिनी पीएसी के सिपाही रवि की पत्नी मीनू की हत्या का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मीनू की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके पति और पीएसी के सिपाही रवि ने ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर की थी। हत्याकांड की उलझी गुत्थी को पुलिस सुलझा लिया है। शुक्रवार को पुलिस लाइन में एसपी उत्तरी ने घटना का खुलासा किया। घटना को अंजाम देने वाले आठवीं वाहिनी पीएसी के सिपाही रवि, एंबुलेंस के नर्सिंग असिस्टेंट और वाहनों की वर्कशॉप में काम करने वाले डेंटर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
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आरोपी रवि (बीच में) और उसके साथी
- फोटो : अमर उजाला
पहले गुमराह किया, सख्ती पर टूट गया रवि
इंस्पेक्टर बिथरी अभिषेक सिंह और उनकी टीम को रवि शुरू के तीन दिन तक गुमराह करता रहा। वह खुद को हमले का शिकार बताकर निजी अस्पताल में भर्ती रहा जबकि वहां के डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि रवि की सभी रिपोर्ट पूरी तरह ठीक हैं। पुलिस उसे तीन दिन बाद थाने लाई तो उसने कभी प्लॉट देखने तो कभी मीनू को दवा दिलाने की वजह से कार लेकर जाने की बात बताई। हालांकि काफी घुमाने के बाद भी वह पुलिस को न तो उस डॉक्टर से मिलवा सका जिससे मीनू का इलाज चल रहा था और नहीं प्लॉट बेचने वाले को मिलवा सका।
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मीनू का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पांच साल की बेटी को मीनू का मोबाइल देकर घर में बंद करके आने की वजह भी वह नहीं बता सका जबकि वह कार लेकर निकला था। इंस्पेक्टर ने चौथे दिन जब उसे हत्या की वह एफआईआर दिखाई जो उसके ससुर ने उसके खिलाफ दर्ज कराई थी तो उसके तेवर ढीले पड़े। जब कॉल डिटेल की मदद से पुलिस पुलिस ने ने शानू शानू को पकड़ लिया तो दोनों दोस्तों ने घटना कबूल ली।
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मौके पर जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
शानू ने बताया कि जब रवि ने इस तरह हत्या करने की बात कही कि मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो तो उसने अपने दोस्त जतिन को साथ लिया। मेडिकल स्टोर्स पर मिलने वाले सामान्य इंजेक्शन को दुर्लभ बताकर जतिन ने एडवांस में साठ हजार रुपये रवि से ले लिए। जतिन ने इंस्पेक्टर को बताया कि सब प्लान के मुताबिक था पर रवि की ओवर एक्टिंग ने उन्हें भी फंसा दिया।
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मृतका का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
एनेस्थीसिया और बेमेल इंजेक्शन की दी सात डोज
रवि ने पुलिस को बताया कि कार की अगली सीट पर मीनू बैठी थी। रवि कार चला रहा था। पीछे की सीट पर डेंटर शानू और नर्सिंग असिस्टेंट जतिन बैठ गए। शानू ने मीनू की गर्दन पीछे से दबोच ली। फिर जतिन ने एक के बाद एक करके मीनू के गले पर सात इंजेक्शन लगाए।
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एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
एसपी ने बताया कि इनमें ऑपरेशन के दौरान बेहोश करने के लिए दिए जाने वाले इंजेक्शन, किसी मरीज की जान बचाने को हृदयगति बढ़ाने में इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शन, डायबिटीज ज्यादा होने पर उसे न्यूनतम स्तर पर लाने वाले इंजेक्शन और वेंटीलेटर पर ले जाने से पहले मरीज का शरीर शिथिल करने वाले इंजेक्शन शामिल थे।
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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
इंजेक्शन के बाद 15 मिनट तक किया इंतजार
इन बेमेल इंजेक्शन को बिना किसी बीमारी के जब मीनू को लगाया गया तो थोड़ी ही देर में उसका शरीर शिथिल पड़ गया। आरोपियों ने करीब 15 मिनट तक इंतजार किया और जब मीनू की सांस थम पूरी तरह गई तो भाग वह गए और खुद को दो चार सिरिंज यूं ही यहां वहां मारकर रवि नीचे खेत में लेट गया ताकि यह लगे कि उसने भी बदमाशों से संघर्ष किया है।
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खुलासे के संबंध में जानकारी देते एसपी उत्तरी
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने आरोपियों से इन इंजेक्शन की सात शीशी, दो सिरिंज जिनका इंजेक्शन लगाने में इस्तेमाल किया गया, पांच पैक्ड इंजेक्शन, पांच सिरिंज के पैकेट और मीनू के जेवर भी बरामद किए हैं।
आरोपी पति और मृतका का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
ये था मामला
रवि कुमार 22 फरवरी को कार से पत्नी मीनू को प्लॉट दिखाने के बहाने फरीदापुर पहुंचा। यहां प्लॉट बेचने वालों के रूप में जतिन और शानू पहले से मौजूद थे। रवि ने इन दोनों को कार की पिछली सीट पर बैठाया। इंजेक्शन लगाकर मीनू की हत्या के बाद शानू ने मीनू के शरीर से जेवर उतार लिए ताकि मामला लूट का लगे। रवि पास ही यूकेलिप्टस के बाग में लेट गया। पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने अपने दोस्त संजय को लूटपाट की सूचना दी।