बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री के समर्थन में सामान्य वर्ग के कई अधिवक्ता भी उतर गए हैं। इस्तीफे के लिए गणतंत्र दिवस का दिन तय किया गया था। चार दिन पहले ही इस्तीफे की पटकथा लिखी गई थी।
बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के कई रणनीतिक और राजनीतिक मायने भी हैं। हालांकि, इस्तीफे के पीछे प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों की पिटाई और यूजीसी के मुद्दे से जोड़कर भावनात्मक रूप देने की कोशिश की गई है।
चार दिन पहले ही इस्तीफे की पटकथा लिख ली गई थी। दिन भी गणतंत्र दिवस का तय किया गया। सोमवार को ही बरेली बार एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी ने शपथ ली और इसके बाद अलंकार ने इस्तीफा दे दिया।
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कलेक्ट्रेट से जाते सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अपने समर्थको के साथ
- फोटो : अमर उजाला
बार एसोसिएशन के सचिव पल-पल अग्निहोत्री के साथ रहे
सोमवार को डीएम आवास पर हुए घटनाक्रम से लेकर मंगलवार को हाईवोल्टेज ड्रामा के दौरान बरेली बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडेय पल-पल अलंकार अग्निहोत्री के साथ रहे। उन्होंने जब-जब मीडिया से बात की तो लगभग हर बार दीपक पांडेय का नाम लिया।
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कलेक्ट्रेट का गेट बंद होने पर धरने बैठे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री व उनके समर्थन जुटे लोग
- फोटो : अमर उजाला
इस्तीफे को लेकर अलंकार और दीपक के अलावा तीसरे व्यक्ति को मालूम नहीं
इसको लेकर कई कयास भी लगाए जा रहे हैं। दरअसल, इस्तीफे को लेकर अलंकार और दीपक के अलावा तीसरे व्यक्ति को मालूम नहीं था। सोमवार को अलंकार अग्निहोत्री गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल हुए और दीपक पांडेय ने फिर से बरेली बार के सचिव के रूप में शपथ ग्रहण की।
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कलेक्ट्रेट का गेट बंद होने पर धरने बैठे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री व उनके समर्थन जुटे लोग
- फोटो : अमर उजाला
गणतंत्र दिवस का दिन किया था तय
अलंकार अग्निहोत्री जब डीएम से मिलने उनके आवास पर गए तब दीपक उनके साथ थे। डीएम आवास पर बंधक बनाने की बात अलंकार ने सबसे पहले बार के सचिव को ही बताई। सूत्रों ने बताया कि 23 जनवरी वसंत पंचमी के दिन तय हो गया था कि गणतंत्र दिवस पर अलंकार इस्तीफा देंगे।
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कलेक्ट्रेट में डीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री व उनके समर्थन
- फोटो : अमर उजाला
'यूजीसी के नियमों में किया गया बदलाव समस्त सवर्ण समाज के खिलाफ'
सचिव दीपक पांडेय ने बताया कि यूजीसी के नियमों में किया गया बदलाव समस्त सवर्ण समाज के खिलाफ है। अलंकार से उनके व्यक्तिगत संबंध हैं। उनका इस्तीफा भावनात्मक है, ताकि समाज को संदेश जाए और गलत नीतियों के विरोध में समाज एकजुटता दिखाए। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को लेकर जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया वह निंदनीय है।
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समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट से लौटते निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : अमर उजाला
मेयर ने ली जानकारी
मेयर उमेश गौतम सोमवार की दोपहर करीब 3.30 बजे सिटी मजिस्ट्रेट के आवास पहुंचे। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या आप समर्थन करने पहुंचे हैं तो उन्होंने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम को जानने के लिए आए हैं। आखिर ऐसा निर्णय सिटी मजिस्ट्रेट ने क्यों लिया। साथ ही कांग्रेस व सपा के पूर्व पदाधिकारियों ने भी पहुंचकर समर्थन दिया।
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अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : अमर उजाला
शायराना अंदाज में इस तरह ली व्यवस्था पर चुटकी
बरेली बार एसोसिएशन के प्रबंध कार्यकारिणी के कनिष्ठ सदस्य मध्यम सक्सेना ने शायराना अंदाज में व्यवस्था पर चुटकी ली तो डीएम कार्यालय तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि कुर्सी है तुम्हारा जनाजा तो नहीं है, कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते। उन्होंने अलंकार का समर्थन करते हुए कहा कि हाकिम मेरे खिलाफ सिपाही मेरे खिलाफ, मिलती नहीं है फिर भी गवाही मेरे खिलाफ।
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कलेक्ट्रेट से जाते सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अपने समर्थको के साथ
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अधिकारियों ने पहले दिया कॅरिअर का हवाला फिर भावनाओं से जोड़ा
बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफा देने के बाद उनके वरिष्ठ अधिकारियों व साथियों का दो दिन तक उन्हें मनाने का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान अधिकारियों ने उनको पहले कॅरिअर का हवाला दिया, फिर भावनाओं से जोड़कर मनाने का प्रयास किया।
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सोमवार रात कार से बाहर जाते निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट
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मगर, सिटी मजिस्ट्रेट के सामने सारे प्रयास फेल साबित हुए। अधिकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट से कहा कि कितने कठिन परिश्रम के बाद पीसीएस अधिकारी बने हैं, इसको ऐसे ही मत जाने दीजिए।
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सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने दिया इस्तीफा
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यूजीसी बिल में सवर्णों की अनदेखी और शंकराचार्य का अपमान...सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के दिन अपने पद से इस्तीफा देकर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे में खलबली मचा दी। उन्होंने कहा कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए बिल में सवर्ण समाज के हित की अनदेखी और प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई से आहत हैं। ऐसा लग रहा है कि मौजूदा सरकार और प्रशासन साधु-संतों और ब्राह्मणों के खिलाफ काम कर रहा है। उन्होंने डीएम पर बंधक बनाने का भी आरोप लगाया।
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समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट से लौटते निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री
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सोमवार देर रात शासन ने किया निलंबित
हालांकि सोमवार की देर रात ही शासन ने उन्हें निलंबित कर शामली के जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया। मामले की जांच शासन स्तर से बरेली के मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी को सौंपी गई है। इस बीच निलंबन के दूसरे दिन मंगलवार को भी अलंकार का आक्रोश कम नहीं हुआ और समर्थकों संग वह पूरे दिन कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते रहे। उन्होंने डीएम अविनाश सिंह पर बंधक बनाने का आरोप भी लगाया हैं। फिलहाल वह पुलिस की निगरानी में अपने आवास में नजरबंद हैं।
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निलंबन के बाद अलंकार अग्निहोत्री की प्रोफाइल में हुआ बदलाव
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ई-मेल से भेजा गया पांच पेजा का इस्तीफा
राज्यपाल और भारत व राज्य निर्वाचन आयोग को ई-मेल से भेजे गए पांच पन्ने के इस्तीफे में अलंकार ने अपने वह चित्र भी साझा किए हैं, जिनमें वह सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के नाम और कार्यकाल वाले बोर्ड पर अपने नाम के सामने अंग्रेजी में रिजाइन लिख रहे हैं। दूसरे चित्र में वह यूजीसी रोल बैक, काला कानून वापस लो... के पोस्टर लेकर अपने सरकारी आवास के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।
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सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : संवाद
आरोप-डीएम के फोन पर लखनऊ के एक अधिकारी ने कॉल कर आपत्तिजनक शब्द कहे
सोमवार सुबह गणतंत्र दिवस पर कलक्ट्रेट में झंडा फहराने के बाद सरकारी आवास पहुंचते ही 2019 बैच के पीसीएस अफसर अलंकार ने अपने इस्तीफा देने की बात सार्वजनिक कर दी थी। इस्तीफा भेजने के बाद अलंकार मुखर हो गए थे और यूजीसी बिल लागू होने और शंकराचार्य के अपमान पर वह केंद्र-राज्य सरकार को घेरने लगे थे। फिर देर शाम डीएम से मिलने उनके आवास गए थे। वहां से बाहर निकलने पर उन्होंने डीएम आवास में 45 मिनट तक बंधक बनाए रखे जाने का आरोप लगाया।
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पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री
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साथ ही उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि डीएम के फोन पर लखनऊ के एक अधिकारी ने कॉल कर उनके लिए आपत्तिजनक शब्द कहकर कहा कि पंडित पागल हो गया है। इसे रातभर डीएम आवास में ही बंधक बनाकर बैठाए रखो... और दो घंटे में आवास खाली करा लो। सिटी मजिस्ट्रेट ने अपनी जान का खतरा बताकर जैसे-तैसे डीएम आवास से निकलकर आने की भी बात कही। अलंकार ने सोमवार रात में ही सरकारी आवास से कुछ सामान ट्रक में लोड किया, लेकिन रात में वह उसी आवास में ठहरे।
सुबह होते ही अलंकार अग्निहोत्री ने समर्थकों की सरकारी आवास में ही बैठक बुलाई, लेकिन पुलिस की सख्ती से वह बैठक नहीं कर पाए। इसके बाद सुबह 11.23 बजे से शाम 4.44 बजे तक वह आवास से लेकर कलक्ट्रेट तक समर्थकों संग प्रदर्शन करते रहे। कलक्ट्रेट गेट पर जमीन पर बैठकर घंटे भर तक धरना दिया। फिर डीएम कार्यालय के सामने समर्थकों संग जमकर नारेबाजी की। डीएम के मौजूद न होने पर वह अपराह्न 3.30 बजे फिर समर्थकों साथ कलक्ट्रेट पहुंचे और नारेबाजी की, मगर लेकिन से मुलाकात नहीं हो पाई थी।
जनतंत्र है और न ही गणतंत्र, बस भ्रमतंत्र है
बीएचयू आईआईटी से बीटेक उत्तीर्ण अलंकार के इस्तीफा के अंतिम पैरा में लिखा है कि केंद्र-राज्य सरकार में न ही जनतंत्र है और न ही गणतंत्र है, बस भ्रमतंत्र है...। देश में अब देशी सरकार नहीं, विदेशी जनता पार्टी की सरकार है...।