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Flood Alert: बलिया में फिर बहे सात मकान...आबादी क्षेत्र में घुसा पानी, 30 गांव बने टापू; तेजी से हो रहा कटान

Mon, 08 Sep 2025 07:47 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

Flood News: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का कहर जारी है। बलिया में नदिया उफान पर हैं। इस कारण कई गांवों के संपर्क मार्ग टूट चुके हैं। स्कूलों और काॅलेज में पानी भर जाने से शिक्षा प्रभावित हो रही है।
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चक्की नौरंगा गांव में गंगा नदी के कटान में गिर रहा पेड़। - फोटो : संवाद
Flood in Ballia: गंगा नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ाव होने से तटवर्ती लोगों की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। गंगा के जलस्तर में आधा सेमी प्रतिघंटा बढ़ाव हो रहा है। बाढ़ विभाग अधिकारियों ने बताया कि जिले में एचएफ के करीब जलस्तर पहुंचे का अनुमान है। यह स्थिति देख प्रशासन अलर्ट मोड़ में है। 

चौथी बार तटवर्ती क्षेत्रों में भयंकर बाढ़ की आशंका जताई जा रही है। इधर, चक्की नौरंगा में कटान से सात मकान विलीन हो गए। 

सोमवार को कटान से सात मकान नदी में समा गए। वहीं, शहर के निचले इलाकों के गायत्री व निहोरा कालोनियों तक पानी पहुंच गया है। महावीर घाट गायत्री मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर एक फीट तक पानी चढ़ गया है।
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बलिया में डूब गया काॅलेज। - फोटो : अमर उजाला
बैरिया तहसील क्षेत्र के गंगा उस पार चक्की नौरंगा गांव में श्रीकृष्णा चौबे, जयनारायण ठाकुर, गणेश ठाकुर, शिव शंकर ठाकुर, एकराम राम, नंद जी राम और दिनेश राम के मकान नदी में समाहित हो गया। साथ ही उपजाऊ भूमि भी गंगा की भेंट चढ़ने लगा है। 

भुवाल छपरा निवासी रमाकांत ठाकुर, ग्राम प्रधान सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि चक्की नौरंगा में ज्यादा मकान काटन की भेंट चढ़ चुका है। कुछ ही मकान शेष है, जो गंगा के किनारे है। केन्द्रीय जल आयोग गायघाट गेज पर सोमवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 59.060 मीटर रिकार्ड किया गया। यहां चेतावनी बिन्दु 56.615 हैं। खतरा बिन्दु 57.615 मीटर व मीडियम फ्लड 58.615 मीटर है। 
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स्कूल में भी घुसा पानी। - फोटो : अमर उजाला
गंगा नदी इस समय खतरा बिन्दु से 1.445 मीटर ऊपर बह रही है। यहां 2016 में उच्चतम स्तर 60.390 मीटर रिकार्ड किया गया था। नदी के बढ़ाव को देखकर रामगढ़ से लेकर नौरंगा तक के लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की नौरंगा, उपाध्याय टोला, नौरंगा, भगवानपुर के लोगों में अपना आशियाना खोने का भय सताने लगा है।

50 गांवों की 60 हजार आबादी गंगा की बाढ़ से प्रभावित
बलिया-बैरिया क्षेत्र के बादिलपुर से लेकर टेंगरही, सतीघाट, भुसौला, नारदरा व गंगा नदी के दक्षिण दिशा में स्थित चक्की नौरंगा तक 50 गांव गंगा की विकराल बाढ़ और कटान से जूझने लगी है। जिसमें 60 हजार की आबादी त्राहि-त्राहि कर रही है। दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो गई है। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में 20 हजार पशुओं को हरे चारे का संकट बना हुआ है। चक्की नौरंगा व दूबे छपरा की बाढ़ चौकी सिर्फ कागजों में दौड़ रही है।

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कई गांवों का टूटा संपर्क मार्ग। - फोटो : अमर उजाला
चक्की नौरंगा का बाजार हुआ वीरान
चक्की नौरंगा गांव में सोमवार को गंगा की लहरें अपने पूरे उफान पर थी। चक्की नौरंगा का बाजार भी अब वीरान हो चुका है। जहां कभी दुकानदार अपनी दुकानें सजाकर व्यवसाय करते थे, अब वहां टूटे-फूटे सामान और भरे हुए मलबे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। कोई भी दुकान नहीं बची, जो अपनी पहचान बनाए रख सके। व्यापारी अब उम्मीदें छोड़कर पलायन कर चुके हैं। कटान के मुहाने पर बाजार के बिखरने से वहां के लोगों को अपनी रोजमर्रा की खरीदारी करने के लिए बिहार स्थित गौरा बाजार अथवा रामगढ़ व बैरिया आना जाना पड़ रहा है।
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बाढ़ के बीच परिवार। - फोटो : अमर उजाला
सरयू नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी, कई गांव बाढ़ की चपेट में
सरयू नदी उफान पर है। जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव से लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है। बाढ़ का पानी भोजपुरवा, कोलकाला, रेगहा, चांदपुर, महाराजपुर, चकविलियम समेत आसपास के कई गांव को चपेट में ले लिया है। सबसे ज्यादा दिक्कत भोजपुरवा गांव के लोगों को झेलनी पड़ रही है। 
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बाढ़ के पानी के बीच दूसरे स्थान पर जाता युवक। - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच चुका है। मजबूरी में ग्रामीण अपने ही हाथों से वर्षों पुराने आशियाने तोड़ रहे हैं। मनोज और चंद्रमा नामक ग्रामीण अपने मकान गिराकर उसमें रखा सामान सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने से उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है। 
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गंगा के बाढ़ में सड़ रही फसल। - फोटो : अमर उजाला
एसडीएम बांसडीह अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। नाव और अन्य संसाधनों की व्यवस्था कराई जा रही है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के साथ-साथ राहत सामग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। प्रशासन की ओर से चांदपुर में बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का वितरण भी किया गया।

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पानी के बीच एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते बाढ़ पीड़ित। - फोटो : अमर उजाला
मकईया बाबा स्थान के पास पानी से घिरे मकान
सरयू नदी की बाढ़ से मकईया बाबा के स्थान स्थित दर्जनों लोगों का मकान बाढ़ के पानी से घिर गया है। रस्ते पर तीन से चार फीट तक पानी भरा हुआ है। स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर पैदल प्रधानमंत्री सड़क मार्ग तक पहुंचते है। गांव के गणेश यादव, नरेंसर यादव, रामनरायन यादव, हंसराज यादव ने बताया कि निकलने के लिए एक भी नाव नही लगाया गया है, जिससे ग्रामीण बाढ़ के पानी से होकर प्रधानमंत्री सड़क मार्ग तक पहुंच सकें।

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काॅलोनी में बाढ़ का पानी। - फोटो : अमर उजाला
शिवपुर घाट पर कटान हुआ तेज
गंगा का कटान शिवपुर घाट पर सोमवार को भी शुरू हो गया। यूपी बिहार को जोड़ने वाले गंगा नदी पर बन रहे पक्का पुल के पिलर संख्या ए-वन के पास कटान पहुंच गया। शिवपुर घाट पर विगत चार दिनों से कटान हो रहा है। बाढ़ विभाग ने कटान रोकने की कवायद शुरू कर दी है। पुराने सीमेंट की बोरी में मिट्टी भरकर डाला जा रहा है। नदी खेती योग्य भूमि को निगलने में लगी है।

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टोंस नदी का पानी गांव में घुस गया है। - फोटो : अमर उजाला
टोंस नदी का बढ़ने लगा जलस्तर, मुख्य मार्ग हुए जलमग्न
टोंस नदी में एक माह के अन्दर चौथी बार नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से चितबड़ागांव को नगवा गाई, बीबीपुर, बढ़वलिया, अख्तियारपुर, टीकरी, मंजूरपुर सहित दर्जनों गांवों से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। नदी का पानी सड़क पर फैल जाने से स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और व्यापारियों को आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि अचानक मार्ग डूबने से बच्चों को स्कूल पहुंचाना मुश्किल हो गया है, वहीं किसान अपने खेतों और बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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सड़कों पर बाढ़ और बारिश का पानी। - फोटो : अमर उजाला
छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर लगा ग्रहण
दयाछपरा क्षेत्र के पीएन इंटर कालेज, दूबेछपरा व अमर नाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुबे छपरा में लगातार बाढ का पानी भरने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर ग्रहण लग गया है। पीएन इंटर कालेज दुबे छपरा के प्रधानाचार्य सुधांशु प्रकाश मिश्र ने बताया कि अब तक दो बार पठन-पाठन शुरू करने के लिए साफ- सफाई कराई गई, जिसमें आर्थिक नुकसान बहुत हुआ। अब फिर बाढ़ का पानी विद्यालय में भरने लगा है।

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