घर में बड़ी मिन्नतों के बाद जले इकलौते चिराग ने ही तीन रिश्तों की डोर को जला दिया। पिता, चाचा, बुआ को कभी उम्मीद भी नहीं थी कि जिसकी जिंदगी भर की तकलीफ दूर करने के लिए वह दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, वहीं उनकी जिंदगी छीन लेगा।
बागपत में छपरौली के शबगा गांव निवासी कालू के दो बेटे ऋषिपाल व श्रीपाल और दो बेटियां वीरमति व सरोज थीं। बेटी वीरमति की शादी करने के बाद कालू ने बेटे ऋषिपाल व श्रीपाल की शादी की, लेकिन ऋषिपाल व श्रीपाल की पत्नियों को कोई संतान नहीं हुई। इसके बाद कालू ने ऋषिपाल व श्रीपाल की दूसरी शादी की, लेकिन श्रीपाल को फिर भी कोई संतान नहीं हुई। जबकि ऋषिपाल की पत्नी को एक बेटा अंजुल उर्फ मालू हुआ।